पीएम ऑफिस में टेलीकॉम नेटवर्क सेटअप करने वाले शख्स ने कैसे खड़ी कर दी 120 करोड़ के रेवेन्यू वाली EV बैटरी कंपनी

JLNPhenix Energy एक इलेक्ट्रिक व्हीकल और मैन्युफैक्चरिंग बैटरी कंपनी है जो सिंगापुर स्थित CLN Energy PTE. LTD. की सहायक कंपनी है. कंपनी के नोएडा (उत्तर प्रदेश), पुणे (महाराष्ट्र) में लिथियम-आयन बैटरी असेंबलिंग प्लांट हैं.

पीएम ऑफिस में टेलीकॉम नेटवर्क सेटअप करने वाले शख्स ने कैसे खड़ी कर दी 120 करोड़ के रेवेन्यू वाली EV बैटरी कंपनी

Monday February 20, 2023,

7 min Read

इलेक्ट्रिक वाहनों (electric vehicle - EVs) की बढ़ती मांग, बैटरी टेक्नोलॉजी में प्रगति, अनुकूल सरकारी नीतियों और विनियमों और नए प्लग-इन ईवी मॉडल की शुरूआत जैसे कारकों के चलते ईवी बैटरी का बाजार (electric vehicle battery market size) लगातार बढ़ रहा है.

पारंपरिक ऑटोमोबाइल के पर्यावरण पर प्रभाव के बारे में बढ़ती चिंताओं के परिणामस्वरूप दुनिया भर की सरकारें वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों को अपनाने को बढ़ावा दे रही हैं. EVs शून्य-उत्सर्जन (zero-emission) वाली कारें और बाइक हैं जो दुनिया भर में इकोफ्रेंडली पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन के लिए अधिक से अधिक लोकप्रिय हो रही हैं. EVs के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, कई राष्ट्रीय सरकारें वित्तीय प्रोत्साहन मुहैया करती हैं जैसे टैक्स में छूट और रिफंड, सब्सिडी, EVs के लिए पार्किंग / टोल दरों में कमी, और फ्री चार्जिंग. नतीजतन, दुनिया भर में ईवी बैटरी की मांग तेजी से बढ़ रही है.

रेवेन्यू के मामले में ग्लोबल ईवी बैटरी मार्केट 2022 में 56.4 अरब डॉलर का होने का अनुमान लगाया गया था और 2027 तक 134.6 अरब डॉलर तक पहुंचने के लिए तैयार है, जो 2022 से 2027 तक 19.9% की CAGR (compound annual growth rate) से बढ़ रहा है. ये आंकड़े MarketsAndMarkets से जुटाए गए हैं.

चीन, अमेरिका और जर्मनी जैसे अग्रणी ईवी बाजार तेजी से और अधिक प्रभावी चार्जिंग तकनीकों के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के अलावा ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में खूब पैसा खर्च कर रहे हैं. EVs की बढ़ती मांग को पूरा करने और उद्योग को आकार देने के लिए वाहन निर्माताओं को बड़े खर्चे करने की उम्मीद है. EVs के विकास के लिए, Tesla, Volkswagen, Ford, Nissan, BMW, और General Motors जैसी कंपनियों के पास बड़े R&D बजट हैं.

ग्लोबल ईवी बैटरी मार्केट में प्रमुख खिलाड़ियों CATL (चीन), Panasonic Holdings Corporation (जापान), LG Chem (दक्षिण कोरिया), BYD (चीन) और Samsung SDI (दक्षिण कोरिया) का दबदबा है.

वहीं, भारत की JLNPhenix Energy इन दिग्गज कंपनियों को टक्कर देने के लिए आगे बढ़ रही है. इसकी स्थापना सितंबर, 2019 में हुई थी. यह इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी कंपनी है जो सिंगापुर स्थित CLN Energy PTE. LTD. की सहायक कंपनी (subsidiary) है. कंपनी के नोएडा (उत्तर प्रदेश), पुणे (महाराष्ट्र) में लिथियम-आयन (lithium-ion) बैटरी असेम्बलिंग प्लांट हैं और दिसंबर, 2022 में इसने घोषणा की थी कि 200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ कंपनी हैदराबाद में एक और प्लांट लगाएगी.

JLNPhenix Energy के सीईओ सुनील गांधी ने कंपनी की शुरुआत, चैलेंजेज और भविष्य की योजनाओं को लेकर हाल ही में YourStory के साथ बात की.

टेलीकॉम सेक्टर से हुई करियर की शुरुआत

सुनील हरियाणा के फरीदाबाद से आते हैं. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशंस में ग्रेजुएशन किया है. शुरुआती करियर में उन्होंने Ericsson, Airtel, Nokia समेत टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के साथ कुछ प्रोजेक्ट्स पर काम किया. उन्होंने साउदी अरब में Lucent Technologies के साथ भी काम किया. उसके बाद वे कुछ वक्त के लिए चीन गए जहां उन्होंने China Telecom के साथ काम किया. फिर वे Lucent के एक प्रोजेक्ट के लिए जर्मनी गए जहां वे Lucent और भारत की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी Wipro के बीच मध्यस्थ रहे.

फिर वे भारत लौटे और उन्होंने मुकेश अंबानी की कंपनी Reliance Infocom को जॉइन कर लिया, जो बाद में अंबानी परिवार में बिजनेस के बंटवारे के चलते अनिल अंबानी की झोली में आ गई. यहां उन्होंने कंपनी के लिए दिल्ली में नेटवर्क सेटअप की जिम्मेदारी संभाली. तब CDMA (Code-division multiple access) का दौर हुआ करता था.

इसी दौरान, साल 2000 में सुनील ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पीएम ऑफिस में टेलीकॉम नेटवर्क का सेटअप किया.

बाद में वे Airtel और Indus Towers के साथ जुड़ गए. Indus Towers को देश की सबसे बड़ी मोबाइल टावर इंस्टालेशन कंपनी होने का खिताब हासिल है.

फरवरी, 2019 में सुनील ने Indus से इस्तीफा दिया और वे इसी सेक्टर में 3-4 महीने तक एक वेंचर के आइडिया पर काम करते रहे, लेकिन बात नहीं बनी.

JLN की शुरुआत

JLNPhenix Energey की शुरुआत के बारे में पूछने पर सुनील बताते हैं, "JLN हमारे घनिष्ठ पारिवारिक मित्र राजीव सेठ के दिमाग की उपज है. वे हॉन्गकॉन्ग में होते हैं. उनकी चीन के कुछ बिजनेसमैन से इस बारे में बात हुई कि कैसे लीथियम-आयन बैटरी के लिए भारत में बाजार बनाया जा सकता है. हमने सितंबर, 2019 में कंपनी की शुरुआत की. राजीव चीन से JLN की पूरी सप्लाई चेन और फाइनेंस की जिम्मेदारी रखते थे. मैं कंंपनी का पूरा बिजनेस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ऑपरेशंस संभाल रहा था."

लेकिन फिर कोविड महामारी और चीन के साथ भारत के भू-राजनैतिक विवादों का असर JLN के बिजनेस पर पड़ा. चीन के सप्लायर्स ने हाथ खींच लिए और राजीव और सुनील ने भी अपना रास्ता अलग कर लिया.

हालांकि, सुनील ने JLN को अकेले चलाने का निर्णय लिया.

JLNPhenix Energy, Noida

नोएडा (उत्तर प्रदेश) स्थित JLNPhenix Energy का बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और असेम्बलिंग प्लांट

JLN का बिजनेस मॉडल और फंडिंग

JLNPhenix एक बैटरी असेम्बलिंग कंपनी है. सुनील बताते हैं, "80 फीसदी मैटेरियल की सप्लाई चीन से होती है. हर कोई यही करता है. JLNPhenix Energy इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट्स और BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) के साथ आगे बढ़ते हुए ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशन मुहैया करती है."

सुनील अपने पास टू-व्हीलर सेगमेंट में 300 प्रकार की बैटरियां होने का दावा करते हैं.

लगभग 300 कर्मचारी कंपनी में काम करते हैं. इनमें लगभग आधे कर्मचारी फुल-टाइम कंपनी के पेरोल पर हैं और इतने ही थर्ड-पार्टी रिसॉर्सेज हैं. हैदराबाद में कंपनी का R&D सेंटर हैं.

सुनील बताते हैं, "बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को लेकर देश में अभी कोई सब्सिडी जैसी बात नहीं है. हालांकि सरकार ने सेल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए PLI (Production Linked Incentive) स्कीम लॉन्च की है."

सुनील ने पारिवारिक मित्रों से लोन लेकर कंपनी में निवेश किया है, न कि किसी आधिकारिक संस्था, बैंक या वेंचर कैपिटल फर्म से. वे 30-40 करोड़ रुपये का कैपेक्स निवेश बताते हैं.

फंडिंग के बारे में पूछने पर वे बताते हैं, "हमने कुछ कंसल्टिंग फर्म्स को हायर किया है. फंडिंग जुटाने के लिए निवेशकों के साथ शुरुआती स्तर की बातचीत जारी है."

क्या रही चुनौतियां?

JLN को खड़ा करने में सुनील को दो चुनौतियां का सामना करना पड़ा. वे बताते हैं, "पहली और सबसे बड़ी चुनौती रही — चीन से मैटेरियल और कंपोनेंट्स की सप्लाई. इसके बाद दूसरी चुनौती थी — कीमत पर नियंत्रण."

वे बताते हैं, "हमें Invest India के जरिए अच्छा समर्थन मिला है. कंपनी की शुरुआत करते ही 45 दिन के भीतर हमने प्रोडक्शन शुरू कर दिया. लाइसेंस और बाकी ज़रूरी पेपरवर्क समय पर पूरे हुए."

रेवेन्यू मॉडल

रेवेन्यू के बारे में पूछने पर सुनील कहते हैं, "हमारा रेवेन्यू मॉडल क्लीयर है. 80 फीसदी कोस्ट इंपोर्ट ऑफ मैटेरियल है. हमने पिछले वित्त वर्ष में 120 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया. इस साल हमारा लक्ष्य 200 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है. अभी तक हमने 100-110 करोड़ अर्जित कर लिए हैं."

भविष्य की योजनाएं

JLNPhenix हर सेगमेंट के लिए बैटरी बनाती है — साइकिल, स्कूटर, बाइक जैसे टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, फोर व्हीलर, ई-रिक्शा आदि सभी के लिए. सुनील बताते हैं, "हाल ही में हमने Mercedes के लिए बैटरी बनाई है. इसके अलावा हमने Tata Ace, Ashok Leyland DOST के लिए बैटरी बनाई है. हमने Hexall बस के लिए भी बैटरी बनाई है, जिसे हाल ही हुए ऑटो एक्सपो में पेश किया गया था. अभी हम ट्रक के लिए टिप्पर बैटरी बना रहे हैं. हम भविष्य के लिहाज से हर सेगमेंट में इनोवेट कर रहे हैं. हम एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में भी हैं. हम सोलर बैटरियां भी बनाते हैं और जनरेटर रिप्लेसमेंट सॉल्यूशंस, UPS पर भी काम कर रहे हैं. हम ट्रैक्शन एप्लीकेशंस पर भी काम कर रहे हैं."

Hero Electric, Kinetic, Godrej, Havells, Okaya, Lohia, Jubilant Foodworks, Suntech, C-Tech, Vahak, Surya International, Sonalika International, Escorts, Axle Energy, Joy, Jitendra, Om Balaji समेत कई नामचीन कंपनियां JLNPhenix के कस्टमर्स की लिस्ट में शुमार हैं.

सुनील बताते हैं, "ईवी बैटरी सेक्टर में JLNPhenix Energy वन-स्टॉप सॉल्यूशन कंपनी बनने की राह पर है. जिसकी भी गाड़ी बनानी है वे हमारे पास आ सकते हैं. हम बैटरी, मोटर, सेल आदि सभी चीजें मुहैया करेंगे. टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए अगली तिमाही में हमारी मोटर लॉन्च हो जाएगी. इसके अलावा हम एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस, बैटरी स्वैपिंग सॉल्यूशंस पर भी लगातार काम करते रहेंगे. हमने कोलकाता में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है."