रविशंकर प्रसाद का अदालतों से अनुरोध, सुनिश्चित करें कि मृत्युदंड पाए अपराधी व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं करे

रविशंकर प्रसाद का अदालतों से अनुरोध, सुनिश्चित करें कि मृत्युदंड पाए अपराधी व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं करे

Sunday December 22, 2019,

2 min Read

रविशंकर प्रसाद बोले; महिलाओं, बच्चों से जुड़े मामलों की जल्द जांच व सुनवाई करें सुनिश्चित

क

फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया

विधि एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को सभी अदालतों से अनुरोध किया कि वे सुनिश्चित करें कि मौत की सजा पाया कोई व्यक्ति आदेश के अनुपालन में देरी के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं कर सके। उन्होंने आरोपियों और अपराध के पीड़ित के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने पर भी जोर दिया।


उद्योग परिसंघ फिक्की के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रसाद ने कहा,

‘‘आरोपी का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन अपराध के पीड़ित के अधिकार का क्या? हमें दोनों में संतुलन बनाने की जरूरत है। इसलिए मैं न्यायपालिका से पूरे सम्मान के साथ मांग करता हूं कि वह सुनिश्चित करें कि जिन लोगों को मौत की सजा दी गई है वे लंबे समय तक सजा को टालने के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं कर सके क्योंकि समाज भी चाहता है कि उन्हें सजा दी जाए।’’





प्रसाद की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब निर्भया सामूहिक दुष्कर्म की के दोषी मौत की सजा से राहत के लिए विभिन्न मंचों पर गुहार लगा रहे हैं।


विधि मंत्री ने कहा,

‘‘पोक्सो और दुष्कर्म कानून के तहत अपराधों की सुनवाई करने के लिए 1,023 त्वरित अदालतें स्थापित की जा रही हैं।’’


उन्होंने कहा,

‘‘केंद्र और राज्यों के बीच 400 ऐसी अदालतें गठित करने पर पहले ही सहमति बन गई है और इनमें से 160 अदालतें काम करने भी लगी हैं। शेष जल्द ही काम करने लगेंगी।’’


आपको बता दें कि इससे पहले मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अलग-अलग पत्र लिखकर कहा था कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और संरक्षा राष्ट्रीय चिंता का विषय है। ऐसे में इनसे जुड़े सभी आपराधिक मामलों की दो महीने के भीतर जांच कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से भी महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में कराने और छह महीने के भीतर इसका पूरा होना सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है।


गौरतलब है कि साल 2018 में पारित आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक में जांच और सुनवाई के लिए समय सीमाएं दी गई हैं।



(Edited by रविकांत पारीक )