Brands
YSTV
Discover
Events
Newsletter
More

Follow Us

twitterfacebookinstagramyoutube
Yourstory

Brands

Resources

Stories

General

In-Depth

Announcement

Reports

News

Funding

Startup Sectors

Women in tech

Sportstech

Agritech

E-Commerce

Education

Lifestyle

Entertainment

Art & Culture

Travel & Leisure

Curtain Raiser

Wine and Food

Videos

ys-analytics
ADVERTISEMENT
Advertise with us

जयपुर का एक ऐसा स्कूल जो 600 गरीब लड़कियों को देता है मुफ्त शिक्षा

गरीब लड़कियों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए जयपुर की लवलीना सोगानी ने की एक अनूठी पहल। स्लम इलाकों में शिक्षा से वंचित लड़कियों के लिए चलाती हैं स्कूल, जहां दिहाड़ी मजदूर, स्वीपर, पेंटर, रिक्शा चालक और खाना बनाने वालों की बेटियां पढ़ती हैं।

जयपुर का एक ऐसा स्कूल जो 600 गरीब लड़कियों को देता है मुफ्त शिक्षा

Wednesday May 10, 2017 , 6 min Read

संगीता ने ऐसी कौन-सी बात लवलीना सोगानी से कही, जिसे सुनकर वो अवाक रह गईं? वो कौन-सी बात थी जिसने लवलीना को समाज के एक ऐसे तबके से रू-ब-रू करवाया, जिसके बारे में सुनकर उनकी आंखें छलक गईं? वो कौन-सी बात थी, जिसे सुनने के बाद लवलीना को विमुक्ति गर्ल्स स्कूल शुरू करने की प्रेरणा मिली और उन्होंने एक ऐसा स्कूल खोल डाला जहां एक साथ 600 लड़कियों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है...

<h2 style=

फोटो साभार: thebetterindiaa12bc34de56fgmedium"/>

"देश के बाकी राज्यों की तरह राजस्थान गैरबराबरी भी गैरबराबरी का शिकार है। यही वजह है कि यहां के ग्रामीण इलाकों के लोग आजीविका चलाने के लिए दूसरे शहर चले जाते हैं। निम्न जीवन स्तर और गरीबी का सबसे ज्यादा दंश लड़कियों को ही झेलना पड़ता है और फिर वे भेदभाव का शिकार होती हैं। जहां एक ओर लड़कों को पढ़ने की आजादी और घर से सपोर्ट मिल जाता है वहीं लड़कियों से ये अपेक्षा रहती है कि वे घर के काम में हाथ बंटायेंगी। ऐसे माहौल में गरीब लड़कियों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लवलीना सोगानी ने एक अनूठी पहल की है।"

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है। लेकिन अगर महिला अधिकारों और लड़कियों की आज़ादी की बात करें, तो ये राज्य सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। 2011 की जनसंख्या के मुताबिक यहां लड़कियों की साक्षारता दर सिर्फ 52.1 प्रतिशत है। यानी इस राज्य की आधी से अधिक लड़कियों को पढ़ाई-लिखाई नसीब नहीं हो पाती। इसके अलावा अगर ये प्रदेश काफी कम उम्र में लड़कियों की शादी कराने के लिए कुख्यात रहा है, तो इसका सबसे बड़ा कारण यहां के लोगों की मानसिकता है। लोग अभी भी लड़कियों को लड़कों से कमतर मानते हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई को कोई अहमियत नहीं देते।

देश के बाकी राज्यों की तरह राजस्थान भी गैरबराबरी का शिकार है। यही वजह है कि यहां के ग्रामीण इलाकों के लोग आजीविका चलाने के लिए दूसरे शहर चले जाते हैं। निम्न जीवन स्तर और गरीबी का सबसे ज्यादा दंश लड़कियों को ही झेलना पड़ता है और फिर वे भेदभाव का शिकार होती हैं। जहां एक ओर लड़कों को पढ़ने की आजादी और घर से सपोर्ट मिल जाता है वहीं लड़कियों से ये अपेक्षा रहती है, कि वे घर के काम में हाथ बंटायेंगी। ऐसे माहौल में गरीब लड़कियों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लवलीना सोगानी ने एक अनूठी पहल की। वे जयपुर के स्लम इलाकों में शिक्षा से वंचित रह जाने वाली लड़कियों के लिए स्कूल चलाती हैं। उनके स्कूल शूरू करने की कहानी काफी दिलचस्प है। वे कहती हैं,

'मेरी सोसाइटी में हमारे गार्ड की 14 साल की बेटी संगीता मेरी बच्ची के साथ खेलने के लिए आती थी। वह मेरी बेटी के साथ खेलती जरूर थी, लेकिन हमेशा एक दूरी बनाकर रखती थी। अगर घर में बच्चों के लिए कुछ खाने को दिया जाता तो वह बिना कहे कुछ नहीं छूती थी। शायद परिस्थितियों ने उसे ऐसा बना दिया था।'

एक वाकया याद करते हुए लवलीना बताती हैं, 

'एक बार मैं बच्चों के लिए एक गिलास दूध के साथ बिस्किट लेकर आई। मैंने देखा कि संगीता चुपचाप अपनी आंख के पोरों से गिलास की ओर एकटक देखे ही जा रही थी। उसके बाद उसने अचानक से अपनी नजरें दूसरी ओर कर लीं। शायद वह अपना ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रही थी। ये देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए और मैं भागकर किचन से उसके लिए एक गिलास दूध लेकर आई।'

दूध पीने के बाद संगीता ने लवलीना को जो बताया उससे उनका दिल दुखी हो गया। संगीता ने बताया कि लड़कियां दूध नहीं पीतीं, दूध तो सिर्फ मेरे भैया (भाई) के लिए होता है। संगीता दो बहनें थीं, लेकिन सिर्फ उसका भाई ही स्कूल जाता था। संगीता की बात सुनकर लवलीना आवाक रह गईं। जब उन्हें पता चला कि समाज का एक ऐसा भी तबका है जहां लड़कियों की परवरिश इतनी बुरी हालत में होती है और फिर उन्होंने स्कूल खोलने की ठान ली। उन्होंने थोड़ी सी जगह में दो-तीन मेज और कुछ बच्चियों के साथ विमुक्ति गर्ल्स स्कूल की शुरुआत की। आज उनके इस स्कूल में तकरीबन 600 लड़कियां पढ़ती हैं और ये संख्या साल दर साल बढ़ती ही चली जा रही है।

हर साल लवलीना अपनी टीम के साथ पिछड़े इलाकों में जाती हैं और वहां लोगों को बेटियों को पढ़ाने के बारे में जागरुक करती हैं। मां-बाप को भी जब ये अहसास होता है कि पढ़लिख कर उनकी बेटी कुछ बन जायेगी, तो वे और उत्साहित होकर लड़कियों को स्कूल भेजते हैं। लवलीना लड़कियो को पढ़ाने के साथ ही उन्हें वोकेशनल ट्रेनिंग देती हैं जिससे वे थोड़ा बहुत कमा सकें और अपने घर में बोझ न समझी जायें।

लवलीना के विमुक्ति गर्ल्स स्कूल से केजी से आठवीं तक की पढ़ाई करने वाली रितु चौहान के पिता भजन गाने का काम करते हैं और उनकी मां हॉस्टल में खाना बनाती हैं। रितु के तीन छोटे और एक बड़ा भाई है। रितु बताती हैं, कि इस स्कूल में पढ़ाने के तरीके ने उन्हें काफी प्रभावित किया। यहां के टीचर्स हर एक बच्चे पर बराबर ध्यान देते हैं। वहीं बाकी के स्कूलों में इस बात से कोई मतलब नहीं होता, कि बच्चे का पढ़ाई में मन लग रहा है या नहीं।

विमुक्ति स्कूल में लड़कियों को इंग्लिश सिखाने पर भी जोर दिया जाता है, ताकि वे कहीं भी बेधड़क अंग्रेजी में बात कर सकें। अभी रितु एक सरकारी स्कूल में अपनी आगे की पढ़ाई कर रही हैं। उनका सपना है, कि वे आर्मी ज्वाइन कर देश की सेवा करें। लवलीना ने रितू जैसी न जाने कितनी लड़कियों के हौसले को उड़ान दी है। जो अब जिंदगी में आगे बढ़ने के ख्वाब देख रही होंगी।

विमुक्ति गर्ल्स स्कूल में केवल उन्हीं लड़कियों को एडमिशन मिलता है जिनके माता पिता की मासिक आय 10 हजार से कम होती है। यहां पढ़ने वाली लड़कियों को किताब-कॉपी से लेकर ड्रेस और खाने की सुविधा मुफ्त में दी जाती है और उनसे फीस भी नहीं ली जाती। यहां दिहाड़ी मजदूर, स्वीपर, पेंटर, रिक्शा चालक और खाना बनाने वालों की बेटियां पढ़ती हैं। 2004 में तीस लड़कियों के साथ शुरू हुए इस स्कूल में आज 600 से ज्यादा लड़कियां अपने सपनों को पंख दे रही हैं।