मेघालय की इस पूर्व स्कूल टीचर ने हल्दी की खेती से 800 से अधिक महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

By Anju Ann Mathew
June 21, 2021, Updated on : Mon Jun 21 2021 08:10:36 GMT+0000
मेघालय की इस पूर्व स्कूल टीचर ने हल्दी की खेती से 800 से अधिक महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
इस सप्ताह की #SustainabilityAgenda सीरीज में, हमारे साथ पद्म श्री पुरस्कार विजेता त्रिनिती साइऊ (Trinity Saioo) हैं, जो महिलाओं को लाकडोंग हल्दी को व्यवस्थित रूप से उगाने के लिए सशक्त बना रही हैं।
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"2020 में, त्रिनिती को स्थायी जैविक खेती विकसित करने और लगभग 800 ग्रामीण महिलाओं को जैविक खेती के तरीकों के माध्यम से हल्दी उगाने के लिए सफलतापूर्वक प्रशिक्षण देने में उनके काम के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।"

त्रिनिती साइऊ

त्रिनिती साइऊ

त्रिनिती साइऊ, एक पूर्व स्कूल टीचर और मेघालय में जयंतिया हिल जनजाति की सदस्य हैं। वह मेघालय के मसाले की एक विशेष किस्म लाकडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric) की खेती करके अपने राज्य में एक मूक क्रांति का नेतृत्व कर रही है। उत्तर-पूर्वी राज्य के मुलिह गांव की 53 वर्षीय महिला किसान हल्दी की इस किस्म की खेती करने वाले कई किसानों में से एक हैं।


2020 में, त्रिनिती को स्थायी जैविक खेती विकसित करने और लगभग 800 ग्रामीण महिलाओं को जैविक खेती के तरीकों के माध्यम से हल्दी उगाने के लिए सफलतापूर्वक प्रशिक्षण देने में उनके काम के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।


खेती में कदम रखने के बाद त्रिनिती ने महिला किसानों का एक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) भी बनाया। आज, लगभग 100 महिला स्वयं सहायता समूह हिल्स करक्यूमिन एंड स्पाइस प्रोड्यूसर सोसाइटी में हल्दी की खेती में उनके साथ सीधे काम करते हैं। हिल्स करक्यूमिन एंड स्पाइस प्रोड्यूसर सोसाइटी इस पहाड़ी राज्य में त्रिनिती द्वारा गठित एक एसोसिएशन है, जहां वह सहायक महासचिव के रूप में कार्य करती हैं।


त्रिनिती और स्वयं सहायता समूहों ने भारत के कई हिस्सों में लगभग 30 मीट्रिक टन लाकडोंग हल्दी का निर्यात भी किया है।

इसकी शुरुआत कैसे हुई?

त्रिनिती 2003 के आसपास के उस समय को याद करती है, जब भारतीय मसाला बोर्ड उनके गांव आया था। वह कहती हैं, "हालांकि, उन्हें (मसाला बोर्ड) लाकडोंग हल्दी और इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में पता था, लेकिन उन्हें खेती और इसकी उत्पादन प्रक्रिया के बारे में बहुत कम जानकारी थी।"


त्रिनिती YourStory को बताती हैं, "वे इसे एक सरकारी योजना के तहत लाने और लाकडोंग हल्दी उगाने की सफल खेती के लिए अनुदान देने के अवसर के रूप में देखना चाहते थे।"


हालांकि त्रिनिती किसानों के परिवार से आती हैं, लेकिन जब बोर्ड उनके पास आया, तभी उन्हें हल्दी की इस किस्म के मूल्य का एहसास हुआ और उन्होंने इसके औषधीय गुणों की मांग को समझा।

लाकाडोंग हल्दी की सफाई करती महिला किसान

लाकडोंग हल्दी की सफाई करती महिला किसान

बोर्ड ने उनके अलावा मुलिह गांव के सात अन्य लोगों के साथ तीन साल की सब्सिडी योजना के तहत उनका नाम दर्ज किया, जिसे हर साल रिन्यू यानी नवीनीकृत करना अनिवार्य था।


पेशे से एक शिक्षिका होने के नाते, वह फर्राटेदार अंग्रेजी और हिंदी दोनों बोल सकती थीं, जो उनके लिए सब्सिडी योजना को सुविधाजनक बनाने के मामले में सरकारी अधिकारियों से निपटने के लिए किसी बोनस से कम नहीं था।


इसके बाद त्रिनिती ने क्षमता बढ़ाने और हल्दी की जैविक खेती के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए आस-पास के गांवों का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त आय कमाने और कौशल विकास की दिशा में काम करने के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों के विकल्प के रूप में महिलाओं को प्रशिक्षित करने की पेशकश की।

मिशन लाकडोंग

वह बताती हैं, "महिलाओं के नेतृत्व वाली कृषि पद्धतियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के एक मजबूत नेटवर्क के साथ, मैंने राज्य में इन समूहों के नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए मौजूदा योजनाओं और नीतियों के कार्यान्वयन का लाभ उठाने पर जोर दिया है।"


आज, एसएचजी का प्रत्येक सदस्य विभिन्न परियोजनाओं के तहत स्वीकृत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त योगदान दे रहा है। शुरुआत से ही सदस्यों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।


त्रिनिती द्वारा गठित सोसायटी में लगभग 25 कोर सदस्य हैं, जो सरकारी डेटाबेस में पंजीकृत हैं, और इसमें 800 से अधिक सदस्यों के साथ लस्कियन ब्लॉक के किसान हैं।

लाकडोंग हल्दी उगाने वाले बागवानी क्षेत्र में त्रिनिती

लाकडोंग हल्दी उगाने वाले बागवानी क्षेत्र में त्रिनिती

वह कहती हैं, “सोसायटी के तहत, हमने मिशन लाकडोंग के विजन के साथ शुरुआत की है। हमने हल्दी के उत्पादन और निष्कर्षण प्रक्रिया के लिए मशीनों की खरीद की और हम अपने परिचालन क्षेत्रों में लाकडोंग उगाने के लिए किसानों को पैसा भी प्रदान करते हैं।”


बोर्ड की मदद से, त्रिनिती महिलाओं के लिए कई लाकडोंग पौध प्राप्त करने में सक्षम हुई हैं। इसके बाद वह उन्हें सिखाती हैं कि कैसे इन पौधों को जैविक रूप से उगाया जाए और रासायनिक विकल्पों के सुरक्षित विकल्पों के साथ कीट के संक्रमण को दूर किया जाए।


इसके बाद फिर जो भी उपज होती है उसे त्रिनिती द्वारा स्थापित प्रसंस्करण इकाई में ले जाया जाता है, जिसमें छोटी पीसने वाली मशीनें होती हैं।


वह बताती हैं, “हम स्थानीय किसानों से कच्चे उत्पाद एकत्र करते हैं, और मैं और मेरे वर्कर्स हल्दी को साफ करते हैं। चूंकि हमारे पास लास्कियन ब्लॉक में लगभग 86 गांव हैं, इसलिए मैंने किसानों से कृषि उत्पाद प्राप्त करने के लिए स्थानीय कलेक्टरों को नियुक्त किया है।”


मुख्य टीम में करीब दस किसान नेता हैं जो उनके मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं। इसमें प्रोजेक्ट ऑफिसर और स्टाफ भी हैं, क्योंकि कृषि और बागवानी विभाग के माध्यम से कई परियोजनाएं आती हैं।

प्रभाव

त्रिनिती ने अपने गांव में लाकडोंग फार्मिंग के साथ 800 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया है, और लगभग 100 महिला एसएचजी सीधे उनके अधीन काम करते हैं। त्रिनिती लाकडोंग हल्दी के निर्यात के अलावा करीब तीन मीट्रिक टन सूखे अदरक का निर्यात करने की भी तैयारी कर रही है।


वह कहती हैं, "मुझे खुशी है कि मैं जिला और संबंधित विभाग के अधिकारियों के सहयोग से जो कुछ भी कर रही हूं, उससे मैं ग्रामीण महिला किसानों को जीवित रहने का रास्ता प्रदान करने में सक्षम हूं। यहां तक कि अगर मेरे पास पैसों की कमी होती है, तो भी मैं यह सुनिश्चित करती हूं कि इन महिलाओं को समय पर भुगतान किया जाए।”

त्रिनिती की पहल के माध्यम से 800 से अधिक महिलाओं को बढ़ी हुई आय के साथ सशक्त बनाया गया है

त्रिनिती की पहल के माध्यम से 800 से अधिक महिलाओं को बढ़ी हुई आय के साथ सशक्त बनाया गया है

संचालन के संदर्भ में, त्रिनिती मुख्य रूप से पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के मुलिह गांव और लास्कियन ब्लॉक पर केंद्रित हैं। लेकिन वह हिल फार्मर्स यूनियन के सहयोग से पूरे मेघालय में अपने अभियान का विस्तार करने की कोशिश कर रही हैं, जहां वह खुद एक सक्रिय सदस्य है।


किसानों से कच्ची हल्दी खरीदने की अनुमानित लागत लगभग 50 लाख रुपये प्रति वर्ष है। त्रिनिती का कहना है कि कभी-कभी वह उन खरीदारों या कंपनियों का भी सपोर्ट लेती हैं जो थोक ऑर्डर के लिए उनसे संपर्क करते हैं।


लेकिन इसके अलावा, त्रिनिती को उनकी पहल के लिए कोई अतिरिक्त इन्वेस्टमेंट या फंड नहीं मिला है। मुख्य सपोर्ट स्पाइसेस बोर्ड यानी मसाला बोर्ड से मिला, जिसने उन्हें इस किस्म को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

एक राष्ट्रीय पहचान

2020 में, त्रिनिती ने मेघालय में महिला किसानों की आय बढ़ाने के अपने प्रयासों के लिए पद्म श्री पुरस्कार जीता। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें 'अनसंग हीरो' भी कहा था। उन्हें एनुअल बालीपारा फाउंडेशन अवार्ड्स, 2020 के दौरान बालीपारा फाउंडेशन द्वारा उनके काम के लिए सम्मानित किया गया था। त्रिनिती का कहना है कि महामारी ने उनके काम को प्रभावित नहीं किया है।


वह कहती हैं, “जैसा कि हम ग्रामीण क्षेत्र में हैं, इसलिए महामारी का प्रभाव यहां ज्यादा नहीं है। मेरे गांव से एक भी कोविड पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है।”


लॉकडाउन के बावजूद, सोसायटी 2020 से 16 मीट्रिक टन लाकडोंग हल्दी का उत्पादन करने में कामयाब रही। हर दिन, लगभग 20 वर्कर्स उसकी युनिट में प्रोसेसिंग के काम में लगे रहते हैं।


हालांकि, अब सबसे बड़ी चुनौती इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचने के लिए अपनी मार्केट रेंज बढ़ाने की भी है, इसके अलावा, इस हल्दी के उच्च औषधीय मूल्य के कारण लाकडोंग किस्म को विकसित करने के लिए प्रत्येक किसान को शामिल करना और प्रोत्साहित करना भी एक चुनौती है।


वह कहती हैं, “मुझे नहीं पता कि इस उच्च औषधीय मूल्यवान हल्दी को दुनिया के सामने कैसे प्रचारित किया जाए। लेकिन संबद्ध नेटवर्क और भागीदारों के साथ, मुझे लगता है कि इसे हासिल किया जा सकता है।”

आगे का रास्ता

वह कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि लाकडोंग हल्दी एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार तैयार करे ताकि किसानों को एक ही समय में लाभ और मान्यता मिल सके। मैं यह भी चाहती हूं कि उत्पाद बाजार में बहुत ही उचित मूल्य पर बेचे जाएं।”


आने वाले वर्षों में, त्रिनिती लाकडोंग किस्म की खेती के ज्ञान और परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना चाहती है।


वह कहती हैं, "यह मेरे समुदाय के सदस्यों द्वारा सामना की जाने वाली आर्थिक समस्याओं का एक समाधान है। मैं महिलाओं से इसे एक अतिरिक्त आय स्रोत के रूप में लेने का आग्रह करती हूं जो सामाजिक-आर्थिक विकास और उनके समुदाय के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करेगा।" 


Edited by Ranjana Tripathi