NDTV पर अडानी के टेकओवर का रास्ता साफ, प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने कंपनी के बोर्ड से दिया इस्तीफा

By Vishal Jaiswal
November 30, 2022, Updated on : Wed Nov 30 2022 06:58:18 GMT+0000
NDTV पर अडानी के टेकओवर का रास्ता साफ, प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने कंपनी के बोर्ड से दिया इस्तीफा
अडाणी समूह अब समाचार चैनल NDTV कंपनी के अधिग्रहण के करीब है. अडाणी समह ने आरआरपीआर का अधिग्रहण किया था. आरआरपीआर की एनडीटीवी में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
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नई दिल्ली टेलीविजन लि. (NDTV) के संस्थापक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय ने प्रवर्तक समूह की इकाई आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है. अडाणी समूह अब इस समाचार चैनल कंपनी के अधिग्रहण के करीब है.

अडाणी समह ने आरआरपीआर का अधिग्रहण किया था. आरआरपीआर की एनडीटीवी में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है.


हालांकि, रॉय दंपति के पास प्रवर्तक के रूप में एनडीटीवी में अब भी 32.26 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और उन्होंने समाचार चैनल के निदेशक मंडल से इस्तीफा नहीं दिया है. प्रणय रॉय एनडीटीवी के चेयरपर्सन तथा राधिका रॉय कार्यकारी निदेशक हैं.


एनडीटीवी ने कहा कि आरआरपीआर होल्डिंग के निदेशक मंडल ने सुदिप्त भट्टाचार्य, संजय पुगलिया और सेंतिल चेंगलवारायण की बोर्ड में तत्काल प्रभाव से नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. सोमवार को अडानी ग्रुप ने आरआरपीआर होल्डिंग्स का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया और इसके साथ ही उसने तीनों सदस्यों को नामित किया.


प्रमोटर ग्रुप आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड (RRPRH) ने एनडीटीवी को बताया कि आज यानी 29 नवंबर, 2022 को हुई बैठक में निदेशक मंडल ने सुदीप्त भट्टाचार्य, संजय पुगलिया, और सेंथिल सिन्नैया चेंगलवारायण की तत्काल प्रभाव से आरआरपीआरएच के निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. फाइलिंग में कहा गया है कि आरआरपीआरएच के बोर्ड में निदेशक के रूप में प्रणय रॉय और श्रीमती राधिका रॉय का इस्तीफा, 29 नवंबर, 2022 के कारोबारी घंटों के बंद होने से प्रभावी होगा.

अडानी ने ऐसे हासिल की NDTV में हिस्सेदारी

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) गौतम अडानी की कंपनी है और एएमजी मीडिया नेटवर्क्स लिमिटेड (AMNL) इसी की मीडिया कंपनी है. इस साल अगस्त में अडानी एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी कंपनी अडानी मीडिया नेटवर्क्स ने वीपीसीएल का अधिग्रहण कर लिया. वीपीसीएल का मालिकाना हक इससे पहले एमिनेंट नेटवर्क्स एंड नेक्स्टवेव टेलिवेंचर्स के पास था.


वीपीसीएल के पास एनडीटीवी की होल्डिंग कंपनी आरआरपीआर के कन्वर्टिबल डिबेंचर्स थे, जिसे कंपनी ने लोन के बदले जारी किया था. कन्वर्टिबल डिबेंचर्स ऐसे वॉरंट होते हैं, जिनसे डेट यानी कर्ज को इक्विटी में बदला जा सकता है.


ये डिबेंचर्स 2009-10 में 404 करोड़ रुपये के लोन के बदले लिए गए थे. वीपीसीएल ने इन डिबेंचर्स को ही इक्विटी में बदल दिया. इसका मतलब है कि कर्ज न चुका पाने की स्थिति में एनडीटीवी के संस्थापकों ने कंपनी को मीडिया समूह में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की इजाजत दी थी. वीपीसीएल ने आरआरपीआर में 99.50 फीसदी हिस्सेदारी को कंट्रोल करने के अधिकार का इस्तेमाल किया है.

शेयरधारकों के 26 फीसदी शेयर खरीदने के करीब अडानी ग्रुप

अडाणी समूह के हाथों अधिग्रहण के बाद वीसीपीएल ने 17 अक्टूबर को ऐलान किया था कि वह एनडीटीवी के अल्पांश शेयरधारकों से अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए खुली पेशकश लाएगी. वीसीपीएल के साथ एएमजी मीडिया नेटवर्क्स और अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड यह 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेंगे.


विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) ने एएमजी मीडिया नेटवर्क्स (AMG Media Networks) और अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd) के साथ 294 रुपये प्रति शेयर की ऑफर प्राइस पर अतिरिक्त 26 फीसदी या 1.67 करोड़ इक्विटी शेयर हासिल करने का प्रस्ताव रखा है. यह ऑफर पूरी तरह सब्सक्राइब हो जाता है तो इसकी कुल कीमत 492.81 करोड़ रुपये हो जाएगी.

ओपन ऑफर 22 नवंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है और यह 5 दिसंबर को बंद होगा. 28 नवंबर तक 53 लाख शेयरधारकों ने अपने शेयर अडानी ग्रुप को बेचने की इच्छा जाहिर की थी. कॉरपोरेट निवेशकों की श्रेणी ने सबसे अधिक 39 लाख शेयरों की पेशकश की है, जबकि खुदरा निवेशकों ने 7,06,000 से कुछ अधिक शेयरों को बेचने की पेशकश की है.

क्या होता है ओपन ऑफर?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) के अनुसार वह कंपनी ओपन ऑफर ला सकती है जो किसी दूसरी कंपनी के शेयरों का अधिग्रहण कर रही हो. जब अधिग्रहण करने वाली कंपनी टारगेट कंपनी के शेयरहोल्डर्स को एक तय भाव पर शेयर बेचने का ऑफर देती है, तो उसे ओपन ऑफर कहा जाता है. देखा जाए तो एक ओपन ऑफर के जरिए कंपनी दूसरी कंपनी के शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर बेचकर कंपनी से बाहर निकलने का मौका देती है.

भारत में प्रेस फ्रीडम को लेकर उठ रहे सवाल

NDTV के अधिग्रहण के प्रयासों ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंता पैदा कर दी है. इसका कारण है कि NDTV को भारत की केंद्र सरकार के आलोचक मीडिया संस्थानों में से एक में देखा जाता है.


अडानी ने इस महीने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि वह एनडीटीवी को एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह बनाने का इरादा रखते हैं और उन्होंने रॉय को अध्यक्ष बने रहने के लिए कहा है. अडानी की मीडिया कंपनी ने इसी साल बिज़नेस न्यूज़ प्लेटफॉर्म ब्लूमबर्ग क्विंट को भी खरीद लिया था.