दुनिया भर में लोगों के जीवन को छूने वाली हस्तलिखित पत्र पहल के पीछे है ये महिला

By yourstory हिन्दी
November 14, 2019, Updated on : Thu Nov 14 2019 13:19:38 GMT+0000
दुनिया भर में लोगों के जीवन को छूने वाली हस्तलिखित पत्र पहल के पीछे है ये महिला
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आखिरी बार कब आपने किसी को पत्र भेजा था? नहीं, हमारा मतलब ईमेल से नहीं है; हम हस्तलिखित पत्रों के बारे में बात कर रहे हैं। कभी हम पैग़ामों का धैर्यपूर्वक इंतजार करते थे, हर सुबह डाकिया की तलाश में रहते थे, उम्मीद करते थे कि आज वह दिन होगा जब वह आपके लिए कुछ लेकर आएगा।


अब हम में से अधिकांश के लिए, एक व्हाट्सएप मैसेज क्विक रिस्पोंस की तरह काम करता है, लेकिन फिर भी हम सभी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि एक हस्तलिखित पत्र पुरानी-दुनिया के आकर्षण का प्रतीक है जो कभी भी पुराना नहीं होगा।


भारत में इन हस्तलिखित पत्रों की सबसे बड़ी तरफ़दार हैं पारोमिता बरदोलोई। पारोमिता ने दुनिया भर के लोगों को हस्तलिखित पत्र भेजने के लिए, 'लेटर फ्रॉम ए स्ट्रेंजर, इंडिया' नामक पहल शुरू की। पारोमिता ने कभी ये कम्युनिटी फेसबुक पर बनाई थी। आज की तारीख में उन्होंने दुनिया भर में 100 से अधिक पत्र भेजे हैं।


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पारोमिता बरदोलोई

इस समुदाय में, हर दो महीने में एक बार लेखकों और अनुरोधकर्ताओं के लिए एक फॉर्म रखा जाता है। जानकारी एकत्र की जाती है और पत्र वितरित किए जाते हैं। फिर शुरू होता है पत्रों का जवाब देने का सफर।


यह पूरी पहल स्वयंसेवकों द्वारा संचालित है और मुफ्त है। पत्र लिखने के लिए हर महीने औसतन 30 स्वयंसेवक साइन अप करते हैं।


लॉजिकल इंडियन से बात करते हुए, पारोमिता ने कहा,

“हम केवल अपनी तरफ से एक पत्र पेश करते हैं; बाकी हमेशा आपसी सहमति और व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। और प्रत्येक लेखक और प्राप्तकर्ता की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।”



इस पहल का हिस्सा बनने के लिए आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा। सबसे पहले, लेखक को सहानुभूति दिखानी होगी वो भी बिना जजमेंट। यहाँ, लेखक अपने स्वयं के जीवन से सीखों को साझा करेगा।


दूसरा, पहले पत्र के बाद, यह लेखक या प्राप्तकर्ता पर निर्भर करता है कि वह संचार माध्यम को खुला रखना चाहता है या बंद करना।" असम में पली बढ़ी, पारोमिता तब से पत्र लिख रही हैं जब वह 12 साल की थीं।


पारोमिता ने नॉर्थईस्ट टूडे को बताया,

"आप जानते हैं कि आप कहीं गए थे, अपनी उम्र के बच्चों से मिले, पते का आदान-प्रदान किया और पत्र लिखे। यह सब पता नहीं कब मेरी चेतना का हिस्सा बन गया मुझे पता ही नहीं चला। एक पत्र में, आप सबसे ज्यादा खुले हुए होते हैं। इसके अलावा, उस प्रक्रिया में, मुझे अपने बारे में बहुत कुछ पता चला। पत्र आपके अंदर की बहुत सारी बुराइयों को मुक्त कर सकते हैं और यह एक चिकित्सीय अनुभव हो सकता है।"

उनके अनुसार, इस पहल को उन लोगों को कई ईमेल मिलते हैं, जिनके जीवन को उन पत्रों ने छुआ है।


दुनिया में कहीं से भी कोई भी व्यक्ति अपने अनुरोध के आधार पर पत्र प्राप्त कर सकता है, इसके लिए उन्हें इस पहल के फेसबुक पर जाकर अनुरोध करना होगा। अभी के लिए, पारोमिता का लक्ष्य चैनल को सुरक्षित और समावेशी रखना है। योजना ऐसी पुस्तक को प्रकाशित करना है जिसमें सहमति के साथ चुने गए पत्रों का संकलन हो।


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