गर्मी में तप रहा पूरा देश, 10 जून से बारिश की संभावना

By जय प्रकाश जय
June 05, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
गर्मी में तप रहा पूरा देश, 10 जून से बारिश की संभावना
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मौसम आग बना हुआ है। पूरा देश भीषण गर्मी से तप रहा है। वर्ष 1954 के बाद पिछले 65 सालों में दूसरी बार प्री-मॉनसून सूखे ने देशभर के किसानों को चिंतित कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक 10 जून के बाद मॉनसून जोर पकड़ सकता है।


beat the heat

सांकेतिक तस्वीर

इस समय देश का 42 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में है। इस बार छह या सात जून को मॉनसून केरल तट पर पहुंचने का अनुमान है। हालांकि शुरुआती 10 दिनों में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रह सकती है। 10 जून के बाद मॉनसून जोर पकड़ सकता है। केरल में मानसून सामान्यतः एक जून को पहुंचता है लेकिन इसमें सात दिनों का अंतर रहता है। कभी सात दिन पहले तो कभी सात दिन देरी से।


स्काई मेट ने चार जून को मानसून के केरल पहुंचने की संभावना व्यक्त की थी लेकिन मौसम विभाग ने उसकी रिपोर्ट को खारिज बताया कि मानसून छह जून को केरल पहुंचेगा। वर्ष 2014 से 16 के दौरान मानसून लेट आया था, पर तीनों साल बारिश सामान्य हुई थी। चढ़ते पारे से देश के कई राज्यों में रेल पटरियां चटकने लगी हैं। सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने सभी पथ निरीक्षकों को अलर्ट किया है कि दिन में 10 से शाम 4 बजे तक संवेदनशील ट्रैक प्वाइंटों की हर घंटे पेट्रोलिंग करें। 


भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 1954 के बाद बीते 65 सालों में यह दूसरा मौका है, जब प्री-मॉनसून सूखे ने खासकर किसानों को चिंतित कर दिया है। 1954 में प्री-मॉनसून 93.9 मिलीमीटर बारिश रेकॉर्ड की गई थी। उसके बाद 2009 में मार्च, अप्रैल और मई के दौरान 99 मिलीमीटर बारिश हुई थी। फिर 2012 में यह आंकड़ा 90.5 मिलीमीटर का था और अब 2019 में अब तक 99 मिलीमीटर बारिश हुई है। वेदर वेबसाइट अल डोराडो के मुताबिक दुनिया के 15 सबसे गर्म शहरों में भारत के आठ शहर हैं। इस समय देश में चुरू (50), गंगानगर (48.6), जोधपुर के फलोदी (48.2), बीकानेर (48.1), जैसलमेर (47.8), नौगांव (47.7), नारनौल (47.6) और खजुराहो (47.5) सबसे ज्यादा गर्मी से जूझ रहे हैं।





मौसम पूर्वानुमान पर स्काईमेट का कहना है कि इस साल मानसून में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसकी वजह 'अलनीनो' है। मॉनसून के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 93 फीसदी रहने की संभावना है। एलपीए की 90-95 फीसदी बारिश सामान्य से कम वाली श्रेणी में आती है। 1951 से 2000 के बीच हुई कुल बारिश के औसत को एलपीए कहा जाता है और यह 89 सेमी है। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो यह लगातार दूसरा वर्ष होगा, जब सामान्य से कम बारिश होगी। इस बार मानसून सीजन के दौरान सामान्यतः 96 प्रतिशत बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।


भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार 28 से 30 जून तक उत्तर भारत में मानसून छा जाएगा। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का मानसून सिस्टम नहीं बन पा रहा है। इसलिए मौसम विभाग ने सूरत और दक्षिण गुजरात में मानसून 20 जून तक पहुंचने के संकेत दिए हैं। हिमाचल में 25 जून मानसून पहुंचने का अनुमान है। पूर्व बिहार में मानसून 20 जून तक पहुंचने की संभावना है। मौसम के बेहतर पूर्वानुमान के लिए बिहार सरकार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) से समझौता करने जा रही है ताकि पूरे राज्य की सभी पंचायतों में एक-एक वर्षामापक यंत्र और हर प्रखंड में स्वचालित मौसम केंद्रों का जाल बिछाया जा सके। समझौते से उपग्रहों के जरिये प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखने में आसानी होगी।