डिग्री नहीं, करियर चाहिए: कैसे स्टार्टअप Sunstone बना लाखों छात्रों के करियर का सहारा, जानिए
गुरुग्राम का स्टार्टअप Sunstone छात्रों को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि बेहतर करियर देने पर फोकस करता है. AI, इंडस्ट्री इंटीग्रेशन और प्लेसमेंट सपोर्ट के जरिए यह लाखों युवाओं के भविष्य को नई दिशा दे रहा है.
भारत में शिक्षा हमेशा से उम्मीद की सबसे बड़ी डोर रही है. छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक, हर घर में एक ही सपना पलता है. अच्छी पढ़ाई, अच्छी नौकरी और एक बेहतर जिंदगी. मां-बाप अपनी पूरी कमाई बच्चों की पढ़ाई पर लगा देते हैं. बच्चे भी सालों मेहनत करते हैं. लेकिन जब डिग्री हाथ में आती है, तब कई बार असली संघर्ष शुरू होता है. नौकरी नहीं मिलती. या फिर वह काम नहीं मिलता जिसके लिए पढ़ाई की थी.
देश में हर साल लाखों छात्र ग्रेजुएट होते हैं. डिग्रियां बढ़ रही हैं, लेकिन रोजगार के मौके उसी रफ्तार से नहीं बढ़ रहे. कंपनियां कहती हैं कि उन्हें स्किल्ड लोग नहीं मिलते. वहीं छात्र कहते हैं कि उन्हें सही मौके नहीं मिलते. यह एक ऐसी खाई है, जो साल दर साल गहरी होती जा रही है. इसी खाई को भरने के लिए कुछ लोगों ने अलग सोच रखी. उन्होंने तय किया कि शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबें और एग्जाम नहीं होना चाहिए. असली मकसद होना चाहिए एक मजबूत करियर.
इसी सोच से जन्म हुआ Sunstone का. एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जो शिक्षा और नौकरी के बीच की दूरी को कम कर रहा है. अंकुर जैन (Ankur Jain) इस स्टार्टअप के को-फाउंडर और सीबीओ (चीफ बिजनेस ऑफिसर) हैं. उन्होंने अपने अनुभव से यह समझा कि समस्या छात्रों में नहीं, बल्कि उस सिस्टम में है जो उन्हें तैयार करता है.
बचपन से मिला एक साफ नजरिया
अंकुर का मानना है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. उनके मुताबिक असली मकसद है करियर बनाना.
YourStory हिंदी से बात करते हुए वह कहते हैं, “हमारे देश में पढ़ाई को हमेशा तरक्की का जरिया माना गया है. लेकिन कई होनहार छात्र अपनी पढ़ाई को सही करियर में बदल नहीं पाते. मुझे लगा कि समस्या उनकी काबिलियत नहीं, बल्कि सिस्टम की है. इसी सोच ने साल 2019 में Sunstone की नींव रखी.”
यह सोच उनके शुरुआती जीवन और करियर से आई. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई National Institute of Technology Surat से की. इसके बाद उन्होंने Institute of Management Technology Ghaziabad से PGDM किया.
करीब दो दशक के करियर में उन्होंने सेल्स और मार्केटिंग में काम किया. इसी दौरान उन्हें छात्रों की बढ़ती उम्मीदें और शिक्षा की सीमाएं साफ दिखीं.
समस्या बड़ी थी, समाधान अलग चाहिए था
भारत हर साल लाखों ग्रेजुएट्स तैयार करता है. लेकिन कंपनियां अब भी योग्य लोगों की तलाश में रहती हैं. यह गैप बहुत बड़ा है.
अंकुर कहते हैं, “हमने देखा कि छात्र समय और पैसा दोनों निवेश करते हैं. फिर भी वे जॉब रेडी नहीं होते. दूसरी तरफ कंपनियां सही टैलेंट ढूंढती रहती हैं. यह एक बड़ा disconnect है.”
IIT और IIM जैसे संस्थान बेहतरीन हैं. लेकिन सीटें बहुत कम हैं. हर किसी को वहां मौका नहीं मिलता.
यहीं से Sunstone का आइडिया आया. एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो मौजूदा कॉलेजों के साथ मिलकर शिक्षा को बेहतर बनाए.
कैसे काम करता है Sunstone का मॉडल
गुरुग्राम हेडक्वार्टर वाले स्टार्टअप Sunstone के खुद के कॉलेज नहीं है. यह देश के अलग-अलग कॉलेजों के साथ पार्टनरशिप करता है. और वहां अपने प्रोग्राम्स चलाता है.
इसके दो प्रमुख हिस्से हैं — School of Management और School of Technology. यहां MBA, BBA, BTech, BCA और MCA जैसे कोर्स कराए जाते हैं.
अंकुर बताते हैं, “हमारा फोकस तीन चीजों पर है. बेहतर पढ़ाई, अच्छा कॉलेज अनुभव और मजबूत करियर सपोर्ट. हम चाहते हैं कि छात्र सिर्फ डिग्री लेकर न निकलें, बल्कि नौकरी के लिए तैयार हों.”
Sunstone ने अब तक (सीरीज़-C राउंड तक) 68.1 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग हासिल की है. WestBridge Capital, Saama Capital और Alteria Capital जैसे निवेशकों का भरोसा इसे मिला है. कंपनी की वैल्यूएशन 1,490 करोड़ रुपये से अधिक है.
AI और ‘Udaan’ से नई उड़ान
टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. ऐसे में Sunstone ने स्कूल स्तर पर ही छात्रों को तैयार करना शुरू किया.
‘Udaan’ नाम का एक AI प्रोग्राम लॉन्च किया गया. इसका मकसद है बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही नई टेक्नोलॉजी से जोड़ना.
अंकुर कहते हैं, “आज के समय में AI और डेटा बहुत अहम हैं. अगर बच्चों को यह समझ जल्दी मिल जाए, तो वे भविष्य के लिए बेहतर तैयार होंगे. Udaan इसी दिशा में एक कदम है.”
इस प्रोग्राम में 10 हजार से ज्यादा छात्र जुड़ चुके हैं. वे AI और नई टेक्नोलॉजी के बारे में सीख रहे हैं.
चुनौतियां भी कम नहीं थीं
अंकुर मानते हैं कि भारत का एजुकेशन सिस्टम काफी जटिल है. इसमें सरकार, कॉलेज, छात्र, अभिभावक और कंपनियां सभी शामिल हैं.
सबसे बड़ी चुनौती भरोसे की थी.
अंकुर बताते हैं, “छात्र और माता-पिता अब बहुत सतर्क हो गए हैं. खासकर प्लेसमेंट के मामले में. इसलिए हमने प्लेसमेंट ऑडिट शुरू किया. ताकि हर दावा सही साबित हो सके.”
छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में विस्तार करना भी आसान नहीं था. लेकिन यही असली मौका भी है.
भविष्य की योजनाएं
Sunstone का लक्ष्य साफ है. ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक पहुंचना. खासकर छोटे शहरों में.
अंकुर कहते हैं, “हम आने वाले समय में और ज्यादा कॉलेजों के साथ जुड़ना चाहते हैं. AI आधारित लर्निंग को मजबूत करना चाहते हैं. और सबसे जरूरी, छात्रों को बेहतर करियर देना चाहते हैं.”
वह आगे बताते हैं, “हम सिर्फ एक कंपनी नहीं बना रहे. हम एक ऐसा सिस्टम बना रहे हैं जो भारत के छात्रों को नई दिशा दे सके. हमारा सपना है कि हर छात्र को क्वालिटी एजुकेशन मिले और वह अपने करियर में आगे बढ़े.”
Sunstone की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की कहानी नहीं है. यह उस बदलाव की कहानी है जिसकी भारत को जरूरत है. जहां डिग्री से ज्यादा करियर मायने रखता है.
आज जब शिक्षा का मतलब बदल रहा है, ऐसे में Sunstone जैसे प्लेटफॉर्म उम्मीद की नई किरण बन रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव कितनी दूर तक जाता है.





