IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने बनाई खास तरह की बैटरी, EV इंडस्ट्री में नई क्रांति

यह टेक्नोलॉजी ‘बैटरी स्वैपिंग’ पर आधारित है जिसमें वाहन उपयोग करने वाले ‘जिंक रिचार्ज स्टेशन’ पर उनकी बैटरी के इस्तेमाल हो गए ‘जिंक कैसेट्स’ को बदल कर पूरी तरह चार्ज ‘जिंक कैसेट’ लगा सकते हैं.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के शोधकर्ता यांत्रिक रूप से रिचार्ज होने वाली जिंक-एयर बैटरी विकसित कर रहे हैं जो वर्तमान इलेक्ट्रिक वाहनों में लगी लिथियम-आयन बैटरी का बेहतर विकल्प होगा.

शोधकर्ता नई बैटरी तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन कर चुके हैं और जिंक-एयर बैटरी बनाने के लिए प्रमुख उद्योगों के साथ सहयोग करार कर रहे हैं. नई बैटरी मौजूदा लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में सस्ती है और इसकी शेल्फ लाइफ भी अधिक है. जिंक-एयर बैटरी दोपहिया और तिपहिया वाहनों में उपयोगी होगी.

भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र भारत सरकार की अनुकूल नीतियों के चलते तेजी से बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में प्रदूषण कम करने की बढ़ती मांग के मद्देनजर भी इस सेक्टर में उछाल आया है.

ईवी में लिथियम-आयन बैटरी का व्यापक उपयोग होता है. इसलिए लिथियम-आयन बैटरी के एक प्रमुख निर्माता के रूप में चीन का ईवी बैटरी उद्योग पर काफी दबदबा है. वर्तमान में भारतीय ईवी निर्माता ज्यादातर चीन से लिथियम-आयन बैटरी आयात करते हैं.

हालांकि लिथियम-आयन बैटरी का व्यापक उपयोग होने के बावजूद इसकी कई सीमाएं हैं जैसे उपलब्धता का सीमित होना. इतना ही नहीं, भारतीय बाजार की विविध मांगों को केवल लिथियम-आयन बैटरी पूरी तरह से पूरा नहीं कर सकती है.

IIT मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार चंडीरण और उनका शोध समूह लिथियम-आयन बैटरी का एक सस्ता और प्रभावी विकल्प विकसित करने की दिशा में कार्यरत हैं. IIT मद्रास की यह टीम जिंक-एयर बैटरियों पर केंद्रित है क्योंकि जिंक आसानी से उपलब्ध संसाधन है.

फ्यूचरिस्टिक मॉडल

डॉ अरविंद कुमार चंडीरण, सहायक प्रोफेसर, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, IIT मद्रास ने शोध के अहम पहलुओं के बारे में बताया, “हमारा शोध समूह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जिंक-एयर बैटरी का फ्यूचरिस्टिक मॉडल विकसित कर रहा है. शोध के सिलसिले में हम मौजूदा टेक्नोलॉजी की कमियों को भी समझ रहे हैं और उन्हें दूर करने के तरीके भी खोज रहे हैं. शोध समूह ने वर्तमान में जिंक-एयर सेल विकसित किए हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जिंक-एयर पैक विकसित करने की दिशा में अग्रसर है."

शोधकर्ता पेट्रोल स्टेशनों की तरह अलग ‘जिंक रिचार्ज स्टेशन’ बनाए जाने पर विचार कर रहे हैं. जिंक-एयर बैटरी युक्त ईवी इस्तेमाल करने वाले बैटरी ड्रेन होने पर ‘जिंक रिचार्ज स्टेशन’ आएंगे जैसा कि पारंपरिक वाहन वाले पेट्रोल स्टेशनों पर ईंधन भराने आते हैं.

यह टेक्नोलॉजी ‘बैटरी स्वैपिंग’ पर आधारित है जिसमें वाहन उपयोग करने वाले ‘जिंक रिचार्ज स्टेशन’ पर उनकी बैटरी के इस्तेमाल हो गए ‘जिंक कैसेट्स’ को बदल कर पूरी तरह चार्ज ‘जिंक कैसेट’ लगा सकते हैं.

इस पहलू पर विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. अरविंद कुमार चंडीरण ने कहा, "यह जिंक-एयर बैटरी का बड़ा लाभ है क्योंकि मौजूदा लिथियम-आयन बैटरी में एकमात्र विकल्प इस्तेमाल हो गया पूरा बैटरी पैक बाहर निकालना और फिर उसके बदले एक पूरा लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाना है. इसलिए लिथियम-आयन बैटरी के मामले में पूंजी निवेश दोगुना हो जाता है."

शोधकर्ता सोलर पैनलों से भी ‘जिंक कैसेट’ रिचार्ज करने पर विचार कर रहे हैं.

IIT मद्रास के रिसर्च स्कॉलर श्री अखिल कोंगारा ने प्रोेजक्ट की एक खास अहमियत बताई, “प्रस्तावित योजना के अनुसार ईवी उपयोग करने वाले को ‘जिंक रिचार्ज स्टेशनों’ पर ‘जिंक कैसेट’ स्वाप करने के लिए केवल चंद मिनट देने होंगे.

IIT मद्रास में जिंक-एयर बैटरी और लिथियम-आयन बैटरी के उपयोग में सुरक्षा पर कार्यरत एक अन्य रिसर्च स्कॉलर श्री गुंजन कपाड़िया ने कहा, "स्वदेश में विकसित जिंक-एयर बैटरी, खास तौर से भारतीय परिस्थिति में काफी सुरक्षित है क्योंकि इसमें एक्वस इलेक्ट्रोलाइट है और सबसे बुरी ईवीएस दुर्घटना में भी इसमें आग नहीं पकड़ता है."

जिंक-एयर बैटरी के फायदे

जिंक-एयर बैटरी के कई लाभ हैं जैसे:

  • जिंक भारत में आसानी से उपलब्ध है और इससे लिथियम-आयन बैटरी का आयात कम होगी.
  • जिंक लिथियम-आयन बैटरी से सस्ता है. लिथियम-आयन बैटरी की कीमत 200 डॉलर से 250 डॉलर किलोवाट घंटा है जबकि जिंक-एयर बैटरी की कीमत लगभग 150 किलोवाट घंटा है. उपयोग बढ़ने के साथ यह कीमत 100 डाॅलर किलोवाट घंटा से भी कम होने की उम्मीद है.
  • जिंक-एयर बैटरियां का आधार भी पानी है और इनकी शेल्फ लाइफ भी अधिक है.
  • जिंक-एयर बैटरियों की टर्नअराउंड क्षमता भी बेहतर है.