बेटी की देखभाल के लिए छोड़नी पड़ी थी ICMR की फैलोशिप, अब पेटेंट एसोसिएट बन संवार रही अपना करियर

By रविकांत पारीक
April 03, 2022, Updated on : Sun Apr 03 2022 03:55:54 GMT+0000
बेटी की देखभाल के लिए छोड़नी पड़ी थी ICMR की फैलोशिप, अब पेटेंट एसोसिएट बन संवार रही अपना करियर
डॉ. अमिता कुमारी को अपनी बेटी की देखभाल को लेकर ICMR में सीनियर रिसर्च फैलोशिप छोड़नी पड़ी थी, लेकिन अब उन्हें भारत की एक अग्रणी आईपीआर फर्म में बतौर पेटेंट एसोसिएट (विज्ञान) अपने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग करने के लिए एक मार्ग मिल गया है।
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ (यूपी) से रसायन शास्त्र में पीएचडी कर चुकी डॉ. अमिता कुमारी को अपनी बेटी की देखभाल को लेकर ICMR में सीनियर रिसर्च फैलोशिप छोड़नी पड़ी थी, लेकिन अब उन्हें भारत की एक अग्रणी आईपीआर फर्म में बतौर पेटेंट एसोसिएट (विज्ञान) अपने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग करने के लिए एक मार्ग मिल गया है।


कुछ साल पहले बेटी के जन्म के बाद उन्हें अपना करियर छोड़ना पड़ा था। चूंकि वह अपनी इकलौती बेटी की जिम्मेदारी और परिवार के प्रति कर्तव्यों के साथ कैरियर का तालमेल बनाने को लेकर संघर्ष कर रही थी, इसलिए WOS-C प्रशिक्षण से उन्हें राहत मिली। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें भारतीय और विभिन्न विदेशी क्षेत्राधिकारों में पेटेंट आवेदनों की काफी विविधता को संभालने का पर्याप्त अनुभव मिला। महीने भर चलने वाले उन्मुखीकरण कार्यक्रम और प्रख्यात वक्ताओं के व्याख्यानों ने उनकी चिंतन शैली को बदल दिया।

 

उन्होंने बताया, "कार्यक्रम में चयन मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। WOS-C प्रशिक्षण के दौरान, मुझे पेटेंट आवेदनों की एक विशाल श्रृंखला को संभालने में पर्याप्त अनुभव प्राप्त हुआ। मुझे परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने की जरूरत थी। करियर और परिवार के बीच तालमेल बनाना काफी चुनौतीपूर्ण था। WOS-C कार्यक्रम के तहत KIRAN-IPR चयन से मुझे मौका मिला। WOS-C प्रशिक्षण से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और एक सफल आईपीआर पेशेवर बनने के अपने सपने को पूरा करने में मुझे मदद मिली।"

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार द्वारा स्थापित और TIFAC द्वारा कार्यान्वित WOS-C फेलोशिप के 11वें बैच के तहत अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, वह पेटेंट सहयोग जैसे अधिकार क्षेत्र और पेटेंट को-ऑपरेशन ट्रिटी (PCT), यूरोपीय पेटेंट ऑफिस (EPO), जापान पेटेंट ऑफिस (JPO), यूनाइटेड स्टेट पेटेंट और ट्रेडमार्क ऑफिस (USPTO) कोरियन इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (KIPO), बौद्धिक संपदा के प्रभारी रूसी सरकारी एजेंसी रोस्पेटेंट, कनेडियन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (CIPO), चाइना नेशनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एडमिनिस्ट्रेशन (CNIPA), सऊदी अथॉरिटी फॉर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (SAIP) और ऑस्ट्रेलियन पेटेंट (AusPat) जैसे फोरम के लिए मसौदा तैयार करने, दाखिल करने और मुकदमा चलाने का कार्य कर रही है। पेटेंट संचालन के उनके क्षेत्रों में मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और नैनो-टेक्नोलॉजी शामिल हैं।

 

डॉ. अमिता इस बात से संतुष्ट हैं कि घर और परिवार की जिम्मेदारियों के बावजूद वह आईपीआर के माध्यम से अपने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग करने में सक्षम हैं। WOS-C प्रशिक्षण से न सिर्फ उन्हें आईपीआर कौशल विकसित करने में मदद मिली बल्कि महामारी के कठिन समय में नई दिल्ली में ’LexOrbis - Intellectual Property Law Firm’ में नौकरी तलाशने में भी सहायता मिली।


डॉ. अमिता ने जोर देकर कहा, "यह एक अत्यंत सुविचारित कार्यक्रम है जो महिलाओं को करियर में एक ब्रेक के बाद मुख्यधारा के विज्ञान में लौटने और पारिवारिक कर्तव्यों तथा जिम्मेदारी को एक साथ संतुलित करने का अवसर प्रदान करता है।"


उन्होंने कहा, "पीएचडी (रसायन विज्ञान) पूरी करने के बाद भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे CSIR, CCRAS (आयुष मंत्रालय), ICMR, और IPC (इंडियन फार्माकोपिया कमीशन) में काम करने के बावजूद, मैं पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण एक वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर जारी नहीं रख पाई। WOS-C कार्यक्रम ने मुझे एक बार फिर विज्ञान की मुख्यधारा में शामिल होने का मौका दिया है।"