कॉटन मिलों से लेकर स्टॉक एक्सचेंज तक, कैसे इस बिजनेसमैन ने रिटायरमेंट के बाद लिखी सफलता की नई कहानी

By Bhavya Kaushal & रविकांत पारीक
December 07, 2021, Updated on : Thu Dec 09 2021 05:30:02 GMT+0000
कॉटन मिलों से लेकर स्टॉक एक्सचेंज तक, कैसे इस बिजनेसमैन ने रिटायरमेंट के बाद लिखी सफलता की नई कहानी
डीपी मंगल 2010 में फुल-टाइम नौकरी से रिटायर हुए। 62 वर्ष की आयु में, उन्होंने आंत्रप्रेन्योरशिप को आजमाने का फैसला किया। आठ साल बाद, उनकी सूत बनाने वाली कंपनी Lagnam Spintex स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हो गई।
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जबकि रिटायरमेंट का मतलब एक आसान, धीमा और शांतिपूर्ण जीवन जीना है, आंत्रप्रेन्योर द्वारका प्रसाद मंगल के लिए मामला बिल्कुल अलग था। 2010 में 62 साल की उम्र में, ऊर्जा से भरपूर मंगल, रिटायर हो गए और वे बड़े पैमाने पर कुछ करना चाहते थे। वह YourStory को बताते हैं, "मैं नियमित परामर्श कार्य नहीं करना चाहता था।"


यह तब हुआ जब उन्होंने आंत्रप्रेन्योरशिप को आजमाने का फैसला किया। कई वर्षों तक कपड़ा उद्योग में काम करने के बाद, जिसमें Rajasthan Spinning & Weaving Mills, Jagatjit Cotton Textile Mills और बहुत कुछ शामिल हैं, मंगल ने इस उद्योग के जरिए व्यापार बाजार में प्रवेश करने का फैसला किया। इस प्रकार सूती धागा निर्माता Lagnam Spintexअस्तित्व में आया।


2010 में, उन्होंने रिंग यार्न और ओपन-एंड यार्न के निर्माण के लिए एक यूनिट लगाने के लिए दिल्ली से भीलवाड़ा, राजस्थान में अपना बेस ट्रांसफर कर दिया। बिजनेस शुरू करने के लिए कुल 31 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था, और मंगल के अनुसार, उन्होंने लगभग 30 प्रतिशत राशि का योगदान दिया, और बाकी को एक बैंक द्वारा फायनेंस किया गया।


हालांकि, वह मानते हैं कि यह कदम आसान नहीं था। वे कहते हैं, "यह कठिन था क्योंकि मैंने अपने जीवन की कमाई को बिजनेस में डाल दिया था। साथ ही, दिल्ली से भीलवाड़ा जाना, जो इतना विकसित नहीं है, आसान नहीं था।”


वह आगे कहते हैं कि यह बदलाव उनके बड़े बेटे आनंद मंगल के लिए अधिक कठिन था। “आनंद का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ था। वह कुछ साल लंदन में भी रहे। लेकिन हम अपने प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए दृढ़ थे।"


आनंद ने University of Bradford में पढ़ाई की और 2012 में बिजनेस में शामिल होने से पहले कुछ वर्षों के लिए ICICI Bank के साथ काम किया।


व्यावसायिक उत्पादन 2012 में 960 ओपन-एंड रोटार के साथ शुरू हुआ था। उस साल कंपनी ने 35 करोड़ रुपये कमाए थे। उन्होंने 2013 से यूरोप को एक्सपोर्ट करना भी शुरू कर दिया और अन्य देशों में विस्तार किया। आज, उत्पादन का 55 प्रतिशत इटली, तुर्की, पुर्तगाल, कोलंबिया, चीन, बांग्लादेश और अन्य देशों को एक्सपोर्ट किया जाता है। मंगल बताते हैं, बांग्लादेश, कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है।


जैसे-जैसे उत्पादन का विस्तार हुआ, Lagnam Spintex ने 2014 में उसी यूनिट में 480 रोटार जोड़े और 2015 में अन्य 480 रोटार जोड़े।

भारत और बाजार

Statista की एक रिपोर्ट के अनुसार, कपास का भारत में सूत उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा है, और सूती धागे की बाजार हिस्सेदारी 71 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, कपड़ा और परिधान उद्योग सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 2.3 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके अलावा, भारत दुनिया में सूती कपड़े के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है।


Lagnam दुनिया भर के कई देशों को एक्सपोर्ट करता है और इसके सूती धागे का उपयोग विशेष रूप से डेनिम, टेरी टॉवल, बॉटम वियर, होम टेक्सटाइल, औद्योगिक कपड़े और बहुत कुछ बनाने के लिए किया जाता है।


इसके अलावा, कंपनी का महत्वपूर्ण राजस्व वैश्विक बाजार से आता है। इस साल, मंगल कहते हैं कि उन्हें 325 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है, जिसमें से 180 करोड़ रुपये एक्सपोर्ट से होंगे।


वे इस विकास यात्रा का चार्ट कैसे बना पाए हैं?


वे कहते हैं कि तकनीक पर भरोसा करके और सूत की गुणवत्ता को हमेशा अतुलनीय बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करते हुए।


वह कहते हैं कि कारखाने ने, पिछले कुछ वर्षों में, त्रुटिहीन गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स में आसानी सुनिश्चित करने के लिए कई उत्पादन प्रक्रियाओं को स्वचालित किया है, और जर्मनी, स्विट्जरलैंड और स्पेन जैसे विभिन्न देशों से मशीनरी का निर्यात किया जाता है।


वर्तमान में, Lagnam ने 1,920 रोटार और 25,536 स्पिंडल इंस्टॉल किए हैं, जिससे हर दिन 35 टन सूत का उत्पादन होता है। 2018 में, कंपनी National Stock Exchange के SME प्लेटफॉर्म पर भी सूचीबद्ध हुई। इस साल यह NSE के मुख्य प्लेटफॉर्म पर चली गयी।

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COVID-19 का प्रभाव और आगे की राह

COVID-19 महामारी को एक बुरा सपना बताते हुए, मंगल याद करते हैं कि 2020 में मार्च और अप्रैल के बीच उत्पादन इकाई लगभग एक महीने के लिए पूरी तरह से बंद थी, जिसके परिणामस्वरूप अगली कुछ तिमाहियों में नुकसान हुआ। लेबर की कमी ने कंपनी के संकट को भी बढ़ा दिया क्योंकि कई कर्मचारी शहरों से अपने गृहनगर भाग गए थे।


मंगल कहते हैं कि कंपनी एक्सपोर्ट के कारण सर्वाइव करने में सक्षम थी। “भारत में मांग शून्य थी क्योंकि कोई भी बाहर नहीं निकल रहा था। वैश्विक बाजार में व्यवधान था लेकिन मांग में कोई कमी नहीं थी।


मंगल बताते हैं कि महामारी ने बहुत सी चीजें बदल दी हैं, लेकिन यह जो सबसे बड़ा बदलाव लायी है, वह वैश्विक विक्रेताओं और खरीदारों के बीच यह धारणा है कि व्यवसाय को चालू रखने के लिए एक व्यक्तिगत बैठक महत्वपूर्ण है।


"पहले खरीदार की मानसिकता यह थी कि विक्रेता को संबंध बनाने के लिए उससे व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत है, लेकिन यह अब सच नहीं है," उन्होंने कहा, उनकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार यात्राएं काफी कम हो गई हैं, बातचीत के डिजिटल माध्यमों के लिए धन्यवाद।


आगे बढ़ते हुए, उनकी योजना दुनिया भर में अपनी उपस्थिति का विस्तार करना जारी रखना है और मौजूदा बाजारों में गहराई से प्रवेश करना है। कारोबार भी रिकवरी की राह पर है। उन्होंने अंत में कहा, "अक्टूबर 2020 और मार्च 2021 के बीच के महीनों ने व्यवसाय को ठीक करने में एक भूमिका निभाई है।"

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