Tata Group के बाद क्या करेंगे एन चंद्रशेखरन? रतन टाटा की राह चलेंगे? अगली पारी के 5 बड़े ऑप्शन
Tata Sons के चेयरमैन के रूप में एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा. Tata Group में 40 साल की लंबी पारी के बाद उनकी अगली भूमिका क्या होगी? जनसेवा और AI से लेकर प्राइवेट इक्विटी और नए फाउंडर्स के साथ काम करने तक, उनके पास आगे बढ़ने के कई विकल्प हैं. एक झलक इन 5 दिलचस्प ऑप्शंस पर...
मुझे एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) से पहली मुलाकात याद है. तब वह Tata Consultancy Services (TCS) के CEO थे. यह मुलाकात 2009 के आखिर या 2010 की शुरुआत में कंपनी द्वारा जारी नतीजों के बाद हुए इंटरव्यू के दौरान हुई थी.
बातचीत खत्म होने पर मेरे एक सहयोगी ने उनसे पूछा कि वह खुद को काम से कैसे दूर रखते हैं. चंद्रा, जैसा कि उन्हें आमतौर पर बुलाया जाता है, ने तब अपने ट्रेकिंग हॉलीडे के बारे में बताया. अगर मुझे ठीक से याद है तो वह नेपाल गए थे.
यह छुट्टी करीब एक हफ्ते की थी. चंद्रशेखरन ने कहा था कि इससे ज्यादा समय तक छुट्टी पर रहें तो उन्हें बेचैनी होने लगती है और वह वापस काम पर लौटना चाहते हैं.
यह 15 साल से भी ज्यादा पुरानी एक पत्रकार की याद है. इतने सालों में कुछ बातें धुंधली हो सकती हैं. लेकिन उनकी वह बात आज भी याद है.
चंद्रा को लगातार काम करते रहना पसंद है.
2020 में जब मैंने उनका दोबारा इंटरव्यू किया था, तब उनकी एक और बात याद रह गई. उन्होंने कहा था कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के लिए दो अलग-अलग टू-डू लिस्ट रखने की जरूरत नहीं है. एक ही लिस्ट होनी चाहिए और वह भी छोटी.
आज उनकी यह सोच खास तौर पर प्रासंगिक लगती है.
एन चंद्रशेखरन ने फैसला किया है कि वह Tata Sons के चेयरमैन के तौर पर अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद एक और कार्यकाल के लिए दावा नहीं करेंगे. उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा.
तो Tata Group में 40 साल से ज्यादा लंबी पेशेवर जिंदगी के बाद अब उनकी लिस्ट में क्या होगा?
अभी यह साफ नहीं है कि चंद्रशेखरन ने आगे के लिए क्या तय किया है. लेकिन उनकी अगली पारी के पांच संभावित रास्ते जरूर नजर आते हैं.
1. रामदोरई और नंदन नीलेकणि की तरह संस्थागत भूमिका
चंद्रशेखरन की सबसे प्रभावशाली अगली पारी शायद किसी दूसरी कंपनी की कमान संभालना नहीं होगी. वह इससे कहीं बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं.
1997 से 1999 के बीच चंद्रशेखरन ने एस रामदोरई के एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के तौर पर काम किया था. इस दौरान उन्होंने ग्राहकों के साथ काम करने, ऑपरेशंस और विस्तार को करीब से समझा. बाद में 2009 में उन्होंने रामदोरई की जगह TCS के CEO की जिम्मेदारी संभाली.
रामदोरई ने TCS के बाद भी काम जारी रखा. आज 81 साल की उम्र में वह Karmayogi Bharat के चेयरमैन हैं. यह सरकार समर्थित संस्था Mission Karmayogi के तहत सिविल सर्विस की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी है. वह PRS Legislative Research के बोर्ड के चेयरमैन भी हैं.
यह चंद्रशेखरन के लिए एक दिलचस्प मॉडल हो सकता है. एक बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी चलाने के बाद अपने अनुभव का इस्तेमाल किसी दूसरे बड़े संस्थान के लिए करना.

नंदन नीलेकणि इसका एक और उदाहरण हैं. Infosys के CEO पद से हटने के बाद वह UIDAI के संस्थापक चेयरमैन बने और Aadhaar के शुरुआती वर्षों में इसकी अगुवाई की. हाल ही में सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई एक हाई पावर टास्क फोर्स की जिम्मेदारी भी उन्हें दी.
चंद्रशेखरन इन दोनों रास्तों का मिश्रण चुन सकते हैं. यह कोई सरकारी मिशन हो सकता है. कोई शैक्षणिक संस्थान, टेक्नोलॉजी बोर्ड या उनकी अपनी संस्था भी हो सकती है. इसका फोकस शिक्षा, स्किलिंग या एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर हो सकता है.
TCS में उनके काम से भी इसके कुछ संकेत मिलते हैं. चंद्रशेखरन TCS iON के प्रमुख आर्किटेक्ट रहे. इसे 2011 में लॉन्च किया गया था. शुरुआत में यह भारत के छोटे और मध्यम कारोबारों (SMBs) के लिए क्लाउड-बेस्ड प्लेटफॉर्म था. बाद में इसका विस्तार एजुकेशन, रिक्रूटमेंट और असेसमेंट तक हुआ.
उनके TCS के CEO रहने के दौरान Passport Seva का भी देशभर में विस्तार हुआ. हालांकि यह प्रोजेक्ट उनके CEO बनने से पहले ही शुरू हो चुका था. 2008 में TCS को सर्विस प्रोवाइडर चुना गया था. इसके पायलट प्रोजेक्ट मई 2010 में शुरू हुए और जून 2012 तक सभी 77 Passport Seva Kendra चालू हो गए थे.
Sahasranshu Technologies के फाउंडर, CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ पई ने हाल ही में X पर सुझाव दिया कि चंद्रशेखरन को लेटरल एंट्री के जरिए सरकार में किसी वरिष्ठ मंत्री की भूमिका दी जानी चाहिए.
हालांकि, यह साफ नहीं है कि चंद्रशेखरन खुद किसी औपचारिक सरकारी भूमिका में जाना चाहेंगे या नहीं.
2. रतन टाटा की तरह Startups में निवेश
दूसरा रास्ता Tata Group के लिए कुछ ज्यादा जाना-पहचाना है. Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने के बाद रतन टाटा भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत निवेशकों में शामिल हो गए थे.
उन्होंने , , , , , और समेत कई कंपनियों में निवेश किया.
उनके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में भी शामिल था. 2015 में YourStory के फंडिंग राउंड में रतन टाटा ने , और टीवी मोहनदास पई के साथ निवेश किया था.

रतन टाटा
हालांकि चंद्रशेखरन की स्टार्टअप्स में निवेश की कहानी अलग हो सकती है. उनकी दिलचस्पी AI, Deeptech, Advanced Manufacturing, Semiconductors, Enterprise Software या Climate Infrastructure जैसे क्षेत्रों में हो सकती है.
भारत में पैसा लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है. लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम है जिन्होंने लाखों कर्मचारियों वाली कंपनियों का नेतृत्व किया हो, सरकारों और दुनिया के बड़े ग्राहकों के साथ काम किया हो, अरबों डॉलर के कैपिटल एक्सपेंडिचर वाले प्रोजेक्ट संभाले हों और टेक्नोलॉजी के कई दौर देखे हों.
किसी स्टार्टअप को कंपनी से एक बड़े संस्थान में बदलने की कोशिश कर रहे फाउंडर के लिए चंद्रशेखरन का अनुभव काफी काम आ सकता है.
3. भारत के लिए बड़े AI मिशन की जिम्मेदारी
अगर पब्लिक सेक्टर में उनकी भूमिका तय होती है तो यह किसी बड़ी जिम्मेदारी के बजाय एक खास मिशन भी हो सकता है.
मसलन, देश के लिए AI इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना.
इस साल हुए India AI Impact Summit में चंद्रशेखरन ने AI को इंटेलीजेंस का इन्फ्रास्ट्रक्चर बताया था. उनका कहना था कि इसका मूल लक्ष्य हर नागरिक तक AI टूल्स पहुंचाना होना चाहिए. उनके पास इस सेक्टर को देखने का एक खास अनुभव है.
TCS ने उन्हें सॉफ्टवेयर और एंटरप्राइज का अनुभव दिया है. Tata Electronics के जरिए उन्हें सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की समझ मिली है. वहीं Tata Group की पावर और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां उस बड़े फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं जिसकी जरूरत AI और कम्प्यूटिंग के लिए होती है.
चंद्रशेखरन खुद भारत के AI अवसर को Chips, Systems, Energy और Applications से जोड़ चुके हैं. भारत के पास IndiaAI Mission है. सेमीकंडक्टर से जुड़े प्रोग्राम हैं. Digital Public Infrastructure (DPI) भी है. अब असली चुनौती इनके बीच तालमेल और फास्ट एग्जीक्यूशन की है.
Chips, Power, Algorithms और Talent को एक साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जाए, यह बड़ा सवाल है.
समयसीमा और स्पष्ट लक्ष्यों वाला कोई राष्ट्रीय मिशन चंद्रशेखरन की कार्यशैली के ज्यादा करीब हो सकता है. सिर्फ सलाहकार समिति का हिस्सा बनकर काम करना शायद उनके लिए उतना सही विकल्प न हो.
4. Private Equity में Operating Partner बनना
चंद्रशेखरन के लिए एक और रास्ता Private Equity का हो सकता है. दुनिया की बड़ी Private Equity कंपनियों को अब सिर्फ Investment Committee में बैठने वाले अनुभवी लोगों की जरूरत नहीं है. उन्हें ऐसे Operators चाहिए जो कंपनियों में बदलाव ला सकें, Capital का सही इस्तेमाल कर सकें, Management Teams तैयार कर सकें और टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलावों से निपट सकें.
चंद्रशेखरन के पास इसका तगड़ा अनुभव है.
उन्होंने एक Global IT Services कंपनी चलाई है. इसके बाद Tata Group में Aviation, Steel, Automobiles, Power, Hotels, Electronics और Consumer Goods जैसे अलग-अलग कारोबारों की देखरेख की है.
Hindustan Unilever (HUL) के पूर्व CEO संजीव मेहता ने Air India के बोर्ड में चंद्रशेखरन के साथ काम किया था. उन्होंने एक बार LinkedIn पर लिखा था कि चंद्रशेखरन बड़ा सोचते हैं, बड़ा काम करते हैं और उनके अंदर एग्जीक्यूशन की जबरदस्त क्षमता है.
कोई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. उनके अनुभव का इस्तेमाल कई कंपनियों में किया जा सकता है.
हालांकि, इसमें एक सवाल भी है.
दूसरों की कंपनियों को सलाह देना शायद चंद्रशेखरन को बहुत सक्रिय भूमिका जैसा महसूस न हो. आखिर उन्होंने चार दशक से ज्यादा समय तक खुद ऑपरेशनल कमान संभाली है.
5. एक और बड़ी कंपनी की कमान
हो सकता है हम इस पूरे सवाल को जरूरत से ज्यादा जटिल बना रहे हों. चंद्रशेखरन कोई दूसरी बड़ी कंपनी भी चला सकते हैं.
फरवरी 2027 में Tata Sons का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी उम्र 63 साल होगी. उनके पास अभी काफी समय है.
मुश्किल यह होगी कि Tata Sons जैसा बड़ा प्लेटफॉर्म कहां मिलेगा. किसी सामान्य सिंगल बिजनेस कंपनी की जिम्मेदारी लेना उनके दायरे को काफी छोटा कर देगा. इसलिए इसके लिए कोई बड़ा मुकाम चाहिए होगा.
यह कोई बड़ी ग्लोबल कॉर्पोरेट कंपनी हो सकती है जो बदलाव के दौर से गुजर रही हो. या फिर कोई बड़ा इंडस्ट्रीयल प्लेटफॉर्म जिसे ज़ीरो से खड़ा किया जा रहा हो.
रामदोरई ने चंद्रशेखरन की क्षमता काफी पहले पहचान ली थी. उन्होंने उन्हें Customers, Operations, Sales और International Expansion जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का मौका दिया. इसके बाद उन्हें TCS की कमान सौंपी.
इसलिए एक बड़ी कंपनी की पूरी जिम्मेदारी संभालना शायद उनके लिए सबसे अच्छा रास्ता हो सकता है.
आखिर एक ऐसे शख्स के लिए जो लगातार काम करते रहना पसंद करता है, एक बड़ा ऑपरेशनल रोल सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकता है.
चंद्रशेखरन की लिस्ट में आगे क्या होगा?
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि चंद्रशेखरन इनमें से कौन सा रास्ता चुनेंगे. यह भी संभव है कि उनकी अगली पारी इन सभी विकल्पों से अलग हो.
इसके अलावा फरवरी 2027 तक Bombay House में उनका काम खत्म नहीं हुआ है. Air India अभी भी मुश्किल दौर से गुजरी रही है. Tata Group के सेमीकंडक्टर और बैटरी से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट अभी निर्माण के चरण में हैं. Tata Sons को भी नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया से गुजरना है.
इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि चंद्रशेखरन के पास विकल्प कितने हैं. सवाल यह है कि अगले दशक में उनके अनुभव का सबसे ज्यादा असर कहां हो सकता है.
करीब 15 साल पहले हुई उस बातचीत में कही गई उनकी एक बात मुझे आज भी याद है. एक हफ्ते की छुट्टी काफी थी. इसके बाद वह वापस काम पर लौटना चाहते थे.
Tata Group के साथ 40 साल से ज्यादा समय बिताने के बाद अब उनकी लिस्ट छोटी होने वाली है. लेकिन उम्मीद यही है कि वह ज्यादा समय तक खाली नहीं रहने वाली.
(Translated by: रविकांत पारीक)



