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अमेरिका में सौ साल के दूल्हा-दुल्हन ने लिखी मोहब्बत की नई इबारत

जय प्रकाश जय
9th Jul 2019
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"जिस तरह कहते हैं न कि दाने-दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम, उसी तरह एक और कहावत मशहूर है - 'लव इज ब्लाइंड', यानी प्यार अंधा होता है। ओहिओ (अमेरिका) में सौ साल के बुजुर्ग दुल्हा जॉन ने अपने से दो साल बड़ी वृद्धा दुल्हन फीलिस से शादी रचाई है। जॉन दूसरे विश्व युद्ध के सेनानी भी हैं।"



old couple

सांकेतिक फोटो (Shutterstock)



क्या सचमुच, 'प्यार अंधा' और उसके जुनून में सब कुछ जायज़ होता है। जिस समय वाराणसी के मोहनसराय स्थित शिव मंदिर में अपने प्यार को परवान चढ़ातीं दो युवतियां एक-दूसरे को जयमाल पहनाकर समलैंगिक शादी रचा रही थीं, उसी वक्त अमेरिका में पिछले एक साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे द्वितीय विश्व युद्ध के सौ वर्षीय सेनानी जॉन अपनी 102 साल की बुजुर्ग प्रेमिका फीलिस से शादी रचा रहे थे। उनके अफसाने में न उम्र की सीमा थी, न जन्म का बंधन।


ये प्रेमी युगल ओहिओ (अमेरिका) में रहता है। ऐसी शादियां इसलिए भी किसी मिसाल की तरह यादगार बन जाती हैं कि वे ट्रेडिशनल टाइप नहीं, लीक से हटकर होती हैं। वह भी एक मोहब्बतनामा रहा है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में खूबसूरत ताजमहल बनवाकर प्यार की मिसाल कायम की थी। इसी साल मार्च में दांपत्य जीवन की एक ऐसी नज़ीर उस वक़्त सामने आई, जब चंडीगढ़ के विजय कुमार ने ब्लड कैंसर से पीड़ित अपनी 84 वर्षीय पत्नी के निधन के बाद राजस्थान से उनकी संगमरमर की मूर्ति बनवाकर मंगाई। अब वह रोजाना अपने घर में उस मूर्ति के सामने बैठकर स्वर्गीय पत्नी के साथ होने के एहसासों में जीते हैं।  


अमेरिकी बुजुर्ग दुल्हा जॉन भूतपूर्व सेनानी हैं। वह द्वितीय विश्व युद्ध लड़ चुके हैं। लगभग दस साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था, तभी से वह अकेले रह गए थे। इसी तरह उनकी नवविवाहिता बुजुर्ग फीलिस के पति की पंद्रह साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद वह एक वृद्धाश्रम में रहने लगीं। वे एक दूसरे से पिछले साल एक कार्यक्रम के दौरान मिले थे। उसके बाद पिछले महीने दोनो एक दूसरे के काफी करीब आ गए। धरती की जन्नत में इतने कम समय में ही आखिरकार उनका प्यार कुछ इस कदर परवान चढ़ा है कि बाकी उम्र भर के लिए दोनो अब दिलोजान से एक हो चुके हैं। हमारे देश में भी यदा-कदा संतान की चाहत में ऐसे बेमेल रिश्ते हो जाया करते हैं। 




इसी तरह अप्रैल में एक वाकया शाहजहांपुर (उ.प्र.) में हुआ था, जहां के 82 साल के दुल्हे ने 40 साल की दुल्हन से निकाह कर लिया था। दुल्हे की पहली बीवी से कोई संतान नहीं थी। उससे पहले इसी साल फरवरी में करौली (राजस्थान) के 83 वर्षीय सुखराम बैरवा ने पुत्र की चाहत में अपने से 53 साल छोटी रेशमी से शादी रचा ली थी। कुडगांव के सैमरदा गांव में यह शादी बैरवा की पहली पत्नी बत्तो की रजामंदी से हुई।


सुखराम की बरात पूरे गाजे-बाजे के साथ तीस साल की दुल्हन के दरवाजे पहुंची थी। सात फेरे लेते समय मौके पर पंच-पटेल और दोनो तरफ के नाते-रिश्तेदार भी मौजूद रहे। सबसे रोचक बात ये रही कि इस शादी में बैरवा की बेटियां, दामाद और नाती भी शामिल हुए।


अभी पिछले महीने जून में तो अकबरपुर नगर (कानपुर देहात) में तो दो बुजुर्गों ने फिर से अपनी शादी रचाई। बुजुर्ग दुल्हा रामलाल ने वृद्धा दुल्हन सिया दुलारी के साथ एक दूसरे को वरमाला डालकर इसलिए दोबारा शादी की रस्म पूरी की कि इसी तरह यहां के जर्जर कुएं का जीर्णोद्धार किया जाना था।




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