यूरिक एसिड का उच्च स्तर: समय से पहचान होना क्यों ज़रूरी है

लोगों को अगर संदेह है कि उन्हें हाइपरयूरिसीमिया का ज्यादा खतरा हो सकता है या इससे सम्बंधित कोई लक्षण है, तो उन्हें अपने डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए. इससे उन्हें अपना यूरिक एसिड स्तर कम करने के लिए कारगर कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी.

यूरिक एसिड का उच्च स्तर: समय से पहचान होना क्यों ज़रूरी है

Saturday December 09, 2023,

5 min Read

यूरिक एसिड शरीर का सामान्य अपशिष्ट उत्पाद है. व्यक्ति के खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ सकता है. यह आम स्थिति, जिसे हाइपरयूरिसीमिया भी कहते हैं, तुरंत लक्ष्ण के साथ उपस्थित नहीं भी हो सकता है, लेकिन लोगों की तंदुरुस्ती पर इसका लंबे समय तक प्रभाव काफी ज्यादा हो सकता है. चूँकि अक्सर इसका निदान नहीं हो पाता, इसलिए हमें जोखिम के घटकों को पहचानने और जल्दी जाँच कराने पर ज्यादा जोर देने की ज़रुरत है.

भारत में एबॅट के एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. कार्तिक पीताम्बरन ने कहा कि, “हालाँकि यूरिक एसिड के उच्च स्तर से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन अधिकाँश रोगियों में इसके लक्षण प्रकट नहीं होते. इस कारण से लोगों के लिए जोखिम के घटक की पहचान करना और जल्द से जल्द खुद की जाँच करवाना ज़रूरी हो जाता है, ताकि वे समय पर इसका पता लगा सकें, प्रभावशाली रूप से इसे संभाल सकें और इससे सम्बंधित जटिलताओं का ख़तरा कम कर सकें. हमारी कोशिश डॉक्टरों और रोगियों, दोनों को मदद पहुंचाने वाले समाधानों के द्वारा जाँच और देखभाल की प्रक्रिया को सरल बनाने की है. इससे लोगों को अपना यूरिक एसिड का स्‍तर नियंत्रण में रखने के लिए सही जानकारी के साथ उनका सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सकता है.”

डॉ. संजीव गुलाटी, नेफ्रोलॉजिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा कि, “एक अध्ययन के अनुसार, डायबिटीज, हाइपरटेंशन या दोनों के रोगियों में से 30% से अधिक हो हाइपरयूरिसीमिया होता है. यूरिक एसिड का उच्च स्तर स्थायी किडनी रोग और किडनी में तीव्र चोट के बढ़ने का भी कारण बन सकता है. हालांकि, अलाक्षणिक मामले निदान के बगैर गंभीर हो सकते हैं. बढ़े यूरिक एसिड की जल्दी जाँच और उचित प्रबंधन स्वास्थ्य के अच्छे प्रबंधन और सम्बंधित स्थितियों को रोकने या सँभालने के लिए बेहद ज़रूरी हैं.”

आमतौर पर, किडनियाँ शरीर में उत्पन्न होने वाले यूरिक एसिड का 60% से 65% हटाती हैं, जो पेशाब के दौरान रक्तप्रवाह से छन कर बाहर निकल जाता है. बाकी बाचा यूरिक एसिड आँतों और पित्त (बाइल) के रास्ते निकलता है. जब बहुत ज्यादा यूरिक एसिड बनने लगता है या उचित ढंग से उत्सर्जित नहीं होता है, तब समस्या हो सकती है. इसके परिणामस्वरूप क्रिस्टल जमा होने लगते हैं, जिससे शरीर के जोड़ों में या किडनियों में एकत्र होकर गठिया (अर्थराइटिस का एक कष्टदायक रूप), किडनी में पथरी (किडनी स्टोन) या स्वास्थ्य की दूसरी जटिलताएं हो सकती हैं.

यह समस्या कितनी आम है? अध्ययन बताते हैं कि हाइपरयूरिसीमिया भारत में एक लगातार बढ़ती चुनौती है. भारत के विभिन्न राज्यों में इसकी व्यापकता अलग-अलग है, जो कुछ क्षेत्रों में 47.2% तक है. उच्च यूरिक एसिड पुरुषों और बुजुर्गों सहित कुछ ख़ास आबादी में विशेष रूप से आम है.

खून में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर किडनी, जठरांत्र और हॉर्मोन से सम्बंधित रोगों के कारण हो सकता है, जो शरीर से यूरिक एसिड का सामान्य निष्कासन बाधित कर देते हैं. अत्यधिक फैटी मीट्स, सीफूड, अल्कोहल, सूखे बीन्स और मटर का, तथा सेब, तरबूज आदि जैसे फ्रक्टोज से भरपूर फल, जिनमें प्राकृतिक रूप से ज्यादा शुगर होते हैं, का सेवन करने पर भी यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है. 

हाइपरयूरिसीमिया की पहचान

कुछ लोगों में यूरिक एसिड का स्तर ज्यादा होने पर जोड़ों में तेज दर्द, कोमलता, लालिमा, या सूजन हो सकती है. जब यूरिक एसिड का उच्च स्‍तर किडनी में पथरी का रूप ले लेता है, तब पीठ के एक या दोनों ओर निचले हिस्से में या पेट में दर्द, मितली, पेशाब करते समय कठिनाई या दर्द जैसे लक्षण भी हो सकते हैं. लेकिन हाइपरयूरिसीमिया से पीड़ित करीब 60% लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता. नतीजतन, अनेक लोग निदान के बिना रह जाते हैं. फिर भी, लक्षण रहित हाइपरयूरिसीमिया एक जोखिम है जिससे हृदयधमनी के रोग, मोटापा, डायबिटीज आदि हो सकते हैं.

इस अवस्था का आपका ख़तरा तब बढ़ सकता है: अगर आप पुरुष है, बुजुर्ग हैं, मोटापा या उच्च बॉडी मास इंडेक्स के शिकार हैं या अत्यधिक रेड मीट, सीफूड, अल्कोहल या फ्रक्टोज का सेवन करते हैं. हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), डायबिटीज, किडनी रोग, हाइपरलिपिडेमीया, और हाइपोथाइरॉइडिज्म जैसी अवस्था वाले लोगों को भी भारी ख़तरा रहता है. 

असल में कुछ प्रतिष्ठित चिकित्सीय संगठनों ने हृदयधमनी रोगों, डायबिटीज, चयापचयी लक्षण, और किडनी स्टोन वाले रोगियों के लिए हाइपरयूरिसीमिया की जाँच की अनुशंसा की है. इसके लिए जोखिम आंकलन पैमाना जैसे आसान साधन उपलब्ध हैं जो किसी व्यक्ति के बढ़े हुए यूरिक एसिड लेवल के संभावित खतरे की गणना कर सकता है.

सामयिक निदान के द्वारा सम्बंधित जटिलताओं से बचाव

अध्ययनों से पता चला है कि यूरिक एसिड के उच्च स्तर के कारण हृदयधमनी रोगों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है. हाइपरटेंशन, तीव्र इश्‍चेमिक स्ट्रोक, या कोरोनरी आर्टरी रोग वाले लोगों में हाइपरयूरिसीमिया की व्यापकता अधिक है. अनुसंधान से यह भी संकेत मिलता है कि यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर इन्सुलिन प्रतिरोध को बढ़ावा दे सकता है जिसके कारण टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है.

इसके अलावा, जीवन शैली में कुछ बदलाव करके भी हाइपरयूरिसीमिया या इससे सम्बंधित जटिलताओं को रोका जा सकता है. इन बदलावों में रोजाना व्यायाम, शारीरिक वजन पर नियंत्रण, रेड मीट, मछली और शराब के सेवन में कमी, कम चर्बी वाले दुग्ध उत्पादों का सेवन, पर्याप्त विटामिन सी वाले खाद्य लेना, और ज्यादा वानस्पतिक प्रोटीन, नट्स, और फलियों का सेवन करना, उच्च फ्रक्टोज वाले कॉर्न सिरप (शुगर का एक प्रकार) से बचना, और शुगर मिश्रित पेय पदार्थों के सेवन में कमी करना शामिल हैं.

लोगों को अगर संदेह है कि उन्हें हाइपरयूरिसीमिया का ज्यादा खतरा हो सकता है या इससे सम्बंधित कोई लक्षण है, तो उन्हें अपने डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए. इससे उन्हें अपना यूरिक एसिड स्तर कम करने के लिए कारगर कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी.

Montage of TechSparks Mumbai Sponsors