शिक्षण-अध्ययन प्रक्रिया को लगातार पुन:परिभाषित करते रहने की आवश्यकता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

By Ranjana Tripathi
September 07, 2021, Updated on : Tue Sep 07 2021 13:28:40 GMT+0000
शिक्षण-अध्ययन प्रक्रिया को लगातार पुन:परिभाषित करते रहने की आवश्यकता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

प्रधानमंत्री ने ‘‘शिक्षक पर्व’’ के पहले सम्‍मेलन के दौरान कई तकनीकों और पहल की डिजिटल माध्यम से शुरूआत करने के बाद अपने संबोधन में यह बात कही और विश्वास जताया कि यह योजनाएं भविष्य के भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

क

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना संबोधन देते हुए (फोटो साभार: Narendramodi.in)

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत के शिक्षक दुनिया के हर कोने में अपनी छाप छोड़ते हैं, लिहाजा शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं और इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षण-अध्ययन प्रक्रिया को लगातार पुन:परिभाषित और पुनर्रचना करते रहने की आवश्यकता है।


प्रधानमंत्री ने ‘‘शिक्षक पर्व’’ के पहले सम्‍मेलन के दौरान कई तकनीकों और पहल की डिजिटल माध्यम से शुरूआत करने के बाद अपने संबोधन में यह बात कही और विश्वास जताया कि यह योजनाएं भविष्य के भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


इस अवसर पर उन्‍होंने दृश्‍य-श्रव्‍य बाधित लोगों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा कोष और ऑडियो पुस्‍तक का विमोचन भी किया। उन्हेंने केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड की स्‍कूल गुणवत्‍ता आश्‍वासन और आकलन रूपरेखा भी जारी की और साथ ही निपुण भारत के लिए निष्‍ठा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विद्यांजलि पोर्टल भी शुरू किए।


यह पोर्टल शिक्षा क्षेत्र के स्‍वयंसेवकों, दानदाताओं और कारपोरेट सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व - सीएसआर योगदान करने वालों की सुविधा बढा़एगा। प्रधानमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत के शिक्षक दुनिया में जहां भी कहीं जाते हैं वह अपनी एक अलग छाप छोड़ते हैं और इस वजह से आज भारत के युवाओं के लिए दुनिया में अपार संभावनाएं भी हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘हमें आधुनिक शिक्षा तंत्र के हिसाब से खुद को तैयार करना है और इन संभावनाओं को अवसरों में बदलना भी है। इसके लिए हमें लगातार नवप्रर्वतन करते रहना होगा। हमें शिक्षण-अध्ययन को लगातार पुन:परिभाषित और पुनर्रचना करते रहना होगा। जो भावना अभी तक दिखाई गई है उसे हमें अब और ऊंचाई देनी होगी और हौसला देना होगा।’’ 


प्रधानमंत्री ने कहा कि आज शुरू की गई विभिन्‍न तकनीकों और पहल से शिक्षा क्षेत्र का भविष्‍य उन्‍नत होगा। ऐसी ही एक पहल स्‍कूल गुणवत्‍ता आश्‍वासन और आकलन रूपरेखा से न केवल शिक्षा में प्रतिस्‍पर्धा बढेगी बल्कि यह विद्यार्थियों को भविष्‍य के लिए तैयार भी करेगी।


उन्होंने कहा, ‘‘आज शिक्षक पर्व पर अनेक नई परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ है। यह पहल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि देश अभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आजादी के 100वें वर्ष में भारत कैसा होगा, इसके लिए देश आज नए संकल्प ले रहा है। आज जो योजनाएं शुरु हुई हैं, वह भविष्य के भारत को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगी।’’ 


इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ‘‘भविष्य की नीति’’ बताया और इसे नये स्तर तक ले जाने के लिए जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ नीति ही नहीं, बल्कि सहभागिता आधारित है और इसके निर्माण से लेकर इसके क्रियान्वयन के हर स्तर पर देश के शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है।


उन्होंने कहा, ‘‘अब हमें इस भागीदारी को एक नए स्तर तक लेकर जाना है, हमें इसमें समाज को भी जोड़ना है। जब समाज मिलकर कुछ करता है तो इच्छित परिणाम अवश्य मिलते हैं। और आपने ये देखा है कि बीते कुछ वर्षों में जनभागीदारी अब फिर भारत का राष्ट्रीय चरित्र बनता जा रहा है।’’ 


स्वच्छता अभियान, उज्ज्वला योजना, डिजिटल लेन-देन जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह-सात वर्षों में जनभागीदारी की ताकत से भारत में ऐसे-ऐसे कार्य हुए हैं, जिनकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।


प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के विभिन्न माध्यमों का उपयोग करते हुए भारत की शिक्षा व्यवस्था ने दुनिया को अपनी सामर्थ्य दिखायी है। उन्होंने कहा, ‘‘इन मुश्किल परिस्थितियों में हमने जो सीखा है, उन्हें अब आगे बढ़ाने का समय है।’’ 


उन्होंने कार्यक्रम में शामिल छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय बाद स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना और क्लास में पढ़ाई करने का आनंद ही कुछ और है। साथ ही उन्होंने सभी को सचेत किया कि उत्साह के साथ-साथ उन्हें कोरोना नियमों का पालन भी पूरी कड़ाई से करना है। तोक्यो ओलम्पिक और पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा इनसे बहुत प्रेरित हुए हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इन खिलाड़ियों से अनुरोध किया है कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर हर खिलाड़ी कम से कम 75 स्कूलों में जाये। मुझे खुशी है कि इन खिलाड़ियों ने मेरी बात को स्वीकार किया है।’’ 


कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी, राजकुमार रंजन सिंह और सुभाष सरकार भी उपस्थित थे।

Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close