‘रुक जाना नहीं’: संघर्षों से जूझकर सफलता की राह बनाने वाले हिंदी मीडियम के आदित्य की कहानी

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आज हम इस सीरीज़ में जानेंगे, राजस्थान के हनुमानगढ़ के ग्रामीण परिवार के आदित्य की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने सरकारी स्कूल और हिंदी मीडियम से पढ़ाई करके, पढ़ाई के कमज़ोर बेसिक होने के बावजूद, अपनी अथक मेहनत से मुक़ाम हासिल किया। आख़िरकार, वह सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर, IPS अधिकारी बनने में सफल रहे।


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आदित्य, IPS ऑफिसर



मैं सिविल सेवा परीक्षा 2017 से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हुआ हूँ। मैं राजस्थान के ग्रामीण परिवार से आता हूँ और मेरी अधिकतर पढ़ाई गांव में सरकारी स्कूल में हुई है और बाद में B.A. और BEd मेरी तहसील मुख्यालय भादरा, जिला हनुमानगढ़, राजस्थान में हुई। मेरे माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।


कक्षा 11 में दोस्तों और परिवार के दबाव में रुचि न होते हुए भी गणित विषय चुना परंतु बेहतर न कर सका और इसको देखते हुए मैंने आर्ट्स में जाने का फैसला किया। अक्सर इस संबंध में मैंने लोगों की काफी बातों को सुना तो मैंने खुद के निर्णय को साबित करने के लिए टाउन के निजी कॉलेज से BA किया और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा देने का फैसला किया।


जब शुरुआत की तो चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें एक तो सारी पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल से होने के कारण अंग्रेजी का आधारभूत ढांचा कमजोर रहा, स्कूली शिक्षा में अधिक ध्यान न देने के कारण मेरे बेसिक कमजोर थे। हिंदी माध्यम में 2013 में पैटर्न परिवर्तन के कारण कंटेंट का अभाव, 2013 में हिंदी माध्यम से सबसे कम चयन से एक नकारात्मक माहौल, एक अच्छे अखबार की कमी, गाइडेंस का अभाव प्रमुख कारण रहे।


2014 से पहली बार अंग्रेजी अखबार को पढ़ा, तकनीक का उपयोग करना सीखा, जिसमें अनेक पोर्टल, वेबसाइट थी। 2014 से 2017 तक मैंने 4 प्रयास किये, जिसमें पहली बार में प्रारम्भिक परीक्षा में असफल रहा। वहां सुधार किया और दूसरे में काफी उत्साहित था, क्योंकि ना केवल प्रारम्भिक वरन मुख्य परीक्षा को प्रथम प्रयास में पास कर साक्षात्कार तक पहुंचा, परंतु प्रथम साक्षात्कार में अनुभव की कमी और अभ्यास न होने पर बेहतर अंक प्राप्त न कर पाया।


 तीसरे प्रयास में मैंने सोचा तो था कि बेहतर होगा, परन्तु भाग्य को कुछ और मंजूर था। मैं मुख्य परीक्षा में असफल रहा, जिसका कारण निबंध और इतिहास में कम अंक रहे। इतने मनोवैज्ञानिक दबाव का सामना मुझे पहले कभी नहीं करना पड़ा था।


स्वयं को प्रेरित करने और अन्य विकल्प तलाशने के लिए राजस्थान सिविल सेवा समेत अनेक पेपर दिए, परंतु असफलता ने निरंतरता जारी रखी। माता-पिता के सहयोग, मेरे दृढ़संकल्प और आत्मविश्वास से मैंने फिर चौथा प्रयास दिया, जिसमें पूर्ववर्ती कमियों को कम करने के लिए अथक मेहनत की। मेहनत रंग लाई और आखिरकार मुक़ाम हासिल किया।


इस परीक्षा की तैयारी के दौरान मुझमें अनेक कमियां रही, जिसमें पहले के प्रयासों में अधिक पढ़ने पर ध्यान देना बजाय रिवीज़न के, लिखित अभ्यास में कमी, अति आत्मविश्वास, निबंध पर ध्यान न देना और वैकल्पिक विषय इतिहास में कमी और साक्षात्कार में ग्रुप मॉक पर अधिक ध्यान न देना, बोलने का अभ्यास न होना इत्यादि रहे।


इन सब अनुभवों के आधार पर युवा अभ्यर्थियों को मेरी सलाह है कि बेसिक पर ध्यान दें, कंटेंट को सीमित रखें, समसामयिकी पर ध्यान दें और निरंतर अपडेट रहें। वैकल्पिक विषय का चुनाव अंकदायी, रुचि, समझ और उपलब्ध विषयवस्तु के आधार पर करें। साक्षात्कार की तैयारी के लिए समूह चर्चा, मॉक इंटरव्यू पर ध्यान आवश्यक है। साक्षात्कार में आत्मविश्वास की सर्वाधिक भूमिका होती है, अतः उन तत्वों पर अधिक ध्यान दें, जहाँ से आत्मविश्वास को सकारात्मक बल मिले।





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गेस्ट लेखक निशान्त जैन की मोटिवेशनल किताब 'रुक जाना नहीं' में सफलता की इसी तरह की और भी कहानियां दी गई हैं, जिसे आप अमेजन  से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।


(योरस्टोरी पर ऐसी ही प्रेरणादायी कहानियां पढ़ने के लिए थर्सडे इंस्पिरेशन में हर हफ्ते पढ़ें 'सफलता की एक नई कहानी निशान्त जैन की ज़ुबानी...')

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