पीपीई किट्स और सर्जिकल ग्लव्स जैसे 107 टेक्सटाइल्स आइटम्स को क्वालिटी कंट्रोल के तहत लाएगी सरकार

चीन से सस्ते उत्पादों की डंपिंग में कटौती करने के लिए सरकार द्वारा QCO विधि का तेजी से उपयोग किया जा रहा है. यह चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे के बीच आया है, जो भारत के कुल व्यापार घाटे का लगभग 40 फीसदी है.

पीपीई किट्स और सर्जिकल ग्लव्स जैसे 107 टेक्सटाइल्स आइटम्स को क्वालिटी कंट्रोल के तहत लाएगी सरकार

Friday January 06, 2023,

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सर्जिकल ग्लव्स, पीपीई किट्स, बुलेटप्रूफ कपड़ों, फायर रेजिस्टेंट कपड़ों जैसे 107 टेक्निकल टेक्सटाइल्स को क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) के तहत लाने पर विचार कर रही है. इसके बाद इन प्रोडक्ट्स की खराब गुणवत्ता की जांच की जाएगी और देश में इन प्रोडक्ट्स के मैन्यूफैक्चरर्स को भी अच्छे स्टैंडर्ड के कपड़े सुनिश्चित करने पड़ेंगे.

चीन से सस्ते उत्पादों की डंपिंग में कटौती करने के लिए सरकार द्वारा QCO विधि का तेजी से उपयोग किया जा रहा है. यह चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे के बीच आया है, जो भारत के कुल व्यापार घाटे का लगभग 40 फीसदी है.

टेक्सटाइल्स सेक्रेटरी रचना शाह ने कहा, चूंकि टेक्निकल टेक्स्टटाइल्स विशिष्ट कार्य के लिए बनाए जाते हैं, इसलिए गुणवत्ता सुनिश्चित करना सर्वोपरि है. गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) 107 टेक्निकल टेक्सटाइल्स वस्तुओं पर विचाराधीन हैं. 19 जियो-टेक, 12 प्रो-टेक, 22 एग्रो-टेक और 6 मेडी-टेक के लिए क्यूसीओ विचाराधीन हैं. मेडी-टेक के 48 आइटम्स पहले से ही केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) विनियम के अंतर्गत आती हैं.

शाह ने कहा कि टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर 500 से अधिक भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) विकसित किए गए हैं और बीआईएस उद्योग की आवश्यकता के अनुसार ऐसे 40 और मानक विकसित करने पर काम कर रहा है.

नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन (NTTM) के मिशन डायरेक्टर आरवी महेंद्र गौड़ा ने कहा, क्यूसीओ के उद्देश्यों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू स्तर पर निर्मित किए जा रहे उत्पाद गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करते हैं और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है. दूसरी बात यह है कि अगर हमारी गुणवत्ता बेहतर होगी तो हम कहीं और से होने वाले सस्ते आयात में कटौती कर सकते हैं. देश में बहुत सी चीजें डंप कर दी जाती हैं क्योंकि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है और बिना ज्यादा जागरूकता के इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. इसलिए क्यूसीओ भी जागरूकता पैदा करेंगे.

इस बीच, टेक्सटाइल्स मंत्रालय ने नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन के तहत दो गाइडलाइंस को मंजूरी दी है. इसमें पहला जनरल गाइडलाइंस फॉर इनेबलिंग ऑफ अकेडमिक इंस्टीट्यूट्स इन टेक्निकल टेक्सटाइल्स फॉर प्राइवेट एंड पब्लिक इंस्टीट्यूट्स और दूसरा जनरल गाइडलाइंस फॉर ग्रांट फॉर इंटर्नशिप सपोर्ट इन टेक्निकल टेक्सटाइल्स (GIST) है.

टेक्सटाइल्स मंत्रालय ने कहा कि ये गाइडलाइंस ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) डिग्री कार्यक्रमों के संबंध में लेबोरेटरी इक्विपमेंट के फंडिंग के अपग्रेडेशन या वृद्धि, लैब पर्सनल की ट्रेनिंग और प्रासंगिक विभाग के फैकल्टी मेंबर्स के विशेष प्रशिक्षण/विश्वविद्यालय/संस्थान में विशेषज्ञता के लिए फंडिंग को कवर करते हैं.

मंत्रालय ने कहा कि इसमें एनआईआरएफ रैंकिंग वाले सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थान और निजी संस्थान भी शामिल होंगे. टेक्निकल टेक्सटाइल्स में फुल कोर्स शुरू करने के लिए पीजी कोर्स के लिए 20 करोड़ रुपये और यूजी स्तर पर 10 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकती है. यूजी स्तर पर एक अनिवार्य विषय और कुछ ऐच्छिक शुरू करने पर 7.5 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जा सकता है.


Edited by Vishal Jaiswal