बचपन में इंग्लिश की पढ़ाई नहीं मिली, आज इंग्लिश स्पीकिंग पर कंटेंट बनाकर लाखों कमा रहे हैं सरताज

सरताज Sartaazclasses नाम से अपना यूट्यूब चैनल चलाते हैं. सरताज अपने चैनल पर हिंदी बोलने वाले स्टूडेंट्स को इंग्लिश स्पीकिंग सीखाते हैं. इस समय उनके 25.8 लाख सब्सक्राइबर्स हैं.

बचपन में इंग्लिश की पढ़ाई नहीं मिली, आज इंग्लिश स्पीकिंग पर कंटेंट बनाकर लाखों कमा रहे हैं सरताज

Friday December 09, 2022,

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आज की तारीख में शायद ही कोई ऐसी चीज है जो ऑनलाइन नहीं सीखी जा सकती. पढ़ाई से लेकर कुकिंग, सिंगिंग, डासिंग, इंस्ट्रूमेंट बजाना और भी तमाम चीजें. वजह है, ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स पर उपलब्ध क्लासेज.

समय के साथ ऑनलाइन सीखने वालों की डिमांड भी बढ़ी है. कुछ लोग पैसे की तंगी की वजह से ऑनलाइन कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं तो कुछ लोग समय की कमी की वजह से. इस डिमांड को पूरा करने का काम कर रहे कंटेंट क्रिएटर्स. 

ऐसे ही क्रिएटर हैं सरताज जो Sartaz Classes नाम से अपना चैनल चलाते हैं. सरताज अपने चैनल पर हिंदी बोलने वाले स्टूडेंट्स को स्पीकिंग इंग्लिश सीखाते हैं. इस समय उनके 25.8 लाख सब्सक्राइबर्स हैं. आइए जानते हैं सरताज को कहां से आया कंटेंट क्रिएशन का आइडिया.

सरताज दिल्ली के रहने वाले हैं, उनकी पढ़ाई दिल्ली के ही एक सरकारी स्कूल से हुई. सरताज की बचपन से ही इंग्लिश में दिलचस्पी थी, लेकिन तब स्कूल में इंग्लिश की पढ़ाई इतनी आसानी से नहीं हो पाती थी. स्कूल के दिन तो जैसे-तैसे निकल गए, लेकिन कॉलेज जाकर मालूम पड़ा कि इंग्लिश के बिना तो बहुत मुश्किल होने वाली है.

उनके कॉलेज के ज्यादातर बच्चे इंग्लिश बोलने वाले थे. हर काम इंग्लिश में ही बोलकर करते थे. तब सरताज को महसूस हुआ कि इंग्लिश सिर्फ एक भाषा भर नहीं है ये लाइफस्टाइल का एक हिस्सा बन चुकी है. इसलिए उन्होंने पर्सनैलिटी डिवेलपमेंट के लिहाज से इंग्लिश सीखनी शुरू की.

वो बताते हैं कि इंग्लिश सीखने के कई फायदे हुए. इंग्लिश सीखे बिना शायद ही मुझे इतने अच्छे मौके मिलते. अच्छी सैलरी से लेकर अच्छी नौकरी तक सब कुछ.

सरताज शुरू से ही पढ़ाई में काफी औसत छात्र थे. घर-परिवार से प्रेशर था, इसलिए कुछ काम करना जरूरी हो गया था. प्रेशर की वजह से बीपीओ से लेकर कॉल सेंटर तक कई अलग-अलग कंपनियों में नौकरी की.

इस दौरान उन्होंने कोचिंग क्लासेज भी ली और यहीं पर उन्हें समझ आया कि मैं इंग्लिश काफी अच्छे से पढ़ा सकता हूं. सरताज कहते हैं कि टीचिंग एक ऐसी फील्ड है जहां आप न सिर्फ पढ़ा रहे होते हैं बल्कि देश की सेवा भी कर रहे होते हैं. ये काम शुरू करने के कुछ समय बाद मुझे ये समझ आ गया कि मैं इसी चीज के लिए बना हूं.

यूट्यूब का सफर

सरताज बताते हैं कि एक समय आया जब मेरे पास कोई नौकरी नहीं थी. तभी मेरे एक दोस्त ने फोन करके कहा कि यार मैं कोचिंग इंस्टीट्यूट खोलना चाह रहा हूं और क्या तुम उसमें इंग्लिश पढ़ाओगे. मैंने सोचा कोई नौकरी नहीं मिलने तक पढ़ा लेता हूं. ये करीबन 2010 की बात है.

मैंने पढ़ाना शुरू किया. बच्चों को मेरा पढ़ाया पसंद आने लगा. हालांकि, कुछ समय बाद मेरे दोस्त को किसी वजह से कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद करना पड़ गया. लेकिन मैं आज भी उनका शुक्रगुजार हूं कि उनके जरिए मुझे मेरे करियर की दिशा मिल गई.

जिस समय में मैं यूट्यूब पर आया उस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को लिटरेचर पढ़ाता था. उनके लिए ही वीडियो बनाना शुरू किया. जब तक एग्जाम रहते तब तक व्यूज आते उसके बाद फिर व्यूज जीरो हो जाते. कंटेंट का आइडिया लेने के लिए मैं लोगों से पूछने लगा.

मैं सबसे पूछता कि अब कैसा कंटेंट बनाऊं. जैसे-जैसे फीडबैक मिले उस हिसाब से कंटेंट बनाया, करियर काउंसलिंग से लेकर नौकरी के बारे में, लेकिन व्यूज की परेशानी बनी रही.

अंत में फैसला किया कि किसी ऐसी चीज पर कंटेंट बनाना चाहिएए जिसके बारे में लोग 12 महीने सर्च करते हों. उसका कोई सीजन न हो. इस तरह इंग्लिश स्पीकिंग पर वीडियोज बनाने का आइडिया आया.

शुरुआत के दौर में बड़ी मेहनत लगी. मोबाइल से वीडियो बनाए. न अच्छा माइक था. दिन में जब गाड़ियां जाती थीं तो शोर होता था. इसलिए रात में उठकर वीडियो शूट करता था. तीन साढ़े साल तक उसी मोबाइल से वीडियो बनाए. उससे कुछ कमाई हुई तो उससे अच्छे इक्विपमेंट खरीदे. कभी भी न दोस्तों से पैसे मांगे न घर वालों से.

कमाई के बहुत मौके हैं

काम में मेहनत तो है लेकिन कमाई भी अच्छी खासी है. खासकर कोविड के बाद बहुत बड़ी संख्या में लोग आए हैं. क्योंकि उस समय ऑफलाइन क्लासेज बंद हो चुकी थीं, ऑनलाइन के अलावा कोई ऑप्शन नहीं था. उससे पहले ना स्टूडेंट्स को भरोसा था ना पैरेंट्स को लेकिन कोविड के बाद से हालात बिल्कुल बदल गए.

यूट्यूब पर अकेले वीडियो ही कमाई जरिया नहीं होता. कई अवसर होते हैं- अलग-अलग स्पॉन्सर्स, इवेंट्स से भी आपकी कमाई होती है. सरताज कहते हैं कि मुझे कई बार ऑफर आए कि मैं पैसे लेकर पढ़ाऊं या फिर पेड क्लासेज रखूं, लेकिन मैंने मना कर दिया. यूट्यूब पर फ्री वीडियोज के जरिए मैं उन बच्चों तक पहुंच सका जिन तक ऑफलाइन मैं शायद ही कभी पहुंच पाता.

उभरते कॉम्पिटीशन से इनकार भी नहीं कर सकते. हां, लेकिन जितने समय तक मैं बच्चों को फ्री में कंटेंट दे पाउंगा तब तक देता रहूंगा. अगर पेड कंटेंट बनाना भी पड़ा तो कुछ ऐसा प्रोग्राम लाउंगा जो बच्चों के लिए ज्यादा महंगी न हो. या फिर कुछ ऐसी स्ट्रैटजी लाउंगा कि ज्यादा मेहनती, अच्छे नंबर लाने वाले बच्चों को कोई कोर्स फ्री में दे दिया जाए.