अनपढ़ महिलाओं को घर पर पढ़ाकर कराया पांचवीं पास

By जय प्रकाश जय
February 19, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:31:24 GMT+0000
अनपढ़ महिलाओं को घर पर पढ़ाकर कराया पांचवीं पास
शिक्षा की ज्योति जलाए कोई तो राजसमंद (राजस्थान) की पुष्पा की तरह, जिन्होंने अपने घर पर ही पढ़ा-लिखाकर पीपली आचार्यान ग्राम पंचायत की केशवनगर बंजारा बस्ती की सत्रह निरक्षर महिलाओं को पांचवीं क्लास पास करा दिया।
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सांकेतिक तस्वीर


वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राजस्थान में में महिलाओं की जनसंख्या देश की महिला जनसंख्या का 5.46 प्रतिशत है। राज्य की कुल महिला आबादी में मात्र 52.1 प्रतिशत ही स्त्रियां साक्षर हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र की 70.7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र की 45.8 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दी लक्ष्यों में लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण का लक्ष्य रखा गया है। भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरूषों की बराबरी कर रही हैं पर शिक्षा के क्षेत्र में समानता के लिए कई स्तरों पर प्रयास चल रहे हैं। ऐसे में राजसमंद जिले की पीपली आचार्यान ग्राम पंचायत की केशवनगर बंजारा बस्ती में रहने वाली पुष्पा की पाठशाला ने एक अनोखी मिसाल कायम की है।


सरकारें और शिक्षा प्रशासन चाहे जो भी करे, न करे, पुष्पा ने तो इस बस्ती की अंगूठा छाप करीब सत्रह महिलाओं को पढ़ाकर पांचवीं कक्षा पास करा दिया। पिछले पंद्रह वर्षों में बंजारा बस्ती की मंजू, माया, श्यामू देवी, काली, बच्ची, कमला, प्रेमी, रुक्मिणी, पुष्पा, कमली, कविता, निरमा, शीला, कैलाशी, शीला आदि पुष्पा की पाठशाला में पढ़कर पांचवीं क्लास पास हो चुकी हैं।


पुष्पा ने साल 2000 में महासतियों की मादड़ी स्कूल से आठवीं बोर्ड की परीक्षा पास की थी। इसके बाद 2003 में केशवनगर बंजारा निवासी भीमराज बंजारा के साथ उनका विवाह हो गया। उनकी ससुराल में बालिका शिक्षा का कोई महत्व नहीं था। ससुराल वाले भी बालिका शिक्षा के खिलाफ थे, लेकिन पुष्पा ने हार नहीं मानी। उन्होंने सबसे पहले बस्ती की छोटी बालिकाओं को अपने घर पर बुलाकर निःशुल्क पढ़ाना शुरू किया और उनका छोटा सा कारवां खरामा-खरामा शब्दों की दुनिया में चल पड़ा।


पुष्पा बताती हैं कि लगभग डेढ़ दश पहले की बा है, उनकी आठवीं क्लास के बाद पढ़ाई छूट गई थी। शादी के बाद वह जब ससुराल पहुंची तो बंजारा बस्ती की बालिकाओं की निरक्षरता ने उन्हें विचलित किया। इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वह बस्ती की बच्चियों, महिलाओं को अपनी मेहनत से साक्षर करेंगी। उन पर उन्हे पढ़ाने का जुनून सा सवार हो गया। इस दौरान उन्हें अपने बस्ती वालों के विरोध का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।


पुष्पा ने बंजारा बस्ती की अंगूठा छाप करीब सत्रह महिलाओं को पढ़ाकर उन्हें पांचवीं क्लास पास भी करा दिया है। वह स्वयं भी दो वर्ष पूर्व राजस्थान ओपन बोर्ड से परीक्षा पास करने के बाद इस समय 12वीं क्लास उत्तीर्ण करने में जुटी हैं। वह बंजारा समाज की महिलाओं को साक्षर ही नहीं बना रहीं, बल्कि उन्हें सिलाई-कढ़ाई करना भी सिखा रही हैं। पुष्पा को जब भी समय मिलता है, एक थैले में स्लेट व चॉक लेकर बस्ती की महिलाओं के पास जाकर बैठ जाती हैं।


वहां उनको अक्षर ज्ञान, अपना नाम लिखना, पति का नाम लिखने का अभ्यास कराती हैं। कभी-कभी बस्ती की महिलाओं को समय नहीं मिलता तो पुष्पा उनके घर या खेत पर चली जाती हैं। गौरतलब है कि एक सर्वे रिपोर्ट में राजस्थान उन तीन चुनिंदा राज्यों में शुमार हुआ है, जहां साक्षरता ही नहीं, अन्य स्थितियों में भी महिलाओं की हालत सबसे खराब है। इस राज्य में मादा भ्रूण हत्या दर अधिक होने के साथ महिलाओं की साक्षरता दर भी सबसे कम है। सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि मादा भ्रूण हत्या, कम महिला साक्षरता दर, कम उम्र में महिलाओं की शादी, गर्भावस्था के दौरान मौत, ज्यादा बच्चों को पालने की जिम्मेदारी और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के मामले में राजस्थान सबसे आगे है।


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