मार्क ज़करबर्ग के Metaverse को टक्कर देने के लिए ये बना रहे हैं स्वदेशी मेटावर्स

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित Trace Network Labs मार्क ज़करबर्ग के Metaverse को टक्कर देने के लिए बना रही है स्वदेशी मेटावर्स. इतना ही नहीं इसके प्लेटफॉर्म पर आप अपना खुद का मेटावर्स भी बना सकते हैं. लोकेश राव और सुनील अरोड़ा ने साल 2021 में कंपनी की शुरुआत की थी.

मार्क ज़करबर्ग के Metaverse को टक्कर देने के लिए ये बना रहे हैं स्वदेशी मेटावर्स

Tuesday February 28, 2023,

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साल 2021 के अक्टूबर महीने के आखिरी हफ्ते में इंटरनेट पर, खासकर सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ी घोषणा हुई. ये घोषणा दिग्गज कंपनी Facebook के को-फाउंडर और सीईओ मार्क ज़करबर्ग (Mark Zuckerberg) ने की. उन्होंने Facebook का नाम बदलकर मेटा (Meta) रख दिया. तभी से इस शब्द को अधिक तवज्जोह मिली. लेकिन...

आपको ये जानकर तअ'ज्जुब जरूर होगा कि ये शब्द नया नहीं है. मेटा शब्द 'मेटावर्स' से लिया गया है. और मेटावर्स शब्द का ईज़ाद हुआ था साल 1992 में. जब इस शब्द का इस्तेमाल पहली बार एक साइंस फिक्शन नॉवेल ‘स्नो क्रैश’ (Snow Crash) में किया गया था. यह नॉवेल नील स्टीफेंसन (Neal Stephenson) ने लिखा था.

मेटावर्स वर्चुअल रियलिटी की तरह लगता है लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि यह इंटरनेट का भविष्य हो सकता है. एक कंप्यूटर होने के बजाय लोग मेटावर्स में एक हेडसेट के ज़रिए वर्चुअल दुनिया में सभी तरह के डिज़िटल परिवेश में तक अपनी पहुँच बना सकते हैं. इस वर्चुअल दुनिया में काम, प्ले, कॉन्सर्ट से लेकर दोस्तों और परिवारों से संपर्क सब संभव है.

"मेटावर्स में अनगिनत वर्चुअल वर्ल्ड होंगी और ये एक दूसरे को वास्तविक दुनिया से जोड़े रखेंगी."

बैंक ऑफ़ अमेरिका ने मेटावर्स को उन 14 टेक्नोलॉजी में शामिल किया है जो हमारी ज़िंदगी में क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही हैं.

अब अगर बात करें इसके मार्केट साइज पर तो, रेवेन्यू के मामले में मेटावर्स की मार्केट साइज 2022 में लगभग 61.8 अरब डॉलर होने का अनुमान था और 2027 तक 47.2% की CAGR (compound annual growth rate) से बढ़कर 426.9 अरब डॉलर होने का अनुमान है. ये आंकड़े MarketsAndMarkets से जुटाए गए हैं.

लेकिन जैसा कि टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर के मामले में भारत ने पूरी दुनिया में टैलेंट की बदौलत अपना लोहा मनवाया है. यहीं पिक्चर में आती है एक कंपनी — Trace Network Labs

कैसे हुई शुरुआत

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित Trace Network Labs मार्क ज़करबर्ग के Metaverse को टक्कर देने के लिए बना रही है स्वदेशी मेटावर्स. इतना ही नहीं इसके प्लेटफॉर्म पर आप अपना खुद का मेटावर्स भी बना सकते हैं. लोकेश राव और सुनील अरोड़ा ने साल 2021 में कंपनी की शुरुआत की थी.

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सुनील और लोकेश दोनों ने कई वर्षों तक फैशन इंडस्ट्री में एक साथ काम किया. IIM के पूर्व छात्र लोकेश, वर्ल्ड फैशन एक्सचेंज के लिए एक प्रमुख सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे, जब वह सुनील से मिले, जो उसी कंपनी में ग्लोबल बिजनेस डेवलपमेंट डिविजन में काम कर रहे थे.

साल 2018 में जब दोनों एक ब्लॉकचेन इवेंट अटेंड कर रहे थे, वहां दोनों इस नई टेक्नोलॉजी के मुरीद हो गए. और फिर कोरोना काल में जिस तरह से सोशल मीडिया पर लोगों का झुकाव हुआ, काफी रिसर्च के बाद दोनों एक आइडिया पर सहमत हुए और यहीं से Trace की नींव पड़ी.

लोकेश बताते हैं, “लोगों ने जिस तरह वर्चुअल वर्ल्ड को अपनाया मैं सोचता रहा कि एक वास्तविक व्यक्ति को वर्चुअल स्पेस में कोड करने की यह पूरी अवधारणा कितनी क्रांतिकारी हो सकती है. फिर अवतार के कॉन्सेप्ट ने मन मोह लिया. अपने अवतारों में व्यक्ति किसी भी समय दुनिया में कहीं भी हो सकता है, जो वास्तविक दुनिया में संभव नहीं है. ये वाकई दिलचस्प था. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमने Trace की शुरुआत की. विचार यह था कि किसी भी आम इंसान को वर्चुअल वर्ल्ड में लाया जा सके. उसके अवतार बनाए जाए."

कंपनी अब तक अपने चार प्रोडक्ट — Buddy, Bling, Gateway, और Pariz लॉन्च कर चुकी है.

'Buddy' अवतार

कॉन्सेप्ट पर काम करते हुए Trace ने मई 2022 में अपना dApp लॉन्च किया. इस प्लेटफॉर्म पर लोग अपने खुद के अवतार बना सकते हैं. इन्हें 'Buddy' कहा जाता है.

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लोकेश बताते हैं कि "dApp में, लोग अपनी सेल्फी ले सकते हैं. अपनी तस्वीरें अपलोड करते हैं, और फिर वे हूबहू उनके जैसे दिखने वाला अवतार बना सकते हैं. फिर, वे अलग-अलग मेटावर्स में कई तरह के Buddy अवतार बना सकते हैं. वे एनएफटी का उपयोग करने में सक्षम होंगे. वर्तमान में, हजारों Buddy एनएफटी विश्व स्तर पर बना लिए गए हैं."

जैसा कि आज की दुनिया में कहावत है — आगे बढ़ने का नाम टेक्नोलॉजी है.

Pariz Metaverse - वर्चुअल फैशन स्टोर

Trace की टीम आगे बढ़ते हुए एक टेक-स्टैक बनाने पर काम रही है, जहां Buddy अवतारों के लिए मेटावर्स में वर्चुअल शॉपिंग को संभव बनाया जा सके. बल्कि कंपनी इससे भी एक कदम आगे बढ़ रही है. अब जहां दुनिया वर्चुअल शॉपिंग पर ही अटकी हुई है. यानि कि आप शॉपिंग करते हैं, लेकिन हक़ीक़त में आपके हाथ कुछ नहीं लगता. Trace इसे हक़ीक़त में संभव बनाने पर काम कर रहा है. मतलब कि आप वर्चुअल वर्ल्ड में शॉपिंग करेंगे और जल्द ही वो आपके पास होगी. ठीक वैसे ही जैसे आप मौजूदा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से शॉपिंग करते हैं.

हाल ही में कंपनी ने Pariz Metaverse लॉन्च किया है. यह एक वर्चुअल फैशन स्टोर है जहां फैशल वर्ल्ड के अलग-अलग ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं. Madame पहला अपैरल ब्रांड था जो इस वर्चुअल फैशन स्टोर से जुड़ा. कंपनी और ब्रांड्स को इस स्टोर से जोड़ने पर काम कर रही है.

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रेवेन्यू मॉडल

Trace के रेवेन्यू मॉडल के बारे में पूछने पर लोकेश बताते हैं कि कंपनी B2B (business-to-business) और B2C (business-to-consumer) दोनों मॉडल पर काम करती है. लेकिन सबसे ज्यादा रेवेन्यू कंपनी को B2C मॉडल से आता है. कंपनी Buddy एनएफटी की बिक्री से पैसे कमाती है. वहीं अगर B2B मॉडल से रेवेन्यू जनरेट करने की बात करें, तो यह एक्सपीरियंस स्टोर से बिक्री के जरिए पैसे कमाती है. कंपनी एक मेटावर्स थिएटर एक्सपीरियंस भी बना रही है, जहां यह टिकट बेचकर रेवेन्यू हासिल करेगी. इसके अलावा Trace Events बनाने पर काम कर रही है, जहां आप मेटावर्स रेंट (किराए) पर ले सकते हैं. यह भी रेवेन्यू मॉडल का हिस्सा है.

इसके अलावा कंपनी ने Polygon, Push Protocol, EasyFi Network, QuickSwap, Technopak, Cere जैसी नामचीन कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है.

फंडिंग और भविष्य की योजनाएं

साल 2021 में Trace Network Labs ने अपने सीड फंडिंग राउंड में 1.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी. कंपनी सीरीज़ ए फंडिंग राउंड के लिए इन्वेस्टर्स देख रही है.

Trace की भविष्य की योजनाओं के बारे में लोकेश बताते हैं, "कंपनी क्रिएटर्स, डेवलपर्स और बिल्डर्स कम्यूनिटी को सशक्त बनाने पर काम रही है. हम क्रिएटर इकोनॉमी का समर्थन करना चाहते हैं, इसलिए हम यूजर्स को या तो स्टोर, या थिएटर एक्सपीरियंस, यहां तक कि हमारे टेक-स्टैक पर कुछ भी बनाने देंगे. फिर, वे अपने प्रोडक्ट्स को दूसरे कस्टमर्स को बेच सकते हैं और पैसे कमा सकते हैं.”