SEBI की सख्ती पलटेगी IPO की तख्ती, IPO फाइलिंग के नियमों में बड़े बदलाव

दरअसल, सेबी को इस बात की जानकारी मिली थी कि कुछ संस्थागत और अमीर निवेशक (HNI) सिर्फ आईपीओ का सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के लिए उसमें बोली लगा रहे हैं. उनका उद्देश्य शेयरों में निवेश करना नहीं था. अब सेबी ने कड़ा रुख अपनाते हुए नियमों में बदलाव किए हैं.

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India - SEBI) ने सोमवार को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (Initial Public Offering - IPO) के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं. अब सिर्फ सब्सक्रिप्शन डेटा बढ़ाने के लिए आईपीओ में बोली लगाने के प्रैक्टिस पर रोक लग जाएगी. सिर्फ वही इनवेस्टर्स इश्यू में बोली लगा सकेंगे, जो कंपनी के शेयर वास्तव में खरीदना चाहते हैं.

सेबी का यह भी कहना है कि आईपीओ के एप्लिकेशन को तभी प्रॉसेस किया जाएगा, जब उसके लिए जरूरी फंड निवेशक के बैंक अकाउंट में होगा. 

SEBI का नया नियम आगामी 1 सितंबर से लागू होने जा रहा है. 

अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दरअसल, सेबी को इस बात की जानकारी मिली थी कि कुछ संस्थागत और अमीर निवेशक (HNI) सिर्फ आईपीओ का सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के लिए उसमें बोली लगा रहे हैं. उनका उद्देश्य शेयरों में निवेश करना नहीं था.  

सोमवार को जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कहा कि आईपीओ आवेदनों पर तभी कार्रवाई की जानी चाहिए, जब किसी निवेशक के बैंक खाते में सपोर्टिंग फंड हो.

सेबी ने एक सर्कुलर में कहा, "स्टॉक एक्सचेंज अपने इलेक्ट्रॉनिक बुक बिल्डिंग प्लेटफॉर्म में Application Supported by Blocked Amount (ASBA) एप्लिकेशन को केवल ब्लॉक किए गए एप्लिकेशन मनी पर अनिवार्य पुष्टि के साथ स्वीकार करेंगे."

सेबी ने कहा कि यह नियम रिटेल, योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB), गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) और अन्य आरक्षित श्रेणियों सहित सभी श्रेणियों के निवेशकों पर लागू होगा. 1 सितंबर को या उसके बाद खुलने वाले IPO को नए नियमों का पालन करना होगा. वर्तमान में, इन सभी श्रेणियों से ASBA के आधार पर पैसे की कटौती की जाती है, लेकिन व्यवहार में, QIB और NII या HNI श्रेणियों को बोली लगाने के लिए कुछ छूट दी जाती है.

सेबी ने पाया कि हाल के कुछ आईपीओ में कुछ आवेदनों को रद्द करना पड़ा क्योंकि बोलीदाताओं के पास उनके बैंक खातों में पर्याप्त धन नहीं था.

वर्तमान में, IPO के लिए ASBA फ्रेमवर्क द्वारा समर्थित एप्लिकेशन के माध्यम से की जाती है, जिसके तहत शेयरों के आवंटन के बाद ही पैसा निवेशक के बैंक खाते से निकलता है. पहले की व्यवस्था के तहत, आवेदन के समय पैसा काट लिया जाता था और शेयरों का आवंटन न होने की स्थिति में वापस किया जाता था.

वहीं, बाजार के खिलाड़ियों ने कहा कि सेबी का ताजा निर्देश IPO सब्सक्रिप्शन संख्या की अधिक सटीक तस्वीर देगा और केवल सही बोली लगाने वालों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

आपको बता दें कि दिसंबर, 2009 में SEBI ने QIB को छोड़कर दूसरी सभी श्रेणियों के निवेशकों के लिए आईपीओ में ASBA की सुविधा निर्धारित की थी. इसके बाद मई 2010 में सेबी ने QIB को भी यह सुविधा दे दी थी.