पिछले साल देशभर में बंद हो गए 20 हजार से अधिक स्कूल, शिक्षकों की संख्या में भी आई गिरावट

By yourstory हिन्दी
November 04, 2022, Updated on : Fri Nov 04 2022 09:30:34 GMT+0000
पिछले साल देशभर में बंद हो गए 20 हजार से अधिक स्कूल, शिक्षकों की संख्या में भी आई गिरावट
भारत में स्कूली शिक्षा के लिये एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई-प्लस) की 2021-22 की बृहस्पतिवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2021-22 में स्कूलों की कुल संख्या 14.89 लाख है जबकि 2020-21 में इनकी संख्या 15.09 लाख थी.
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देशभर में 2020-21 के दौरान 20,000 से अधिक स्कूल बंद हो गए, जबकि शिक्षकों की संख्या में भी पिछले वर्ष की तुलना में 1.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. शिक्षा मंत्रालय की एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई.


भारत में स्कूली शिक्षा के लिये एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई-प्लस) की 2021-22 की बृहस्पतिवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2021-22 में स्कूलों की कुल संख्या 14.89 लाख है जबकि 2020-21 में इनकी संख्या 15.09 लाख थी. स्कूलों की संख्या में गिरावट मुख्य रूप से निजी और अन्य प्रबंधन के तहत आने वाले विद्यालयों के बंद होने के कारण है.”

कोविड-19 का प्रभाव

नामांकन पर कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव का विवरण देते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है, “कोविड का प्रभाव हालांकि सभी पर पड़ा है, यह विशेष रूप से पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं जैसे छोटे और संवेदनशील बच्चों के नामांकन में देखा गया है. इस गिरावट की वजह कोविड-19 के कारण दाखिलों को स्थगित रखा जाना हो सकता है.”


रिपोर्ट में कहा गया कि 2021-22 में प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक तक स्कूलों में कुल 25.57 करोड़ छात्रों का नामांकन हुआ जबकि वर्ष 2020-21 में 25.38 करोड़ छात्रों ने नामांकन कराया था. इसमें कहा गया कि इस तरह नामांकन कराने वाले छात्रों की संख्या में 19.36 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई.


रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 की तुलना में 2021-22 में शिक्षकों की कुल संख्या में भी 1.95 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसमें कहा गया है कि 2021-22 में शिक्षकों की कुल संख्या 95.07 लाख थी, जो 2020-21 में 97.87 लाख थी.

27 फीसदी स्कूलों में ही विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए शौचालय

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि सिर्फ 44.85 प्रतिशत विद्यालयों में कंप्यूटर सुविधा है जबकि करीब 34 प्रतिशत में इंटरनेट कनेक्शन है.


इसमें कहा गया कि सिर्फ 27 प्रतिशत विद्यालयों में ही विशेष जरूरत वाले बच्चों (सीएसडब्ल्यूएन) के लिये शौचालय है और उनमें से 49 प्रतिशत में रैंप और उसपर चढ़ने के लिये सहारा देने की सुविधा बनाई गई है.


पिछले वर्ष की तुलना में 2021-22 के दौरान शिक्षकों की कमी सरकारी स्कूलों में 0.9 प्रतिशत, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 1.45 प्रतिशत, निजी स्कूलों में 2.94 प्रतिशत और अन्य स्कूलों में 8.3 प्रतिशत थी.


यूडीआईएसई-प्लस 2021-22 में, डिजिटल लाइब्रेरी, पीयर लर्निंग, हार्ड स्पॉट आइडेंटिफिकेशन, स्कूल लाइब्रेरी में उपलब्ध किताबों की संख्या आदि जैसे महत्वपूर्ण संकेतकों पर अतिरिक्त डेटा पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की पहल के साथ जोड़ने करने के लिए एकत्र किया गया है.


Edited by Vishal Jaiswal