क्रेडिट गारंटी स्कीम: माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइजेस के लिए अब तक कितने लाख करोड़ की गारंटी हुई मंजूर, ये है डेटा

स्वीकृत गारंटी की कुल संख्या में से 21 प्रतिशत संख्या और कुल धनराशि में से 14 प्रतिशत धनराशि महिलाओं के स्वामित्व वाले MSE के लिए रही.

क्रेडिट गारंटी स्कीम: माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइजेस के लिए अब तक कितने लाख करोड़ की गारंटी हुई मंजूर, ये है डेटा

Tuesday March 28, 2023,

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साल 2000 से लेकर 28 फरवरी 2023 तक सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (Credit Guarantee Scheme) के तहत 4,06,310 करोड़ रुपये धनराशि की 69,04,649 गारंटीज स्वीकृत की गई हैं. ये आंकड़े केंद्रीय MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा (Bhanu Pratap Singh Verma) की ओर से राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में साझा किए गए. आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी 2023 तक, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के तहत स्वीकृत गारंटी की कुल संख्या में से 21 प्रतिशत संख्या और कुल धनराशि में से 14 प्रतिशत धनराशि महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसई के लिए रही. वहीं स्वीकृत गारंटी की कुल संख्या में से 6 प्रतिशत संख्या और कुल धनराशि में से 3 प्रतिशत धनराशि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले MSE के लिए रही.

दरअसल माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) अपने सदस्य लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस (MLIs) को बिना किसी कोलैटरल सिक्योरिटी या थर्ड पार्टी गारंटी के क्रेडिट गारंटी प्रदान करता है. यह क्रेडिट गारंटी MLIs की ओर से सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को दिए गए ऋण के लिए होती है. साल 2000 से लेकर 28 फरवरी 2023 तक, माइक्रो और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के तहत स्वीकृत गारंटीज की संख्या और धनराशि का राज्यवार विवरण इस तरह है...

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MSE-CDP को भी किया जा रहा लागू

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि MSME मंत्रालय पूरे भारत में माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेस-क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (MSE-CDP) लागू कर रहा है. इस स्कीम का मकसद माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइजेस के समग्र विकास के लिए सरकार की ओर से अनुदान के तौर पर मिलने वाली वित्तीय सहायता के माध्यम से क्लस्टर अप्रोच को अपनाते हुए माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइजेस की प्रॉडक्टिविटी और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है. सरकार की ओर से यह अनुदान मौजूदा क्लस्टर्स में कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स स्थापित करने और नए औद्योगिक क्षेत्रों/एस्टेट्स/फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्सेज की स्थापना या मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों/एस्टेट्स/फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्सेज के अपग्रेडेशन के लिए मिलता है.

MSE-CDP एक मांग संचालित सेंट्रल सेक्टर योजना है, जिसमें राज्य सरकार कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स की स्थापना और क्लस्टर्स में आवश्यकताओं के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रॉजेक्ट्स की स्थापना/अपग्रेडेशन के लिए प्रस्ताव भेजती है. MSE-CDP के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने के लिए महाराष्ट्र में 30 प्रॉजेक्ट मंजूर किए जा चुके हैं. इनमें से 14 प्रॉजेक्ट पूरे हो चुके हैं. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, MSE-CDP के तहत प्रॉजेक्ट की मंजूरी के साथ-साथ कामकाज में तेजी लाने के लिए एप्लीकेशन की प्रॉसेसिंग से जुड़े कई स्टेप्स को सरल बनाया गया है.

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Edited by Ritika Singh