यूं ही नहीं है भारत का बोलबाला, दुनिया को दी हैं ये 14 चीजें

By Ritika Singh
August 14, 2022, Updated on : Mon Aug 15 2022 06:10:15 GMT+0000
यूं ही नहीं है भारत का बोलबाला, दुनिया को दी हैं ये 14 चीजें
प्राचीन भारत के सिर पर ऐसे कई सेहरे बंधे हैं, जिनकी वजह से हर नागरिक को अपने भारतीय होने पर गर्व होगा.
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15 अगस्त 2022 को भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ (76th Independence Day) है. इसे देखते हुए देश आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi ka Amrit Mahotsav) मना रहा है. इस अमृत महोत्सव में देश की उपलब्धियों को याद किया जा रहा है और किया भी जाना चाहिए. ऐसा नहीं है कि भारत की उपलब्धियां आजादी के बाद की ही हैं. प्राचीन भारत के सिर पर ऐसे कई सेहरे बंधे हैं, जिनकी वजह से हर नागरिक को अपने भारतीय होने पर गर्व होगा. ऐसी कई चीजें हैं, जो दुनिया को भारत की देन हैं. इस रिपोर्ट में ऐसी ही कुछ चीजों का जिक्र किया गया है, जो भारत से दुनिया तक पहुंची हैं...

शून्य 

'जब जीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई...' जी हां, बिल्कुल. जीरो यानी शून्य का आविष्कार भारत ने ही किया था. भारत का शून्य, अरबी में सिफ्र यानी खाली नाम से प्रचलित हुआ. फिर लैटिन, इटैलियम, फ्रेंच आदि भाषाओं से गुजरते हुए यह अंग्रेजी में जीरो कहलाया. बोडेलियन पुस्तकालय (आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय) ने बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग के जरिए शून्य के प्रयोग की तिथि को निर्धारित किया. पहले ये माना जाता रहा कि आठवीं शताब्दी यानी 800 एडी से शून्य का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग से सामने आया कि शून्य का प्रयोग चार सौ साल पहले यानि की 400 एडी से हो रहा था.


बोडेलियन पुस्तकालय में ये पांडुलिपि 1902 में रखी गई थी. बख्शाली पांडुलिपि को भारतीय गणित शास्त्र की पुरानतम किताब के तौर पर देखा जाता है. हालांकि शून्य का वास्तव में आविष्कारक कौन है, इसे लेकर कई विचार हैं. कुछ विद्वान 200 ईसा पूर्व छंद शास्त्र के प्रणेता पिंगलाचार्य को शून्य का आविष्कारक मानते हैं. इसलिए भारत में शून्य की खोज ईसा से 200 वर्ष से भी पुरानी भी हो सकती है. वहीं कुछ विद्वानों का मानना है कि गणितज्ञ व खगोल विज्ञानी ब्रह्मगुप्त ने 628 में शून्य की खोज की और शून्य के नियम, ऑपरेशंस और परिभाषा दिए. वहीं कुछ विद्वान अंकों की नई पद्धति के जनक आर्यभट्ट को शून्य का जनक मानते हैं. उन्होंने अपने ग्रंथ आर्यभटीय के गणितपाद 2 में 1 से लेकर 1 अरब तक की संख्याओं को लिखा है.

शतरंज और कैरम

शतरंज का जन्म भारत में गुप्त शासनकाल के दौरान हुआ यानी 280-550 सीई में. इसे संस्कृत में चतुरंगा कहा जाता था. इसका एक और नाम अष्टपदा भी था. आधुनिक शतरंज, चतुरंगा की ही आधुनिक फॉर्म है. चेस का मतलब पुरानी पर्शियन और अरबी में चतरंग और शतरंज होता है. कैरम भी भारत की ही देन है. शीशे के सरफेस वाला एक कैरम बोर्ड पटियाला के एक महल में मौजूद है.

कबड्डी और कुश्ती

कबड्डी और कुश्ती भी भारत की ही देन हैं. ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि कबड्डी किसी न किसी रूप में भारत में 1500 से 400 बीसीई के बीच मौजूद था. कुश्ती का जनक भारत है. प्राचीन काल में इसकी एक फॉर्म मल्ल युद्ध था, जिसका जिक्र हम महाभारत और रामायण में सुनते या पढ़ते आ रहे हैं. द्वापर युग में बलराम, भीम, दुर्योधन, जरासंध और यहां तक कि कृष्ण भी मल्ल युद्ध में पारंगत और धुरंधर करार दिए जाते थे. कुश्ती को भारत में दंगल, पहलवानी नामों से भी जाना जाता है. पश्चिमी दुनिया में यह रेसलिंग के नाम से मशहूर है. प्रोफेशनल रेसलिंग 1830 में इंट्रोड्यूस हुई.

सांप-सीढ़ी और लूडो

सांप सीढ़ी की शुरुआत भारत से हुई. इसे मोक्षपट कहा जाता था. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान यह खेल इंग्लैंड पहुंचा और फिर 1943 में यह अमेरिका में इंट्रोड्यूस किया गया. लूडो, भारत में ईजाद हुए पचीसी/चौसर या चौपड़ का ही एक वेरिएंट है. 6ठवीं शताब्दी तक भारत में पचीसी की उत्पत्ति हो चुकी थी. महाभारत काल में पचीसी/चौसर/पाशा का जिक्र मिलता है.

बटन

बटनों की खोज भी भारत में सबसे पहले हुई. कहा जाता है कि 2000 बीसीई तक इंडस वैली सिविलाइजेशन में सीशेल से बने ऑर्नामेंटल बटन इस्तेमाल किए जाते थे.

कुष्ठ रोग का इलाज

कुष्ठ रोग/कोढ़ का इलाज भारत में विकसित हुआ था. लेकिन यह इलाज कब ढूंढा गया, इसके बारे में अलग-अलग विचार प्रचलित हैं. कुछ विद्वानों का मानना है कि कुष्ठ रोग का का सबसे पहले उल्लेख 6ठीं शताब्दी बीसीई के सुश्रुत संहिता में मिलता है. लेकिन कुछ अन्य लोगों का मानना है कि कुष्ठ रोग और इसके कर्मकांडी इलाज का सबसे पहले उल्लेख अथर्ववेद (1500-1200 बीसीई) में किया गया है, जो सुश्रुत संहिता से पहले लिखा गया.

आयुर्वेद और योग

आयुर्वेद और योग भी भारत की ही देन हैं. आयुर्वेद प्राचीन काल की चिकित्सा पद्धति है. कहा जाता है कि इसकी शुरुआत लौह युग में हुई. इसी तरह योग का जन्म भी भारत में हुआ और आज यह पूरी दुनिया में जाना जाता है. माना जाता है कि योग की शुरुआत भारत में वैदिक पूर्व पीरियड में हुई यानी 1500-500 बीसीई के दौरान. योग को पश्चिमी संस्कृति तक पहुंचाने में अहम योगदान स्वामी विवेकानंद का रहा.

ट्रिगनोमैट्री

गणित की ट्रिगनोमैट्री की खोज भी भारत में हुई. ट्रिगनोमैट्री को त्रिकोणमिति भी कहते हैं. इसका जनक वैसे तो आर्यभट्ट को माना जाता है और कहा जाता है कि उन्होंने 5वीं शताब्दी के आखिर में इसे विस्तार में बताया था. लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि ट्रिगनोमैट्री का आविष्कार तीसरी या चौथी शताब्दी का है.

पृथ्वी के ऑर्बिट का सटीक समय

सूर्य का एक चक्कर लगाने में पृथ्वी को कितना वक्त लगता है, इसकी सटीक जानकारी भास्कराचार्य ने सबसे पहले दी थी. सामने आया सटीक वक्त था 365.258756484 दिन.

सर्जरी

सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है. शल्य चिकित्सा यानी सर्जरी. कौन यकीन करेगा कि भारत में 2600 साल पहले भी ब्रेन सर्जरी या प्लास्टिक सर्जरी संभव थी.