सरकार ने Swiggy, Zomato को शिकायत निवारण तंत्र को सुधारने के लिए कहा

पिछले 12 महीनों के दौरान, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर Swiggy के लिए 3,631 से अधिक और Zomato के लिए 2,828 शिकायतें दर्ज की गई हैं. दोनों कंपनियां राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शामिल होने वाले भागीदार हैं.

उपभोक्ता कार्य विभाग (Department of Consumer Affairs) ने प्रमुख ई-कॉमर्स फुड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) को वर्तमान व्यवस्था के साथ-साथ उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र (consumer grievance redressal mechanism) में सुधार के प्रस्ताव को 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

उपभोक्ता कार्य विभाग के सचिव रोहित कुमार सिंह की अध्यक्षता में प्रमुख ई-कॉमर्स फुड बिजनेस ऑपरेटर्स के साथ बैठक की. बैठक के दौरान इस सेक्टर में उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाले प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा करने के निर्देश दिए गए.

पिछले 12 महीनों के दौरान, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर Swiggy के लिए 3,631 से अधिक और Zomato के लिए 2,828 शिकायतें दर्ज की गई हैं. दोनों कंपनियां राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शामिल होने वाले भागीदार हैं.

बैठक के दौरान, उपभोक्ता कार्य विभाग (DoCA) की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर उपभोक्ताओं द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई. इसमें डिलीवरी और पैकिंग शुल्क की मात्रा की सत्यता और ऐसे शुल्कों की तर्कसंगतता, प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए फूड प्रोडक्ट्स की कीमत और मात्रा के बीच असमानता, रेस्तरां द्वारा की पेशकश की गई वास्तविक कीमत, एक ऑर्डर देने के समय उपभोक्ताओं को दिखाए गए डिलीवरी समय में असंगतता और जिस समय ऑर्डर वास्तव में डिलीवर किया जाता है तथा नकली समीक्षाओं से वास्तविक समीक्षाओं को अलग करने के लिए किसी भी सिस्टम का ना होना शामिल हैं.

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सांकेतिक चित्र

भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ (NRAI) ने ई-कॉमर्स फूड बिजनेस ऑपरेटर्स द्वारा रेस्तरां के साथ ग्राहक की जानकारी साझा नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया. यह उपभोक्ता की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने की उनकी क्षमता को प्रभावित करता है. इसके अलावा, डिलीवरी शुल्क फूड ऑपरेटर्स द्वारा निर्धारित और लागू किए जाते हैं. इसके अलावा, प्रत्येक ऑनलाइन ऑर्डर पर फूड बिजनेस ऑपरेटर्स द्वारा लगभग 20 प्रतिशत का कमीशन भी लिया जाता है.

विभाग द्वारा ई-कॉमर्स फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को निर्देश दिया गया था कि वे उपभोक्ताओं को ऑर्डर राशि में शामिल सभी शुल्कों जैसे डिलीवरी शुल्क, पैकेजिंग शुल्क, कर, मूल्य में वृद्धि आदि का पारदर्शी रूप से विवरण दें. प्लेटफ़ॉर्म को व्यक्तिगत उपभोक्ता समीक्षाओं को पारदर्शी रूप से दिखाना चाहिए और केवल समीक्षाओं का संग्रह दिखाने से बचना चाहिए. इस बात पर बल दिया गया कि उपभोक्ता के लिए पसंद के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और ई-कॉमर्स फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को सलाह दी गई थी कि वे उपभोक्ताओं को अपनी कॉन्टेक्ट डिटेल्स रेस्तरां के साथ साझा करने की अनुमति दें, यदि उपभोक्ता ऐसा चाहते हैं.

बैठक में स्विगी (Swiggy) और ज़ोमैटो (Zomato) के साथ-साथ NRAI सहित प्रमुख ऑनलाइन फूड बिजनेस ऑपरेटर्स ने भाग लिया.

निधि खरे, अपर सचिव एवं अनुपम मिश्रा, संयुक्त सचिव भी बैठक में शामिल हुए.

ई-कॉमर्स फूड बिजनेस ऑपरेटर्स ने देखा कि फूड प्रोडक्ट्स की कीमतें रेस्तरां द्वारा तय की जाती हैं और उनके पास उपलब्ध एक शिकायत निवारण तंत्र में उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज की गई शिकायतों की संख्या और प्रकृति को देखते हुए सुधार की गुंजाइश है.

बैठक के दौरान, स्टैकहोल्डर्स ने उपभोक्ता शिकायतों का बारीकी से निवारण करने और एक मजबूत शिकायत निवारण ढांचा विकसित करने की आवश्यकता को स्वीकार किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि बैठक में उठाई गई चिंताओं पर विधिवत विचार किया जाएगा और प्रस्तावित बेहतर और पारदर्शी ढांचे को 15 दिनों में विभाग के साथ साझा किया जाएगा.