कैसे एक मसाला व्यापारी ने खड़ा किया 27,000 करोड़ रुपये का ज्वैलरी ब्रांड: मालाबार गोल्ड की अनकही कहानी

By Palak Agarwal
February 02, 2020, Updated on : Sun Feb 02 2020 07:31:31 GMT+0000
कैसे एक मसाला व्यापारी ने खड़ा किया 27,000 करोड़ रुपये का ज्वैलरी ब्रांड: मालाबार गोल्ड की अनकही कहानी
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

सफलता के रहस्यों में से एक रहस्य ये भी है कि सामान्य चीजों को असामान्य रूप से करना वो भी बिना किसी गलती के और मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के संस्थापक 62 वर्षीय एमपी अहमद इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। व्यापारियों और जमींदारों के परिवार में जन्मे, अहमद ने 1979 में मसाला व्यापार उद्यम स्थापित करके 20 साल की उम्र में ही अपनी उद्यमशीलता की शुरुआत की थी। वह केरल में कोझिकोड (अब कालीकट) के खुदरा विक्रेताओं को इलायची, काली मिर्च और नारियल का व्यापार (ट्रेड) करते थे। हालांकि, उन्होंने जल्द ही महसूस किया कि ट्रेडिंग बिजनेस बड़ा नहीं होगा।


क

एमपी अहमद, संस्थापक, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स



मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के मीडिया और मार्केटिंग हेड केपी नारायणन कहते हैं,

“बहुत कम उम्र में और सिर्फ 12वीं कक्षा पास, एमपी अहमद ने दुर्लभ और कीमती व्यावसायिक पाठ आत्मसात कर लिए थे जिसके लिए कोई भी टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट अलग से क्लासरूम नहीं लगा सकता। हालांकि, वह केवल उसी पर नहीं रुकना चाहते थे। वे और कुछ बड़ा करना चाहते थे।”


अहमद अपने जीवन के बारे में शेयर करते हुए, नारायणन कहते हैं कि उनकी व्यावसायिक यात्रा के शुरुआती वर्षों में, मुंबई के एक रिटेलर पर अहमद का काफी पैसा अटका हुआ था। लेकिन, किसी वित्तीय संकट के कारण, वह बकाया राशि देने में असमर्थ था और अपने व्यवसाय को बंद करने की योजना बना रहा था। रिटेलर ने अहमद से वादा किया कि वह अपना ब्रांड बेचकर बकाया चुकाएगा।


अहमद को इससे थोड़ा बुरा लगा कि कोई पैसे चुकाने के लिए अपना ब्रांड बेचने को तैयार है, लेकिन यह उनके लिए एक संज्ञानात्मक पाठ था। उन्होंने एक ब्रांड तैयार करने की अहमियत के बारे में जाना और जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें अपना खुद का एक ब्रांड बनाने की जरूरत है। लेकिन मसाले के कारोबार में नहीं। उन्होंने पूरी तरह से एक अलग यात्रा में छलांग लगाई।


मालाबार गोल्ड की अनकही कहानी

अहमद ने मार्केट पर जमकर रिसर्च की और महसूस किया कि ज्वैलरी पर अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के लोगों का कब्जा ज्यादा है। और, फिर क्या, उन्हें अपनी यात्रा शुरू करने का कारण मिल गया। अपने सभी साहस को बढ़ाते हुए, उन्होंने उद्योग में एक व्यवसाय स्थापित करने और अपने मूल स्थान मालाबार को बढ़ावा देने का फैसला किया। हालाँकि, उनके पास इतना बड़ा कदम उठाने के लिए कोई फंड नहीं था।


अहमद बताते हैं,

“मैंने अपने रिश्तेदारों के साथ इस आइडिया पर चर्चा की और उनमें से सात लोग मेरे इस प्लान के साथ जुड़ गए। हालाँकि, कैश की कमी की समस्या उनके साथ भी थी। व्यवसाय शुरू करने के लिए, उन्होंने प्रॉपर्टी बेची और व्यवसाय में निवेश करने के लिए 50 लाख रुपये इकट्ठे किए। इस प्रकार, वे पहले निवेशक बन गए और मालाबार गोल्ड्स एंड डायमंड्स के संस्थापक स्तंभ भी।


और फिर 1993 में, कंपनी ने कालीकट में 400 वर्ग फुट की एक छोटी दुकान शुरू की। अहमद ने गोल्ड बार्स (सोने की छड़ें) खरीदकर और फिर सुनार से निर्मित आभूषण प्राप्त करके शुरुआत की। शुरुआत अच्छी थी और ग्राहक डिजाइन और कलेक्शन से मोहित थे। थोड़े समय में, मालाबार गोल्ड्स एंड डायमंड्स का विस्तार केरल के अन्य छोटे शहरों - तिरूर और टेलिचेरी में दो और स्टोरों तक हुआ। यह देखते हुए कि व्यवसाय अच्छी गति से चल रहा है, 1995 में, अहमद ने पुराने स्टोर को बंद कर दिया और एक को खोला जो कि 4,000 वर्ग फुट का था।


क

पीकॉक इंस्पायर्ड नेकपीस ऑफ ज्वैलरी

1999 में, अहमद ने पाया कि सोने के गहनों की गुणवत्ता को बढ़ावा देने की जरूरत है। वह केरल में बीआईएस-हॉलमार्क वाले आभूषण लाने में सबसे आगे थे। सोने में 916-कैरेट मीटर ने अलग से खूबसूरती जोड़ी और तब से, ब्रांड ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।


यात्रा में प्रमुख मील के पत्थर

2001 में, मालाबार गोल्ड्स एंड डायमंड्स ने भारत के बाहर कदम रखा और खाड़ी क्षेत्र में अपना पहला स्टोर खोला। तब तक, कंपनी में 10 निदेशक थे। मालाबार ने 2011 में रियाद में अपना 50वां स्टोर खोला। उस समय तक, कंपनी 12,000 करोड़ रुपये का सामान बेच चुकी थी। 2013 तक, इसमें सात देशों में 103 आउटलेट, भारत में और यूएई के ऑफिस, डिजाइन सेंटर और कारखानों के अलावा 10 थोक युनिट्स का एक खुदरा नेटवर्क था।


मालाबार दुनिया भर में 80 से अधिक शोरूम के साथ वार्षिक कारोबार के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आभूषण विक्रेता बन गया, और भारत और मध्य पूर्व दोनों में मजबूत तौर पर उपस्थिति दर्द कर ली। 2016 में, कंपनी ने बेलगाम में अपना 150वां स्टोर खोला। समूह ने समकालीन डिजाइनों के साथ आभूषण खुदरा उद्योग में 22 साल पूरे कर लिए हैं। 2017 में, एक अग्रणी आभूषण रिटेलर के रूप में अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने दुबई में एक स्टोर स्थापित किया, जो कि इसका 200वां स्टोर था।


वैश्विक स्तर पर पांच बड़े आभूषण विक्रेताओं में से एक, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने 12 जनवरी 2018 को एक ही दिन में छह देशों में 11 नए शोरूम खोले। बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर ने लुलु हजाना, शारजाह में इसके आउटलेट का उद्घाटन किया था। 2019 में, कंपनी ने शिकागो में अपना 250वां आउटलेट खोलकर यूएसए में एक शानदार एंट्री मारी। सात निवेशकों के साथ 1993 में शुरू हुई कंपनी के पास अब 4,600 निवेशक हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में मालाबार गोल्ड्स एंड डायमंड्स ने 27,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके पीसेस भारत में स्थित कालीकट, त्रिचूर, कोयम्बटूर, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता में फैक्ट्री युनिट्स में मैन्युफैक्चर होते हैं। दुबई में भी मालाबार की फैसिलिटी है। नारायणन का कहना है कि 60 प्रतिशत प्रोडक्ट्स सप्लायर्स से खरीदे जाते हैं। कंपनी ग्राहकों की मांग के अनुरूप आभूषणों का आयात भी करती है।


प्रमुख चुनौतियां और कोई आईपीओ क्यों नहीं

नारायणन कहते हैं कि बिजनेस को बढ़ाना हमेशा ऑपरेशन्स, रेगुलेशन्स, मार्केट्स और कंज्यूमर सेंटिमेंट्स से संबंधित चुनौतियों से जुड़ा होता है। फिलहाल, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव के कारण कंज्यूमर सेंटिमेंट्स में सुधार हुआ है। हालांकि, कंपनी को भरोसा है कि जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा, हालात सुधरेंगे।

 

क

मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स स्टोर

रेगुलेटरी साइड को लेकर, मालाबार को लगता है कि उच्च आयात शुल्क ऑर्गनाइज्ड ज्वैलरी रिटेल के लिए एक चुनौती है, क्योंकि यह एक तरह से सोने के अवैध लेनदेन को बढ़ावा देता है। बैंक और वित्तीय संस्थान रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए ऋण जोखिम को कड़ा करते हैं और फिर यह मालाबार की तरह संगठित आभूषण खुदरा श्रृंखलाओं के लिए पूंजी जुटाने के विकल्पों को कम करता है।


आईपीओ रूट पर जाने के बारे में बात करते हुए, नारायणन कहते हैं कि मालाबार गोल्ड्स एंड डायमंड्स दो साल पहले इसके लिए योजना बना रहा था। हालांकि, आर्थिक मंदी और नोटबंदी के कारण ऐसा नहीं हुआ। उनका कहना है कि कंपनी अगले दो से तीन वर्षों में आईपीओ के लिए फिर से योजना बना सकती है जब बाजार की स्थितियां व्यवहार्य हों।


वर्तमान में, मालाबार गोल्ड्स एंड डायमंड्स एक आक्रामक खुदरा विस्तार योजना को फॉलो कर रहा है, जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर 750 स्टोर खोलने का है। यह विस्तार रणनीति सिंगापुर, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया और बैंकॉक जैसे बाजारों को टारगेट करेगी। कंपनी ने इस विस्तार के लिए 7000 करोड़ रुपये भी तय कर लिए हैं और उस तरह की पूंजी जुटाने के लिए, नारायणन का कहना है कि मालाबार निवेशक आधार का विस्तार कर रहा है।


कंपनी अब देश के उत्तरी और मध्य भाग के राज्यों के निवेशकों को लक्षित करने की योजना बना रही है। आज, समूह ने ज्वेलरी रिटेल, होलसेल और मैन्युफैक्चरिंग, रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, होम फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज, और आईटी सर्विसेज और बिजनेस सॉल्यूशंस में अपनी जगह बनाई है।


Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें