पांच महीने बाद स्टार्टअप फंडिंग ने नवंबर में पार किया 1 अरब डॉलर का आंकड़ा

By रविकांत पारीक
December 05, 2022, Updated on : Mon Dec 05 2022 11:42:44 GMT+0000
पांच महीने बाद स्टार्टअप फंडिंग ने नवंबर में पार किया 1 अरब डॉलर का आंकड़ा
नवंबर महीने में स्टार्टअप्स ने 1.27 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. लेकिन निवेशक अभी भी सतर्कता बरत रहे हैं.
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भारतीय स्टार्टअप्स ने नवंबर में 1.27 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. यह जून के बाद से एक महीने में सबसे ज्यादा है, जब फंडिंग में मंदी आई थी और भारत में फाइनेंसिंग मार्केट पर असर पड़ना शुरू हो गया था. वेंचर इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने फंडिंग में वृद्धि का नेतृत्व ज्यादातर शुरुआती और ग्रोथ-स्टेज राउंड ने किया है, जो पांच महीने बाद 1 बिलियन डॉलार का आंकड़ा पार कर गया है.


इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने कहा कि लेटेस्ट डेटा में उन डील को शामिल किया गया है, जो कुछ महीने पहले पूरी हो गई थी, क्योंकि आम तौर पर फंडिंग जुटाने की आधिकारिक घोषणा करने के लिए यह समय जरूरी होता है. डील में मामूली वृद्धि के बावजूद, टेक निवेशकों ने कहा कि यह एक निरंतर सुधार की ओर इशारा नहीं करता है. लेट-स्टेज फंडिंग भी तनाव में बनी हुई है.


आंकड़ों से पता चलता है कि जून में जब भारतीय स्टार्टअप्स ने 2.36 अरब डॉलर जुटाए, के बाद जुलाई में फंडिंग घटकर लगभग 87.7 करोड़ डॉलर, अगस्त में 98.1 करोड़ डॉलर और सितंबर में 78.7 करोड़ डॉलर रह गई. हालांकि, पिछले दो महीनों में धीरे-धीरे सुधार दर्ज किया गया है, अक्टूबर में कुल 1 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाने के साथ. अलग से, मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Trackxn द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 में टॉप 10 डील में से नौ साल की पहली छमाही में पूरी हुई थी.


भारत-केंद्रित सीड-टू-अर्ली-स्टेज वेंचर कैपिटल फर्म India Quotient के फाउंडिंग पार्टनर आनंद लुनिया ने कहा: "नवंबर की डील जुलाई-अगस्त में पूरी हुई थी, और तभी हमने बहुत सारे लेन-देन हमारी तरफ आते देखे."


फंडिंग में अब तेजी क्यों आ रही है, इस पर लूनिया ने कहा: “इसका कारण यह है कि जनवरी-फरवरी में VCs के दिमाग में 2021 का हैंगओवर खत्म हो गया था. लेकिन फाउंडर मानसिक रूप से 2021 में इस साल जून या जुलाई तक थे. वैल्यूएशन की उनकी उम्मीदें एक ही जगह टिकी रहीं."


इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अमेरिका की तरह इकोसिस्टम को ठीक नहीं किया गया था. 2021 में बने सभी यूनिकॉर्न अभी भी हैं. अब तक, केवल 10% या 20% छंटनी के रूप में सुधार देखा गया है.

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