ग्रीन एनर्जी से समुद्र को जीतने निकला है यह शख्स, शुरू किया भारत का पहला सोलर फेरी बोट

By Palak Agarwal
April 28, 2022, Updated on : Thu Apr 28 2022 05:45:03 GMT+0000
ग्रीन एनर्जी से समुद्र को जीतने निकला है यह शख्स, शुरू किया भारत का पहला सोलर फेरी बोट
सैंडिथ थंडाशेरी ने ऐसे नावों और जहाजों को डिजाइन करने के लिए 2013 में NavAlt की शुरुआत की थी जो ईंधन बचाने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बचा सके। उन्होंने भारत की पहली सोलर फेरी बोट का निर्माण किया और अब दुनिया की पहली ग्रीन एनर्जी RORO पर काम कर रहे हैं।
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फेरी ट्रांसपोर्टेशन के एक सबसे क्लीन विकल्प की तरह लगती है, लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि अधिकांश फेरी डीजल पर चलती है जो अत्यधिक प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन है। यूरोपीय यूनियन मॉनिटरिंग रिपोर्टिंग एंड वेरिफिकेशन ऑफ CO2 एमिशन रिपोर्ट के अनुसार, जहां फेरी सभी जहाजों (vessels) का सिर्फ 3 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन वे सभी समुद्री प्रदूषण के 10 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं।


इस समस्या को हल करने में मदद करने के लिए, केरल ने 2017 में भारत की पहली सौर ऊर्जा से चलने वाली नौका 'आदित्य' लॉन्च की। स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देते हुए, नाव हर साल 35,000 लीटर डीजल को जलने से रोकती है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है। सैंडिथ का दावा है कि नाव ने अब तक 100,000 लीटर डीजल बचाया है।


कोच्चि स्थित NavAlt Solar और Electric Boats के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैंडिथ थंडाशेरी ने जब आदित्य को बनाया तो उन्हें संतोष और गर्व दोनों ही महसूस हुए। लेकिन उन्होंने इनोवेशन करना बंद नहीं किया; वह उपलब्ध ग्रीन एनर्जी संचालित आरओआरओ (कार्गो जहाजों) और मछुआरों के लिए ऐसी एडवांस तकनीक वाले जहाजों और नौकाओं के निर्माण के रास्ते पर है जो कि सस्ती और उपयोग में आसान हो।


योरस्टोरी के साथ बातचीत में, सैंडिथ ने अपने डेवलपमेंट्स के बारे में बताया साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कैसे वह दुनिया को एक स्वच्छ और बेहतर जगह बनाने के लिए अपना योगदान देने के लिए सीमाओं से जूझ रहे हैं।

Aditya को बनाना

पेशे से एक नौसैनिक आर्किटेक्ट, सैंडिथ आईआईटी मद्रास में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद जहाजों को डिजाइन करने के लिए कई जगहों पर गए। NavAlt की स्थापना से पहले, उन्होंने दक्षिण कोरियाई शिपयार्ड में काम करते हुए कई साल बिताए जो अपने बड़े नौसैनिक शिपबिल्डर्स के लिए जाने जाते हैं।


जहाज निर्माण के साथ उनकी यात्रा उनके जीवन के 20वें पड़ाव के साथ तब शुरू हुई जब उन्होंने 2000 के दशक के अंत में बेहतर जहाज डिजाइन की पेशकश करने के लिए Navgathi की शुरुआत की, जो ईंधन बचाने में मदद करता था।


जहाज डिजाइनिंग पर काम करते हुए उन्हें एक मौका मिला और इसी ने Navgathi में टीम को भारत की पहली सोलर फेरी बोट के निर्माण के अवसर को तोड़ने के लिए प्रेरित किया और इस तरह 2013 में NavAlt शुरू करके सैंडिथ ने अपना लोहा मनवाया।


उन्होंने अपनी बचत के साथ-साथ मित्रों और परिवार के योगदान से लगभग 3-4 करोड़ रुपये का निवेश करके मैन्युफैक्चरिंग लाइन शुरू की। चार साल की लगातार कड़ी मेहनत के बाद, उन्होंने 2017 में 'आदित्य' लॉन्च किया, जिसका उद्घाटन केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, अक्षय ऊर्जा, पीयूष गोयल ने भारत की पहली सौर नौका नाव (सोलर फेरी बोट) के रूप में किया। नाव को केरल राज्य जल परिवहन विभाग के सहयोग से लॉन्च किया गया था।

NavAlt

NavAlt की टीम

इसका उद्देश्य सरल था - एक ऐसी इलेक्ट्रिक फेरी बोट लाना जो समुद्री जीवन को और अधिक नुकसान से बचाने में मदद कर सके, इसके अलावा यात्रियों को सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाए।


वे कहते हैं, “एक डीजल से चलने वाली नाव को 60 यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए लगभग 45-60 kW बिजली की आवश्यकता होती है। सोलर बोट से हम एक तिहाई बिजली की खपत को कम कर सकते हैं और आदित्य 15 किलोवाट बिजली की खपत करता है। इसने बहुत सारे ईंधन और कार्बन फुटप्रिंट को भी बचाया है जो समुद्री जीवन के लिए खतरनाक है।”


एल्युमीनियम, कंपोजिट और हल्के घटकों जैसे हल्के पदार्थों के इस्तेमाल के कारण सोलर बोट कम बिजली की खपत करती हैं। सैंडिथ का कहना है कि केरल सरकार सोलर फेरी का इस्तेमाल करने के बारे में खुलकर सामने आ रही है और इस साल, NavAlt 13 और सोलर फेरी पेश करेगा।

एक आत्मनिर्भर समुद्री इकोसिस्टम

सैंडिथ का कहना है कि वह टेक डेवलपमेंट के लिए फ्रांस स्थित कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन आयात किए जाने वाले लिथियम सेल को छोड़कर, सभी NavAlt प्रोडक्ट भारत में बने होते हैं।


उन्होंने आगे कहा, "राज्य सरकार बहुत सहायक रही है।" और आगे दावा करते हैं कि NavAlt ऐसे सौर इलेक्ट्रिक RORO (रोल ऑन-रोल ऑफ) के निर्माण पर काम कर रही है जो बड़े ट्रकों और वाहनों को ले जा सकता है।


वे कहते हैं, “यह अब तक का दुनिया का पहला सोलर इलेक्ट्रिक RORO होगा। यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार गुजरात, वाराणसी, गोवा और केरल में कई आरओआरओ बनाने पर जोर दे रही है।"


संदीप सोलर फिशिंग बोट लाने पर भी काम कर रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य मछुआरों के जीवन में सुधार लाना है, ताकि सोलर इलेक्ट्रिक फिशिंग बोट को अपनाकर ईंधन की बढ़ती लागत को कम किया जा सके।


वह बताते हैं, “एक डीजल नाव की कीमत मछुआरों के लिए लगभग 3 लाख रुपये होती है जो आमतौर पर नाव खरीदने के लिए तीन से चार परिवारों से पैसे लेते हैं। लेकिन अभी ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए डीजल की कीमत उन्हें सालाना 3 से 3.5 लाख रुपये के बीच पड़ती है। सोलर बोट की कीमत उन्हें एक बार लगभग 18-20 लाख के आसपास होगी, जो कि बिना किसी सरकारी सब्सिडी के वह कीमत है जिसे वे चार से पांच साल की अवधि में वसूल कर सकते हैं। हालांकि, अगर इस क्षेत्र को सब्सिडी दी जाती है और हम इसे बढ़ाने में सफल होते हैं, तो हमारा लक्ष्य इन नावों की कीमत को लगभग 10-12 लाख रुपये तक लाना है।”


उन्होंने आगे कहा कि भारत के समुद्री इकोसिस्टम के लिए आवश्यक स्वच्छ ऊर्जा समाधान को देखते हुए मछुआरों के लिए सोलर बोट सॉल्यूशन लॉन्च करना इस समय आदर्श है।

बाधाओं को पार करते हुए

भले ही NavAlt ने भारत में 'पहली' सोलर इलेक्ट्रिक बोट होने के लिए प्रशंसा हासिल की हो, लेकिन सैंडिथ का कहना है कि नीतिगत पक्ष से बहुत सारी चुनौतियाँ हैं।


सैंडिथ कहते हैं, “केंद्र सरकार स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है; हालांकि, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान न देने के कारण जलीय जीवन में बाधा आ रही है। ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) का प्रचार अच्छा है लेकिन समुद्री मार्ग में सौर परियोजनाओं के लिए कुछ नीति कार्यान्वयन और सब्सिडी होनी चाहिए जो जल निकायों को प्रदूषित करने वाले खतरनाक कचरे को नियंत्रित कर सकें।”


उन्होंने आगे कहा, “डीजल की नावों के साथ, बिना जला हुआ ईंधन वापस पानी में चला जाता है। हम अपने पारिस्थितिकी तंत्र के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? सरकार को सभी जल निकायों में इलेक्ट्रिक बोट की अनुमति देनी चाहिए।”

कोच्चि में NavAlt शिपयार्ड

कोच्चि में NavAlt शिपयार्ड

एक और चुनौती कैश की रही है।


वे कहते हैं, “आप देखते हैं, नाव बनाने में छह से आठ महीने लगते हैं, और 80 प्रतिशत भुगतान प्रोडक्ट की डिलीवरी के बाद ही मिलता है। सर्वाइव करने के लिए, एक कंपनी या तो लोन लेती है या बाहर से धन जुटाती है। लेकिन कर्ज तो कर्ज है और उद्यमी इसके दुष्चक्र में पड़ जाता है।”

मंजिल

NavAlt भारत की सबसे तेज सौर इलेक्ट्रिक कटमरैन नाव बनाने पर जोर दे रहा है, जो 12 समुद्री मील की गति से यात्रा कर सकती है, यात्रा के समय को 90 मिनट से घटाकर सिर्फ 30 मिनट कर सकती है। सैंडिथ का कहना है कि भविष्य में बहुत कुछ है क्योंकि वे अपने सौर कटमरैन के साथ रक्षा क्षेत्र में प्रवेश करने की योजना बना रहे हैं जो उच्च श्रेणी के प्रदर्शन, चपलता और टेक्नोलॉजी को प्रदर्शित करता है।


कंपनी की शेल फाउंडेशन के सहयोग से सोलर फिशिंग बोट पेश करने की योजना है, और सैंडिथ ने खुलासा किया कि NavAlt कुछ रणनीतिक सहायक लोगों और साझेदारियों की तलाश में है जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने में योगदान दे सकें।


Edited by Ranjana Tripathi