108 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप में क्यों आई कलह की नौबत? 38 देशों में फैले कारोबार का कैसे होगा बंटवारा?

By Vishal Jaiswal
November 17, 2022, Updated on : Thu Nov 17 2022 03:01:31 GMT+0000
108 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप में क्यों आई कलह की नौबत? 38 देशों में फैले कारोबार का कैसे होगा बंटवारा?
अपनी पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर कई सालों की कानूनी लड़ाई के बाद अब हिंदुजा बंधु आपस में एक गोपनीय समझौते पहुंच गए हैं. इस समझौते के इस महीने के अंत तक पूरी हो जाने की उम्मीद है.
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‘सब कुछ प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित है और कुछ भी किसी से भी संबंधित नहीं है’ की फिल़ॉसफी के साथ कारोबार चलाने वाले भारतीय मूल के अरबपति ब्रिटिश कारोबारी घराने हिंदुजा भाइयों ने हमेशा ही दुनिया के सामने खुद को एकजुट दिखाया. हालांकि, अपनी पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर कई सालों की कानूनी लड़ाई के बाद अब हिंदुजा बंधु आपस में एक गोपनीय समझौते पहुंच गए हैं. इस समझौते के इस महीने के अंत तक पूरी हो जाने की उम्मीद है.


हिंदुजा परिवार ब्रिटेन का सबसे अमीर कारोबारी घराना है. 108 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप Hinduja Group की कुल पारिवारिक संपत्ति 14 अरब डॉलर की है. हिंदुजा बंधुओं ने एक शताब्दी से भी अधिक पुराने कारोबार को लंदन, मुंबई और जिनेवा में स्थित अपने साझा घरों से अपना कारोबार चलाया.


परिवार के मुखिया और सबसे बड़े भाई 86 वर्षीय श्रीचंद हिंदुजा (एसपी) के डिमेंशिया का शिकार हो जाने के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया. यह विवाद एसपी और उनके तीनों भाइयों गोपीचंद हिंदुजा (जीपी), प्रकाश हिंदुजा (पीपी) और अशोक हिंदुजा (एपी) के साथ ही भतीजों और भतीजियों, चाचाओं, चेचरे भाइयों और पोते-पोतियों तक पहुंच गया है.


दुनिया के अन्य हिस्सों में मुकदमों के अलावा, इंग्लैंड में दो महत्वपूर्ण केस चल रहे थे. एक मामला 2019 में कमर्शियल कोर्ट में पारिवारिक संपत्तियों और व्यवसायों से संबंधित है और श्रीचंद हिंदुजा के हितों की कोर्ट द्वारा संरक्षण से जुड़ा है.

आजादी से पहले हुई थी कारोबार की शुरुआत

हिंदुजा कारोबार के फाउंडर परमानंद हिंदुजा (1900-71) थे. उन्होंने भारत पर अंग्रेजी शासन के दौरान अपने कारोबार की शुरुआत की थी. वह औपनिवेशिक युग के बॉम्बे में रहते थे और ईरान के साथ कपड़ों, ड्राई फ्रूट और चाय का कारोबार करते थे.


1971 में परमानंद की मौत के बाद उनके चारों बेटों ने कारोबार की बागडोर संभाल ली. उस समय तक उनका कारोबार ईरान में ही था लेकिन 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद उन्होंने अपना कारोबार में ब्रिटेन में शिफ्ट कर लिया.

38 देशों में फैला है कारोबार

कारोबार को एक साथ मिलजुल चलाते हुए धीरे-धीरे चारों भाई अलग-अलग देशों में बस गए. श्रीचंद और गोपीचंद लंदन में रहे, प्रकाश ने जिनेवा में अपना घर बनाया और अशोक मुंबई आ गए.


हिंदुजा ग्रुप का कारोबार 38 देशों में फैला है जिसमें 1.5 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. हिंदुजा ग्रुप का कारोबार ऑटोमोटिव से लेकर बैंकिंग, केमिकल्स, पावर, मीडिया और हेल्थकेयर तक फैला है. ग्रुप की कंपनियों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बस निर्माना कंपनी अशोक लेलेंड (Ashok Leyland) और भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक इंडसइंड बैंक शामिल हैं.

परिवार में कौन-कौन है?

  • ब्रिटेन में रहने वाले 86 वर्षीय श्रीचंद हिंदुजा सबसे बड़े भाई और परिवार के मुखिया हैं. वह हिंदुजा ग्रुप, हिंदुजा बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड औऱ हिंदुजा फाउंडेशन के चेयरमैन हैं. उनकी दो बेटियां वीनू और शानू हैं.


  • ब्रिटेन में ही रहने वाले 79 वर्षीय गोपीचंद हिंदुजा दूसरे नंबर के भाई हैं. वह हिंदुजा ग्रुप के को-चेयरमैन हैं और हिंदुआ ऑटोमोटिव, ब्रिटेन के चेयरमैन हैं. उनके दो बेटे धीरज और संजय हैं.


  • मोनाको में रहने वाले 75 वर्षीय प्रकाश हिंदुजा तीसरे भाई हैं. वह हिंदुजा ग्रुप, यूरोप के चेयरमैन हैं. उन्हें एक बेटी रेणुका और एक बेटा अजय है.


  • भारत में रहने वाले 69 वर्षीय अशोक हिंदुजा, हिंदुजा ग्रुप ऑफ कंपनीज, इंडिया के चेयरमैन हैं. उन्हें दो बेटियां अंबिका और सत्या और एक बेटा शोम है.

विवाद की जड़ क्या है?

इस विवाद के मूल में हिंदुजा बंधुओं द्वारा 2 जुलाई, 2014 को किया गया एक समझौता है. इस समझौते में कहा गया था कि परिवार का ‘‘सब कुछ प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित है और कुछ भी किसी से भी संबंधित नहीं है.’’ समझौते के अनुसार कहा गया कि एक भाई के पास जो संपत्ति है वह सभी की है और प्रत्येक भाई दूसरों को उनके केयरटेकर के रूप में नियुक्त करेगा. इस समझौते ने 108 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप में उत्तराधिकार की योजना की नींव रखी.


2013 में, एसपी ने Banca Commerciale Lugano का अधिग्रहण किया था और इसे एक मौजूदा हिंदुजा इकाई - हिंदुजा बैंक (स्विट्जरलैंड) के साथ विलय कर दिया था. इकाई को बाद में SP हिंदुजा बांके प्रिवी SA के रूप में रिब्रांड किया गया. SP तब बैंक के फाउंडिंग प्रेसिडेंट बने. श्रीचंद की बेटी शानू इस बैंक की चेयरमैन हैं और उनके बेटे करम इसके सीईओ हैं. हालांकि, जब परिवार के बाकी सदस्य इसमें अपना नियंत्रण मांगने लगे तब यह विवाद बढ़ गया.


परिवार में आतंरिक खींचतान के बाद नवंबर, 2019 में 86 वर्षीय श्रीचंद हिंदुजा की ओर से उनकी बेटियों शानू और वीनू ने 2014 के समझौते को चुनौती दी. श्रीचंद और उनकी बेटी वीनू यह कहते हुए अदालत गए कि पत्र का कोई कानूनी प्रभाव नहीं होना चाहिए और इसे वसीयत या पावर ऑफ अटॉर्नी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. श्रीचंद चाहते थे कि पत्र रद्दी घोषित हो जाए.


हालांकि, एसपी के तीनों छोटे भाइयों ने आवेदन का विरोध किया और तर्क दिया कि उनकी बेटियों शानू और वीनू ने उन्हें अपने बड़े भाई से मिलने से रोक दिया. उन्होंने वीनू की अपने पिता के लिटिजेशन फ्रेंड के रूप में नियुक्ति का विरोध करते हुए कहा कि इन कार्यवाहियों को आगे बढ़ाने में उनका अपना अलग वित्तीय हित शामिल है.


जून 2020 में कोर्ट के फैसले ने वीनू को श्रीचंद के लिटिजेशन फ्रेंड के रूप में पुष्टि की और इसके साथ ही पहली बार दुनिया के सामने हिंदुजा परिवार में दरार की बात सामने आई.

आरोप-प्रत्यारोप

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीचंद के परिवार से मिलने वाले पैसे में इस कदर कमी आ गई कि एसपी के वकीलों ने कहा कि वे उन्हें प्राइवेट अस्पताल से एक सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करने पर विचार कर रहे हैं.


हालांकि, इस बयान के बाद गोपीचंद के वकीलों ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि उनके लिए 5.9 लाख डॉलर उपलब्ध कराए गए हैं. मामले की सुनवाई करने वाले जज को यहां तक कहना पड़ गया कि श्रीचंद यानी एसपी इस कदर असहाय हो गए हैं कि परिवार के व्यवहार की सार्वजनिक समीक्षा ही उनके हित में है.


वीनू ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को साल 2014 से ही धीरे-धीरे फंडिंग देना बंद कर दिया गया और 2018 में यह पूरी तरह से बंद हो गया. उन्होंने कहा कि उनके परिवार को श्रीचंद के पैसे के इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया.


लेकिन, पिछले साल वीनू और उनकी बहन शानू हिंदुजा ने जज के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने काम के लिए एसपी के फंड को इस्तेमाल किया था. गोपीचंद के वकीलों के अनुसार, 2013 और 2021 के बीच, श्रीचंद के पर्सनल फंड से कम से कम 26 मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं, जिसमें कानूनी फीस और उनके पोते के लिए धन भी शामिल है.


एसपी की बेटी वीनू ने आरोप लगाया कि उनके तीनों चाचा उनके परिवार की फंडिंग बंद करने और फैसलों में भागीदारी से उन्हें अलग करना चाहते हैं. यही कारण है कि उनके पास अपने पिता की संपत्ति पर नियंत्रण के सिवा उनके पास कोई और रास्ता नहीं रह जाता है.

हालांकि, बाकी तीनों भाइयों ने इसे अपने बड़े भाई की इच्छा के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह केवल पावर पोजिशन हासिल करने का प्रयास है. गोपीचंद के वकील ने इस झगड़े की तुलना लियो टॉलस्टॉय के मशहूर उपन्यास ‘वार एंड पीस’ से की थी.

कोर्ट केस में ‘मेरा जूता है जापानी’ गाने का हुआ जिक्र

केस की सुनवाई के दौरान बॉलीवुड की भी एंट्री हुई थी. गोपीचंद ने 1950 की मशहूर फिल्म श्री 420 का गाना ‘मेरा जूता है जापानी’ गाया था. यह गाना एक ऐसे शख्स के बारे में था जो कह रहा था कि भले ही उसके कपड़े जूते और टोपी विदेशी हों लेकिन उसका दिल हिंदुस्तानी है.

फिलहाल शांति, लेकिन...

फैसले के बाद, वीनू और शानू ने साफ कर दिया कि परिवार के बीच एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर होना अभी भी बाकी है. दोनों ने एक साझा बयान में कहा कि जबकि हम खुश हैं कि हमारे पिता के स्वास्थ्य और देखभाल के विवाद को सुलझा लिया गया है, व्यापक विवादों के संबंध में एक अंतिम समझौता अभी भी किया जाना है, ताकि जीवन के अंतिम वर्षों में हम अपने माता-पिता की सुरक्षा और सम्मान के लिए उनकी इच्छाओं को पूरा कर सकें.


गोपीचंद हिंदुजा और उनके भाइयों प्रकाश और अशोक के प्रवक्ता ने कहा कि एसपी (श्रीचंद) के स्वास्थ्य और देखभाल के संबंध में हिंदुजा परिवार का मामला पहले ही सभी पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है और आज का फैसला केवल इस बात से संबंधित है कि क्या उन मामलों को निजी रहना चाहिए.

बोफोर्स घोटाले में बनाए गए थे आरोपी

1986 में बोफोर्स तोपों की खरीद के लिए दी गई दलाली को लेकर अस्सी के दशक में जबर्दस्त राजनीतिक भूचाल आया था और इस कांड के चलते 1989 में राजीव गांधी की सरकार भी गिर गई थी. इस मामले में हिंदुजा बंधुओं पर आरोप लगा था कि उन्होंने दलाली के पैसों की हेराफेरी में अपने बैंक को शामिल किया.


सीबीआई ने एबी बोफोर्स के तत्कालीन अध्यक्ष मार्टिन आर्डबो, कथित बिचौलिये विन चड्ढा और हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया था. साल 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधु और एबी बोफोर्स के खिलाफ आरोपों को खारिज कर दिया था. नवंबर, 2018 में सुप्रीम कोर्ट में मामले की दोबारा जांच शुरू करने की मांग खारिज कर दी थी.