भारतीय सेना 15 जनवरी को क्यों मनाती है थल सेना दिवस? जानिए इसका इतिहास और महत्व

By रविकांत पारीक
January 15, 2022, Updated on : Sat Jan 15 2022 06:56:51 GMT+0000
भारतीय सेना 15 जनवरी को क्यों मनाती है थल सेना दिवस? जानिए इसका इतिहास और महत्व
भारतीय सेना दिवस हमारे देश के सशस्त्र बलों में प्रत्येक सैनिक को उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
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इस साल 15 जनवरी को भारत अपना 74वां सेना दिवस मना रहा है। यह दिन प्रत्येक भारतीय के लिए बहुत गर्व का विषय है, क्योंकि हम अपने देश के साहसी सैनिकों को सम्मान देते हैं और उनके बलिदान के लिए उन्हें हर दिन सलाम करते हैं। भारतीय सेना दिवस हमारे देश के सशस्त्र बलों में प्रत्येक सैनिक को उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। COVID-19 महामारी की तीसरी लहर के कारण, सभी सेना कमान मुख्यालयों में कड़े प्रोटोकॉल के बीच भारतीय सेना दिवस मनाया जा रहा है।


इस दिन हर साल दिल्ली कैंट के करियप्पा परेड ग्राउंड में एक भव्य परेड होती है। कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने सलामी ली। इस दिन यूनिट क्रेडेंशियल और सेना पदक सहित बहादुरी पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। दिल्ली के इंडिया गेट पर "अमर जवान ज्योति" पर शहीद भारतीय सेना के जवानों को सम्मान दिया जाता है।

indian army day

राष्ट्रीय राजधानी में कमान मुख्यालय के साथ-साथ मुख्य मुख्यालय भी इस दिन को मान्यता देते हैं और धूमधाम से मनाते हैं। सैन्य परेड के साथ, भारतीय सेना उन सभी नवीनतम तकनीक को प्रदर्शित करती है जिन्हें या तो अधिग्रहित किया गया है या सेवा में शामिल किया गया है।


इस दिन फील्ड मार्शल कोदंडेरा मडप्पा करियप्पा (के.एम. करियप्पा) को याद किया जाता है, जो भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ थे।

इतिहास और महत्व

1 अप्रैल, 1895 को ब्रिटिश प्रशासन के भीतर ब्रिट इंडियन आर्मी की स्थापना हुई और इसे ब्रिटिश इंडियन आर्मी के नाम से जाना गया। 1947 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद, 15 जनवरी 1949 तक देश को अपना पहला भारतीय प्रमुख प्राप्त नहीं हुआ था।


लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा 1949 में भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ के रूप में भारतीय सेना के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर के उत्तराधिकारी बने। ब्रिटिशर्स से भारत को अधिकार सौंपने को वाटरशेड के रूप में देखा जाता है। भारतीय इतिहास में इसे सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी मनाया जाता है।

क्या खास है इस वर्ष?

इ‌स साल की परेड खास है क्योंकि आज पहली बार भारतीय सैनिकों की नई कॉम्बेट यूनिफार्म की झलक देखने को मिलेगी। डिजिटल पैटर्न पर तैयार की गई इस यूनिफार्म को ही सैनिक युद्ध के मैदान और ऑपरेशनल एरिया में पहना करेंगे।


आज दुनिया का सबसे बड़ा झंडा जैसलमेर में सेना के वॉर म्यूजियम के पास पहाड़ी की चोटी पर पर फहराया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना दिवस के मौके पर लगने वाला तिरंगा 225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा है। इसका वजन करीब एक हजार किलो है। इस झंडे की खास बात ये है कि इसको खादी ग्रामोद्योग ने बनाया है।


जम्मू-कश्मीर और लेह के बाद जैसलमेर तीसरा स्थान है जहां दुनिया का सबसे बड़ा खादी का झंडा फहराया जा रहा है।

पीएम मोदी ने सैन्य कर्मियों को दी शुभकामना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सैन्य कर्मियों को शुभकामनायें दी हैं। श्रृंखलाबद्ध ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा हैः

“सेना दिवस के अवसर पर मेरी शुभकामनायें, विशेषकर हमारे शूरवीर सैनिकों, सम्मानीय पूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों को। भारतीय सेना को उसकी वीरता और कर्तव्यपरायणता के लिये जाना जाता है। राष्ट्र की सुरक्षा में भारतीय सेना ने जो अमूल्य योगदान किया है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

भारतीय सेना कर्मी दुरूह इलाकों में काम करते हैं और प्राकृतिक आपदाओं सहित सभी मानवीय संकटों के समय देशवासियों की सहायता करने में सदैव आगे रहते हैं। विदेशों में शांति-स्थापना मिशनों में भी भारतीय सेना के शानदार योगदान के लिये भारत को उस पर गर्व है।”