बाइक ऐंबुलेंस के जरिए बेसहारा बुजुर्गों का मसीहा बना यह एनजीओ, अभी तक बचा चुका है 80 बुजुर्गों की जान

By yourstory हिन्दी
December 27, 2019, Updated on : Fri Dec 27 2019 08:31:30 GMT+0000
बाइक ऐंबुलेंस के जरिए बेसहारा बुजुर्गों का मसीहा बना यह एनजीओ, अभी तक बचा चुका है 80 बुजुर्गों की जान
जरूरतमंदों तक सबसे पहले लेकर पहुँचते हैं अपनी बाइक ऐंबुलेंस
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जरूरतमंदों के लिए हैदराबाद में बाइक ऐंबुलेंस का संचालन कर रहे हैं जॉर्ज राकेश बाबू। बेसहारा लोगों का सहारा बन चुके राकेश बाबू दुर्घटना के बाद सबसे पहले मदद करने पहुँचते हैं।

जॉर्ज

बेसहारा लोगों के मददगार हैं जॉर्ज राकेश बाबू



हैदराबाद के एक एनजीओ ने बेसहारा बुजुर्गों और सड़क पर घूमने वाले वृद्ध लोगों के लिए बाइक ऐंबुलेंस सेवा शुरू की है। यह सेवा खासतौर पर ऐसे बुजुर्गों के लिए शुरू की गई है जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है और वे इधर-उधर घूमते रहते हैं।


इस सुविधा के तहत जिन बुजुर्गों को तुरंत मेडिकल इमर्जेंसी की जरूरत होती है, उन्हें बाइक ऐंबुलेंस के जरिए फ्री में अस्पताल ले जाया जाता है। इस नेक काम को करने वाले एनजीओ का नाम है- ह्युमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ गुड समारीटन्स इंडियंस (HROGS) और इसके फाउंडर हैं जॉर्ज राकेश बाबू

जरूरतमंदों तक फौरन पहुंचती है मदद

हाल ही में रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाले 72 साल के वृद्ध अनूप जख्मी हो गए थे।


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आसपास के लोगों ने मदद के लिए ऐंबुलेंस को फोन किया, लेकिन ऐंबुलेंस नहीं आई, फिर एक शख्स ने ह्युमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ गुड समारीटन्स इंडियंस के फाउंडर राकेश बाबू को फोन किया।


राकेश बाबू ने तुरंत अपनी बाइक ऐंबुलेंस उठाई और जख्मी अनूप को लेने के लिए निकल पड़े।


राकेश बाबू ने अपनी बाइक ऐंबुलेंस के जरिए ही अनूप को हॉस्पिटल पहुंचाया।


उनकी इस तत्परता के कारण ही अनूप की जान बच गई।


HROGS काफी समय से हैदराबाद में गरीब और बेसहारा लोगों के लिए काम कर रहा है।


पहले इसका मुख्य काम सड़क पर बेसहारा और वृद्ध लोगों को शेल्टर होम उपलब्ध करवाने का था, फिर लोगों के बीच ऐंबुलेंस की समस्या को देखते हुए एनजीओ ने बाइक ऐंबुलेंस की सुविधा शुरू की है।



अभी एनजीओ के पास एक ऐंबुलेंस है, हालांकि एनजीओ का विचार है कि आने वाले दिनों में संख्या को बढ़ाया जाएगा। अपनी इस पहल के बारे में राकेश बाबू कहते हैं,

'जब भी हम ऐंबुलेंस को कॉल करते हैं, यह पहुंचने में 1 घंटा लेती है। अगर वहां किसी जख्मी के साथ कोई दूसरा व्यक्ति ना रहे तो ऐंबुलेंस वाले जख्मी को वहीं छोड़ देते हैं। जब से हमने बाइक ऐंबुलेंस सेवा शुरू की है, तब से हम 80 बुजुर्गों को बचा चुके हैं। बाइक ऐंबुलेंस से बुजुर्गों को चेकअप के लिए ले जाने के काम को भी आसान बना दिया है।'

बाइक कराई मॉडिफाई

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इस बाइक ऐंबुलेंस को बनाने का श्रेय मोहम्मद शहजोर को जाता है। मोहम्मद नैंपल्ली में बाइक मॉडिफाई करने की दुकान चलाते हैं। बाइक ऐंबुलेंस में स्टैंड लगा हुआ है जिस पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखा जाता है।


टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, मोहम्मद खान कहते हैं,


"साल 2017 में मैंने पहली बाइक ऐंबुलेंस तैयार की थी। एक बाइक को मोडिफाई करने में 40 से 50 हजार रुपये लगते हैं। जब एनजीओ ने बाइक ऐंबुलेंस के लिए मुझसे संपर्क किया, हमने देखा कि ये लोग गरीब इंसानों की मदद करने में बाइक ऐंबुलेंस का प्रयोग करना चाहते हैं। हमने उनसे सिर्फ बाइक की व्यवस्था करने के लिए कहा। बाद में मैंने उस बाइक को बिना कोई पैसे लिए मॉडिफाई किया। आखिरकार यह अच्छे कार्यों के लिए ही काम ली जाएगी।"

  


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