मणिपुर की इस इकलौती महिला ऑटो ड्राइवर ने कोरोना रिकवर नर्स को 8 घंटे का सफर तय कर पहुँचाया घर, सीएम ने दिया 1 लाख रुपये का इनाम

मणिपुर की इस इकलौती महिला ऑटो ड्राइवर ने कोरोना रिकवर नर्स को 8 घंटे का सफर तय कर पहुँचाया घर, सीएम ने दिया 1 लाख रुपये का इनाम

Wednesday June 17, 2020,

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मणिपुर की एकमात्र महिला ऑटोरिक्शा ड्राइवर लैबी ओइनम, जिन्होंने कोविड-19 से रिकवर एक नर्स को म्यांमार की सीमा से लगे इम्फाल के कामगाँव जिले में उनके घर पहुँचाया।


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फोटो साभार: Twitter/NBirenSingh


लैबी ने कहा कि यह पैसे कमाने की बात नहीं थी बल्कि दया की भावना थी जिसने मुझे इस युवा नर्स को उनके घर तक पहुँचाने के लिए रात में पहाड़ियों में लंबी दूरी तय करने का हौसला दिया।


नर्स सोमीचोन ने कोलकाता से लौटने के तुरंत बाद सकारात्मक परीक्षण किया था, जहां वह कार्यरत थी। उसका इम्फाल के एक अस्पताल में इलाज किया गया और 31 मई को उसे छुट्टी दे दी गई। वह घर जाना चाहती थी लेकिन टैक्सी चालक उसे घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।


तब लैबी ओइनम ने अपने पति ओनाम राजेंद्रो सिंह को बुलाया, जो मधुमेह के रोगी हैं, और नर्स की दुर्दशा पर चर्चा की। सिंह ने कहा कि एक निर्णय लिया गया था कि वे दोनों उसे अपने घर पर छोड़ देंगे।


एक स्थानीय लोकल न्यूज़ पेपर के अनुसार नर्स ने बताया,

“मेरे पिता और मेरे चाचा ने कई कैब ड्राइवरों से संपर्क किया था, लेकिन वे पहाड़ियों में इतनी लंबी दूरी तय करने के लिए तैयार नहीं थे और वह भी रात में। कुछ लोग डरते थे जबकि मैं बीमारी से उबर चुकी थी। आखिरकार यह महिला आगे आई। हम शाम 6 बजे निकले और 1 जून को लगभग 2:30 बजे 170 किमी दूर कामजोंग शहर पहुंचे।”


मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बीते गुरुवार को उन्हें 1.10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया।


सीएम ने ट्वीट किया,

"खुशी और सम्मान के साथ, 1 लाख 10 हजार रुपये का नकद इनाम, पांगी की एक ऑटो चालक, श्रीमती लैबी ओइनम को, जिन्होंने 31 मई की मध्यरात्रि को कामजोंग के लिए 8 घंटे की यात्रा को कवर की।"

आपको बता दें कि लैबी ओइनम के दो बेटे हैं, दोनों कॉलेज के छात्र हैं, और वह परिवार का समर्थन करते हैं। 2015 में लैबी के जीवन पर आधारित शॉर्ट-फिल्म "ऑटो ड्राइवर" ने कई पुरस्कार जीते थे। मीना लोंजाम द्वारा निर्देशित यह शॉर्ट-फिल्म महिलाओं के लिए एक गैर-पारंपरिक पेशे में उनके जीवन को बताती है।



Edited by रविकांत पारीक