अपने लिए नहीं, उन लाखों ‘कीड़ों’ के लिए खाओ, जो तुम्‍हारे पेट में रहते हैं

कहानी उन करोड़ों माइक्रोबायोम्‍स की, जो आपके पेट के भीतर रहते हैं.

अपने लिए नहीं, उन लाखों ‘कीड़ों’ के लिए खाओ, जो तुम्‍हारे पेट में रहते हैं

Sunday February 12, 2023,

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अपनी बेस्‍ट सेलर किताब ‘मेटाबॉलिकल’ में डॉ. रॉबर्ट लस्टिग लिखते हैं- “Protect your liver and feed your gut.” यानी अपनी लिवर को बचाओ और गट यानि अमाशय को खिलाओ.

अगर आपसे कोई पूछे कि आप खाना किसके लिए खाते हैं तो आपका जवाब क्‍या होगा. जाहिर है, आप कहेंगे- अपने लिए, अपने शरीर के लिए. अपनी सेहत के‍ लिए.

लेकिन ये बात पूरी तरह सच नहीं है क्‍योंकि आप भोजन सिर्फ अपने लिए नहीं करते. या यूं कहें कि आपको सिर्फ अपने लिए नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि आप पर अपने साथ-साथ औरों के लिए भी खाने की जिम्‍मेदारी है.

ये बात थोड़ा उलझन में डालने और कनफ्यूज करने वाली है. औरों के लिए खाना मतलब? क्‍या दूसरों की प्‍लेट का खाना भी मुझे ही खा लेना है.

करोड़ों बैक्‍टीरिया का घर है आपका पेट

अरे नहीं. हम ये नहीं कह रहे. चलिए, इसे आसान ढंग से ऐसे समझते हैं. आपको लगता है कि आपका शरीर सिर्फ आपका है. लेकिन सच तो ये है कि आपके शरीर के भीतर लाखों की संख्‍या में छोटे-छोटे माइक्रोबायोम्‍स रहते हैं. माइक्रोबायोम एक तरह के बैक्‍टीरिया होते हैं. लेकिन वो वाले बैक्‍टीरिया नहीं, जो शरीर को बीमार करते हैं. माइक्रोबायोम्‍स तो आपके दोस्‍त हैं. हेल्‍दी, हैपी और फ्रेंडली बैक्‍टीरिया. 

आपके जन्‍म से लेकर मरने तक ये छोटे-छोटे लाखों माइक्रोबायोम्‍स आपके शरीर के भीतर रहते हैं. आपके शरीर से अपना पोषण ग्रहण करते हैं. पेट के अंदर ही खाना खाते हैं, पॉटी भी करते हैं और वहीं मजे से जिंदगी बिताते हैं.

आपको लग रहा होगा कि ये कैसा परजीवी पाल लिया शरीर में. इसे बाहर निकालो.  लेकिन ये माइक्रोबायोम्‍स कोई पैरासाइट नहीं हैं. ये आपके दोस्‍त हैं. ये आपके सेहतमंद रहने के लिए उतने ही जरूरी हैं, जितना जिंदा रहने के लिए हवा और पानी.  

इसलिए हम कह रहे थे कि आप अकेले नहीं हैं. आप अपने साथ-साथ उन लाखों-करोड़ों माइक्रोबायोम्‍स की सेहत के लिए भी जिम्‍मेदार हैं. आपको अपने लिए तो खाना ही है, साथ ही उनके लिए भी खाना खाना है.

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माइक्रोबायोम्‍स आखिर खाते क्‍या हैं?

चलिए, अब बात करते हैं आपके खाने और माइक्रोबायोम्‍स के खाने की. माइक्रोबायोम्‍स आखिर खाते क्‍या हैं? आपका फेवरेट फूड तो आपको पता है लेकिन क्‍या आपको उन माइक्रोबायोम्‍स के फेवरेट फूड के बारे में कुछ पता है?

माइक्रोबायोम्‍स का फेवरेट फूड होता है फाइबर. अगर उन्‍हें रोज पर्याप्‍त मात्रा में फाइबर खाने को मिले तो वे सेहतमंद रहते हैं. फूलकर खुशी से कुप्‍पा हो जाते हैं और पूरे शरीर से गंदगी को साफ कर, भोजन को ढंग से पचाकर, दिन भर बिना रुके, बिना थके मजे से अपना काम करते हैं.

जब माइक्रोबायोम्‍स अपना काम ढंग से करते हैं तो अगले दिन आपका पेट ढंग से साफ होता है. आपको खुलकर भूख लगती है. दिन भर खूब ऊर्जा महसूस होती है और रात में अच्‍छी नींद आती है.      

और अगर इसके उलट माइक्रोबायोम्‍स को अपना भोजन न मिले तो वो पहले कमजोर होते हैं, फिर मरने लगते हैं. जिंदा रहने के लिए वो शरीर आंतरिक दीवारों पर बनी म्‍यूकस की लेयर को खाने लगते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि आपका पेट खराब रहता है. आपके शरीर में, घुटनों में, जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है. आपकी स्‍मृति कमजोर होती है, दिन भर थकान महसूस होती है और रात को ढंग से नींद नहीं आती.

माइक्रोबायोम्‍स को सेहतमंद कैसे रख सकते हैं

यदि आपको स्‍वस्‍थ्‍य और बीमारियों से दूर रहना है तो उसका बेसिक फंडा है अपने माइक्रोबायोम्‍स की सेहत का ख्‍याल रखना. उन्‍हें वो खिलाना, जो उन्‍हें पसंद है. फर्ज करिए कि आपको कार्ब्‍स यानि कार्बोहाइड्रेट बहुत पसंद हैं. कार्ब्‍स यानि रोटी, चावल, ब्रेड, पास्‍ता, पिज्‍जा, बर्गर, फ्राइज, चिप्‍स, समोसे, कचौड़ी वगैरह-वगैरह.

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आप सुबह उठे और पेट भरकर ब्रेड, बटर ठूंस लिया. ये खाना पेट में गया, माइक्रोबायोम्‍स ने देखा और मुंह फेरकर चले गए. ये तो उनका भोजन है ही नहीं. वो इंतजार कर रहे हैं अपने फेवरेट खाने का.

हो सकता है आपने कार्ब्‍स के साथ-साथ कुछ प्रोटीन भी खाया हो और फैट भी. लेकिन वो भी माइक्रोबायोम्‍स का खाना नहीं है. आपने खाने के बाद जो मिठाई या आइसक्रीम या चॉकलेट खाई, उसे देखकर तो माइक्रोबायोम्‍स को अब गुस्‍सा ही आ रहा है. पूरा दिन गुजर गया और उन बेचारों को एक भी बार अपना फेवरेट खाना खाने को नहीं मिला.

जिस दिन माइक्रोबायोम्‍स को मिल जाए अपना फेवरेट फूड

अब फर्ज करिए कि आपने सुबह-सुबह उठकर फल खाए. अखरोट, बादाम, खीरा, टमाटर, हरी सब्जियां खाईं. कुल मिलाकर वो सारी चीजें, जिसमें ढेर सारी मात्रा में फाइबर होता है तो आपके माइक्रोबायोम्‍स को तो मजे ही आ गए. हरी सब्जियां और सलाद तो माइक्रोबायोम्‍स को इतना पसंद है कि पूछो ही मत. हरा सलाद मिलते ही वो खुशी से झूमने लगते हैं. सारे के सारे आकर इकट्ठा हो जाते हैं और फिर घंटों अपनी फेवरेट हरा सलाद चरते रहते हैं.

वो खुश रहते हैं तो हमें भी खुश रखते हैं. आप जितनी बार अपने शरीर में प्रॉसेस्‍ड कार्ब, प्रॉसेस्‍ड फूड, शुगर, कार्बोनेटेड ड्रिंक्‍स डालते हैं, आप उतनी बार अपने शरीर में रह रहे उन माइक्रोबायोम्‍स को परेशानी में डालते हैं. 

अपने दोस्‍तों का ख्‍याल रखना चाहिए

और किसी को यूं परेशानी में डालना अच्‍छी बात नहीं. और खासतौर पर अपने दोस्‍त को. माइक्रोबायोम्‍स आपके दोस्‍त हैं.

 

इसलिए कहते हैं, अच्‍छा खाना, सेहतमंद खाना, फाइबर वाली चीजें खाना, फल-सब्जियां खाना, कचरा मत खाना, फास्‍ट फूड मत खाना, जंक मत खाना. बाहर का नहीं, घर का बना खाना.


Edited by Manisha Pandey