चीनी लोन ऐप मामले में ED की कार्रवाई, कई बड़ी कंपनियों के 46 करोड़ फ्रीज

By रविकांत पारीक
September 16, 2022, Updated on : Fri Sep 16 2022 11:17:27 GMT+0000
चीनी लोन ऐप मामले में ED की कार्रवाई, कई बड़ी कंपनियों के 46 करोड़ फ्रीज
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने कुछ पेमेंट सर्विस (गेटवे) और अन्य कंपनियों के खिलाफ धन शोधन मामले में नए सिरे से छापेमारी की है. मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह कार्रवाई चीनी व्यक्तियों द्वारा ‘नियंत्रित' ऐप के जरिये तुरंत ऋण देने वाली कंपनियों द्वारा कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन मामले में की गई है. सूत्रों के अनुसार, कुछ पेमेंट गेटवे ऑपरेटरों से जुड़े परिसरों और ऋण ऐप लेनदेन में लगी कुछ कंपनियों और लगभग तीन राज्यों में ऑपरेटरों की तलाशी ली जा रही है.


ईडी ने Paytm, Easebuzz, Razorpay और Cashfree के बैंक खातों और वर्चुअल अकाउंट्स में रखे 46.67 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए हैं.


समाचार एजेंसी एएनआई ने इस छापेमारी की जानकारी देते हुए बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने ईजबज प्राइवेट लिमिटेड के 33.36 करोड़ रुपये जब्त किए हैं. रेजरपे सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड बैंगलोर के खाते से ईडी ने 8.21 करोड़ रुपये की जब्ती की है. कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बैंगलोर के अकाउंट से 1.28 करोड़ रुपये और पेटीएम पेमेंट्स सर्विसेज लिमिटेड, नई दिल्ली के अकाउंट से ईडी ने 1.11 करोड़ रुपये जब्त किए हैं.


प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, लखनऊ, गया समेत कई बैंकों के 16 परिसरों में छापेमारी की थी. पेमेंट गेटवे शाखाओं और कार्यालयों में छह व्यावसायिक और आवासीय परिसरों में ईडी ने पीएमएलए के तहत तलाशी अभियान चलाया था. गुड़गांव, मुंबई, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, जोधपुर और बैंगलोर में एचपीजेड नामक ऐप-आधारित टोकन और संबंधित संस्थाओं से संबंधित जांच के संबंध में यह छापेमारी हुई थी.


वहीं, इस पूरे मामले में पेटीएम ने सफाई दी है. पेटीएम ने इन खबरों को गलत बताया है. पेटीएम ने ट्वीट करते हुए कहा कि ईडी ने हमें विशिष्ट मर्चेंट संस्थाओं के एमआईडी से कुछ राशि फ्रीज करने का निर्देश दिया है. इनमें से कोई भी फंड पेटीएम या हमारी समूह कंपनियों से संबंधित नहीं है.


Easebuzz के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा,"Easebuzz में हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि ईडी के बयान में उल्लिखित कोई भी पार्टी हमारे मर्चेंट बेस से संबंधित नहीं है. अधिकारियों द्वारा उल्लिखित संस्थाएं केवल मर्चेंट की काउंटरपार्टी थी, जो हमारे पेमेंट गेटवे का उपयोग कर रहे थे और हमारे आंतरिक जोखिम और अनुपालन प्रक्रिया के अनुसार, जांच शुरू होने से बहुत पहले इस मर्चेंट को हमारे द्वारा सक्रिय रूप से पहचाना और ब्लॉक कर दिया गया था. हम जांच अधिकारियों के साथ पूरी तरह से सहयोग करने का इरादा रखते हैं, क्योंकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हमारे व्यापार संचालन मौजूदा नियमों का पालन करते हैं."


रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी की ओर से इस मामले में बयान जारी कर कहा गया है कि एचपीजेड टोकन की ओर से उपभोक्ताओं को बिटकॉइन और अन्य की क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग पर निवेश करने के बदले बड़ा मुनाफा दिलाने का वादा किया गया था. ईडी नगालैंड पुलिस द्वारा पिछले साल दर्ज एफआईआर के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है.


ईडी ने इसी महीने रेजरपे प्राइवेट लिमिटेड, कैशफ्री पेमेंट्स, पेटीएम पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड और चीनी व्यक्तियों द्वारा संचालित संस्थाओं के परिसरों की तलाशी ली थी. ईडी ने तलाशी अभियान के दौरान पाया गया कि ये नकली एड्रेस के आधार पर काम कर रही हैं. चीनी व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के मर्चेंट आईडी और बैंक खातों से 17 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई है.