किसी परीकथा जैसी ही रोचक और रोमांचक है "इंस्टाग्राम" की कहानी

आज के युवाओं में सबसे लोकप्रिय एप्लीकेशन है इंस्टाग्राम10 करोड़ डाॅलर में जुकरबर्ग ने खरीदी इंस्टाग्रामकेविन सिस्ट्राम के दिमाग की उपज रही एप्लीकेशनआते ही इंटरनेट की दुनिया पर छाई इंस्टाग्राम

किसी परीकथा जैसी ही रोचक और रोमांचक है  "इंस्टाग्राम" की कहानी

Monday March 16, 2015,

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आज के समय में कम्प्यूटर और इंटरनेट हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, और तकनीक के इस्तेमाल ने दुनिया को बहुत छोटा करके हमारे हाथ में समेट दिया है। इंटरनेट हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है और रोजाना दुनियाभर के कई तकनीकप्रेमी इस माध्यम का प्रयोग कर सफलता की नित नई इबारतें लिख रहे हैं।

फेसबुक और उसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के नाम से शायद ही कोई इंटरनेटप्रेमी अंजान हो। बीते कुछ समय से मार्क और ’’इंस्टाग्राम’’ इंटरनेट और मीडिया की सुर्खियों में बने हुए हैं। मार्क ने इंस्टाग्राम नाम की इस नई एप्लीकेशन को 10 करोड़ डाॅलर की एक मोटी रकम चुकाकर फेसबुक के साथ उसका विलय किया। इंटरनेट की दुनिया के जानकारों के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक लेन-देन है।

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आईये हम आपको जानकारी देते हैं कि आखिर क्या है यह इंस्टाग्राम और इस एप्लीकेशन में ऐसा क्या खास है कि इसने पूरे इंटरनेट की दुनिया को हिलाकर रख दिया?

इंस्टाग्राम की सफलता की कहानी को जानने के लिये आईये कुछ फ्लैशबैक में चलते हैं। अब से कुछ वर्ष पहले नेक्स्टस्टाॅप नामक कंपनी में मार्केटिंग का काम करने वाले केविन सिस्ट्राॅम ने कभी सपने में भी इतने मशहूर होने के बारे में नहीं सोचा था। उनके पास न तो इंजीनियरिंग की कोई डिग्री थी और न ही उन्हें कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग का विशेष तजुर्बा और जानकारी थी।

केविन ऐसे ही समय गुजारने के लिये शाम के समय दूसरों के चल रहे कामों में हाथ बंटवाते और रात के समय प्रोग्रामिंग सीखते। जल्द ही उनकी लगन और काम के प्रति समर्पण रंग लाया और उन्होंने एक कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने में सफलता प्राप्त की जिसे उन्होंने ‘‘बर्बन’’ नाम दिया। बर्बन नाम की यह एप्लीकेशन तो बस एक शुरुआत थी।

समय बीतने के साथ-साथ केबिन बर्बन में सुधार करते रहे और उसे और बेहतर करने के प्रयास में जुटे रहे। इसी दौरान वे पार्टियों इत्यादि में अपनी इस एप्लीकेशन के बारे में लोगों को बताते और उसकी मार्केटिंग करते। आखिरकार उन्हें अपनी मेहनत का ईनाम मिला और बेसलाइन और एंडरसन हर्वित्ज ने उनके साथ हाथ मिलाया और करीब 5 लाख डाॅलर का निवेष किया। अब केविन एक नये जोश के साथ अपने काम में जुट गए लेकिन उन्हें अब भी अपने जैसे जुनूनी साथियों की तलाश थी।

केविन को जल्द ही साथ मिला माइक क्रीगर का, जो हाल ही में मीबों में अपनी नौकरी छोड़कर आये थे। इन दोनों ने आपस में मिलकर इस एप्लीकेशन के निर्माण को और आगे बढ़ाया।

केविन और माइक ने साथ मिलकर इस एप्लीकेशन के बारे विस्तार से विचार किया और कई दिनों तक इसकी बेहतरी के बारे में आपस में विमर्श और मेहनत करते रहे। इस दौरान ये दोनों बर्बन को व्यवस्थित कर एचटीएमएल-5 के द्वारा मोबाईल एप्लीकेशन का रूप देने में सफल रहे। इस मोबाइल एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता अपनी लोकेशन पता कर सकने के अलावा दिनों के कार्यक्रम तय करने के और भी बहुत कुछ कर सकता था। बर्बन में दोस्तों के साथ समय बिताने पर कुछ अंक भी मिलते और साथ ही आप इसमें अपनी तस्वीरें भी दूसरों के साथ बांट सकते थे।

मोबाईल के लिये बर्बन एप्लीकेशन बनाने के बाद इन दोनों को कुछ नया करने की सूझी। यह वो दौर था जब कैमरे वाले मोबाईल बाजार में और युवाओं में खासे लोकप्रिय हो रहे थे। बर्बन का इस्तेमाल करने वाले मोबाईल फोन कैमरे से खींचे फोटो को इंटरनेट पर सीधे डाल सकते थे और यही उसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण साबित हो रहा था।

इस बात से उत्साहित होकर इन लोगों ने सोचा कि क्यों न एक ऐसी एप्लीकेशन तैयार की जाए जो सिर्फ तस्वीरों के लिये ही बनी हो। इन दोनों ने एक नई एप्लीकेशन पर काम करना शुरू किया लेकिन सफलता दोनों के लिये दूर की कौड़ी साबित हो रही थी।

दोनों ने रात-दिन एक करके बर्बन को एक नया स्वरूप दिया लेकिन वो खुद ही उसकी सफलता को लेकर आशंकित थे। इसी आशंका में उन्होंने बर्बन की विशेषताओं को धीरे-धीरे कम करना शुरू किया ताकि उसे अधिक यूजर फ्रेंडली बनाया जा सके।

एक समय ऐसा आया जब बर्बन में सिर्फ तीन ही आॅप्शन, फोटो-शेयरिंग यानि की इंटरनेट पर फोटो डालना, फोटो पर टिप्पणी करना यानि कमेंट करना और उस फोटो को लाइक करना यानि उसे पसंद करने के आॅप्शन ही बचे। इसके बाद इन दोनों बर्बन को एक नया नाम दिया ‘‘इंस्टाग्राम’’।

6 अक्टूबर 2010 को इंस्टाग्राम को पहली बार दुनिया के प्रयोग के लिये एप्प स्टोर पर डाला गया और तीन महीने से कम समय में इस एप्लीकेशन ने 10 लाख से भी अधिक उपयोगकर्ता यानि की यूजर्स बनाकर दुनिया को चकाचैंध कर दिया। लेकिन असली कमाल होना तो अभी बाकी था।

कुछ समय बाद इंस्टाग्राम को एण्ड्राॅइड के लिये लांच किया गया तो यूजर्स ने उसे हाथों-हाथ लिया और एक ही दिन में रिकाॅर्ड 10 लाख लोगों ने उसे अपने मोबाइल में लोड किया। बाकी तो आप सब जानते ही हैं जो अब इतिहास के पन्नों में लिखा जा चुका है।

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को इंस्टाग्राम का उद्गम खुद के लिये सबसे बड़ी चुनौती दिखा और उन्होंने तुरंत ही उसपर अपना एकाधिकार कर लिया। केविन और माइक, दो युवा जिन्होंने कुछ नया करने की ठानी और अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया आज अपनी मेहनत की वाजिब कीमत और दुनिया में शोहरत पाकर सातवें आसमान पर हैं।

बस यही है इंस्टाग्राम की सफलता की परीकथा। मेहनत, लगन और किस्मत का था हो तो दुनिया में कुछ भी करना असंभव नहीं है।