मिलें राजस्थान के उस ‘करोड़पति फकीर’ से, जिन्होने लड़कियों की शिक्षा के लिए कर दिया अपना सबकुछ दान

मिलें राजस्थान के उस ‘करोड़पति फकीर’ से, जिन्होने लड़कियों की शिक्षा के लिए कर दिया अपना सबकुछ दान

Monday January 31, 2022,

3 min Read

देश में लड़कियों की शिक्षा हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। आज भी देश के तमाम हिस्सों में बच्चों खासकर लड़कियों को बुनियादी शिक्षा तक उपलब्ध नहीं है, हालांकि इस स्थिति को बदलने के लिए तमाम समाजसेवी आगे आकर इस दिशा में सराहनीय काम कर रहे हैं और राजस्थान के ‘करोड़पति फकीर’ कहे जाने वाले इन शख्स की कहानी भी कुछ इसी तरह है।

95 साल के डॉ. घासीराम वर्मा बीते कई दशकों से लड़कियों की शिक्षा को लेकर बड़ा योगदान दे रहे हैं। लड़कियों की शिक्षा के उद्देश्य से अपना सब कुछ दान कर चुके डॉ. घासीराम वर्मा को लोग करोड़पति फकीर नाम से भी पहचानते हैं।

k

डॉ. वर्मा करीब 20 साल पहले रिटायर हुए थे और अब उन्हें उनकी पेंशन और उनके द्वारा किए गए निवेशों के जरिये उन्हें हर साल करीब 68 लाख रुपये मिलते हैं और वे उसमें से 50 लाख रुपये लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दान कर देते हैं।

हजारों लड़कियों को मिली शिक्षा

राजस्थान के झुंझनू के निवासी डॉ. घासीराम वर्मा एक गणितज्ञ हैं और उनके लगातार प्रयासों के चलते अब तक हजारों लड़कियों को शिक्षा हासिल हुई है, इतना ही नहीं उनके द्वारा दिये गए दान के जरिये तमाम स्कूलों की स्थापना और उनका संचालन भी किया जा रहा है। डॉ. वर्मा अब तक अपने क्षेत्र की लड़कियों की शिक्षा के लिए करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च चुके हैं।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए डॉ. घासीराम वर्मा ने बताया है कि वे अब तक पूरे राजस्थान में 28 हॉस्टल, 21 स्कूल और कॉलेज के साथ ही कई धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना और संचालन में मदद कर चुके हैं।  डॉ. वर्मा के अनुसार, जागरूक समाज के लिए शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और वे इसके लिए लगातार छात्रों की मदद कर रहे हैं।

अपनी शिक्षा के लिए किया था संघर्ष

डॉ. वर्मा फिलहाल अमेरिका में रहते हैं, हालांकि वे हर तीन महीने में अपने क्षेत्र के दौरे पर अमेरिका से भारत आते हैं और लड़कियों की शिक्षा के मिशन पर अपनी पेंशन के जरिये 50 लाख रुपये खर्च करते हैं। डॉ. वर्मा यह पैसा सीधे स्कूलों और कॉलेजों को भेजते हैं और उन स्कूलों और कॉलेजों द्वारा जरूरतमंद छात्रों का चयन किया जाता है और उन्हें मदद उपलब्ध कराई जाती है।

मीडिया को दी जानकारी के अनुसार, डॉ. वर्मा के परिवार के पास उनकी शिक्षा के लिए पैसे नहीं थे, ऐसे में उन्होने खुद स्कॉलरशिप की मदद से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। गणित में बेहद रुचि होने के चलते उन्होने इसी विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और बतौर शिक्षक काम करते हुए अपनी पीएचडी भी पूरी की।

साल 1958 उन्हें न्यूयॉर्क के रोड आइलैंड विश्वविद्यालय में बतौर गणित प्रोफेसर पढ़ाने का मौका मिला, जहां उन्हें तंख्वाह के रूप में तब 400 डॉलर मिलते थे। मालूम हो कि इस विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले डॉ. वर्मा पहले भारतीय थे।

दान कर देते हैं अपनी पेंशन

डॉ. वर्मा करीब 20 साल पहले रिटायर हुए थे और अब उन्हें उनकी पेंशन और उनके द्वारा किए गए निवेशों के जरिये उन्हें हर साल करीब 68 लाख रुपये मिलते हैं और वे उसमें से 50 लाख रुपये लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दान कर देते हैं।

साल 1981 में अपने क्षेत्र के दौरे पर आए डॉ. वर्मा ने जब शिक्षण संस्थानों के अभाव में लड़कियों की परेशानी देखी तो उन्होने एक छात्रावास के निर्माण से अपने इस मिशन की शुरुआत की, जो आगे चलकर एक परास्नातक कॉलेज में बदल गया। आज उस कॉलेज में 18 सौ से अधिक लड़कियां बेहद कम फीस के साथ पढ़ाई कर रही हैं, साथ ही अन्य कॉलेजों में लड़कियां उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई स्कॉलरशिप की मदद से पढ़ाई पूरी कर रही हैं।


Edited by Ranjana Tripathi