गाड़ी के पहिये हवा में लहराते हैं हरियाणा के बूढ़े भीम

गाड़ी के पहिये हवा में लहराते हैं हरियाणा के बूढ़े भीम

Sunday December 23, 2018,

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सत्तर साल के दो बुजुर्गों छाज्जू राम और टेकराम ने जब गाड़ी के भारी-भरकम पहिए अपने दोनों हाथ में लेकर हवा में लहराए तो लोग फटी-फटी आंखों से भौचक्का देखते ही रह गए। यहां के एक बूढ़े रामजीत राघव तो 96 साल की उम्र में बाप बनने का रिकार्ड बना चुके हैं।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


राज्य के बहादुरगढ़ क्षेत्र में तो एक अजब रिवाज है। पहले पुत्र को जन्म देने वाली यहां की पुत्रवती बेटियां दादा बूढ़े के मंदिर में पूजा करती हैं। गांव में भेलियां (प्रसाद) बांट ती हैं। हरियाणा की पहलवान लड़कियां भी पूरी दुनिया में नाम और दाम कमा रही हैं।

हरियाणा के तो बूढ़े भी गजब के दमखम वाले कुश्ती लड़ाके हैं। यह बात कुरुक्षेत्र में उस समय एक बार फिर साबित हो गई, जब सत्तर की उम्र में बुजुर्गों ने 160 किलो के पहिए दोनो हाथो में उठाकर घुमा दिए, जैसे कोई महाभारत का भीम करतब दिखा रहा हो। और तो और, 1916 में जन्मेै हरियाणा के एक बुजुर्ग रामजीत राघव को दुनिया में सबसे बूढ़ा पिता होने का भी खिताब मिल चुका है। रामजीत राघव भी जवानी के दिनों में कुश्ती लड़ा करते थे और वह बड़े-बड़े पहलवानों को जबर्दस्त पटकनी देते थे। वह 94 साल की उम्र में एक बेटे के और 96 वर्ष में दूसरे बेटे के पिता बने। जब वह परदादा बनने की उम्र में बाप बने तो यह खबर पूरी दुनिया में फैल गई।

उनका कहना है कि उन्होंरने अपने जवानी के दिनों में अपने खान-पान पर विशेष ध्या न रखा। मैदान पर कुश्ती लडने से पहले वह रोज तीन किलो दूध पिया करते थे। इसके साथ आधा किलो बादाम नियमित खाते थे। दिनभर में करीब आधा किलो घी खा जाया करते। उन्होंने खानपान में राजस्थान के किसान नानू राम जोगी का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नानू राम ने 90 साल में बाप बनने का रिकॉर्ड बना था। आज रामजीत राघव का परिवार गरीबी की मार झेल रहा है। बुजुर्गों को मिलने वाले पेंशन के सहारे उनका जीवन कट रहा है।

पिछले दिनो कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान हरियाणवी पंडाल में सत्तर साल के दो बुजुर्गों ने बैलगाड़ी के अस्सी-अस्सी किलो के दो पहियों को उठाकर लहरा दिया। उनके इस करतब ने लोगों का मन मोह लिया। बुजुर्गों का शौर्य प्रदर्शन देखकर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ये दोनो बुजुर्ग हैं गांव लोदर के छाज्जू राम और टेकराम।

पंडाल में तीसरे दिन यह करतब भीड़ में से उठकर आए दो बुजुर्गों ने दिखाया। वास्तव में बुजुर्गों का शौर्य प्रदर्शन देखकर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भीड़ ने बुजुर्गों का उत्साह बढ़ाया। इस मौके पर दोनों बुजुर्गों को मंच पर सम्मानित किया गया। जब बुजुर्गों से उनकी इस उम्र में ताकत का राज पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन में देसी घी बहुत खाया है। देसी खाना इसका खास राज है। देसां म्ह देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणा, यदि किसी को देखना है तो उनको हरियाणा पंडाल में आ जाना चाहिए।

राज्य के बहादुरगढ़ क्षेत्र में तो एक अजब रिवाज है। पहले पुत्र को जन्म देने वाली यहां की पुत्रवती बेटियां दादा बूढ़े के मंदिर में पूजा करती हैं। गांव में भेलियां (प्रसाद) बांट ती हैं। हरियाणा की पहलवान लड़कियां भी पूरी दुनिया में नाम और दाम कमा रही हैं। रियो ओलंपिक में देश को पहला मेडल दिलाने वाली पहलवान साक्षी रोहतक की हैं, जिन्होंने मात्र 10 सेकेंड में पूरी बाजी पलट दी थी। उन्हें ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला पहलवान का खिताब भी मिला हुआ है। वे युवाओं के लिए मिसाल बन गईं हैं। इसी राज्य से सोनीपत में पैदा हुए योगेश्वर दत्त इंटरनेशनल पहलवान हैं और युवाओं के आदर्श भी।

स्पाइन ट्यूमर से जंग जीत चुकी भैंसवाल गांव की पैरालंपिक मेडलिस्ट दीपा मलिक तो खेल में मेडल के अंबार लगा चुकी हैं। ऐसे ही योद्धाओं में शुमार हैं भिवानी में जन्में विजेंद्र कुमार, जिनका पूरी दुनिया में डंका बज चुका है। कुश्ती की मस्ती में तो बारहो मास हरियाणा झूमता रहता है। यहां के बूढ़ों की पहलवानी का खुमार फिल्मी दुनिया पर भी छाया रहता है। आमिर खान और सलमान खान भी इस राज्य की पहलवानी पर इतने फिदा हुए कि खुद ही पहलवान बन बैठे।

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