निर्भया कांड के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज की, दोषियों के सभी कानूनी विकल्प हुए समाप्त

निर्भया कांड के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज की, दोषियों के सभी कानूनी विकल्प हुए समाप्त

Saturday January 18, 2020,

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों में से एक मुकेश सिंह की दया याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और गृहमंत्रालय ने इसकी जानकारी दिल्ली सरकार को दे दी है। इसके साथ ही दोषियों के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं।


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फोटो क्रेडिट: Amar Ujala



नई दिल्ली, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों में से एक मुकेश सिंह की दया याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और गृहमंत्रालय ने इसकी जानकारी दिल्ली सरकार को दे दी है। इसके साथ ही दोषियों के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं।


अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली की अदालत ने इस बीच नया मृत्यु वारंट जारी किया है जिसके मुताबिक अब एक फरवरी की सुबह छह बजे सभी चारों दोषियों को फांसी दी जाएगी।


उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार देर रात दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसे खारिज कर दिया।


राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज किए जाने के बाद गृह मंत्रालय ने इसे दिल्ली सरकार (तिहाड़ जेल,जहां पर चारों दोषियों को रखा गया है और यह दिल्ली सरकार के अधीन आता है।) को भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि याचिका दिल्ली सरकार को भेजी गई ताकि वह जेल प्रशासन को इससे अवगत कराए।


दया याचिका खारिज होने की खबर मिलने के बाद निर्भया के पिता ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा,

‘‘यह बहुत अच्छी बात है। जब हमने ‘फांसी देने में देरी हो सकती है’ वाली खबर सुनी तो हमारी सारी उम्मीदें धूमिल पड़ गई थीं।’’


उन्होंने कहा,

‘‘हम खुश हैं कि उन्हें फांसी देने की संभावना बढ़ गई है। दया याचिका दायर करने के बाद हम आश्वस्त थे कि वह खारिज हो जाएगी।’’


मुकेश सिंह ने दो दिन पहले दया याचिका दायर की थी।





उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय निर्भया के साथ दक्षिण दिल्ली में चलती बस में दुष्कर्म करने के साथ ही उसके साथ बेहद बर्बर व्यवहार किया गया था। इसके बाद हमलावर उसे सड़क किनारे फेंक गए थे । बाद में सिंगापुर के अस्पताल में उसकी मौत हो गई।


निर्भया के साथ की गई बर्बरता ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था और उसके बाद बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शन के बाद दुष्कर्म कानून में बदलाव किए गए।


मामले में छह लोगों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह, पवन गुप्ता, राम सिंह और एक नाबालिग का नाम आया। मार्च 2013 में पांच वयस्क आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई शुरू हुई।


सुनवाई के शुरुआत में ही मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सबसे अधिक बर्बरता करने वाले नाबालिग को तीन साल के लिए सुधार गृह में भेजा गया। सजा पूरी होने पर नाबालिग को वर्ष 2015 में जान के संभावित खतरे के मद्देनजर अज्ञात स्थान पर भेजा गया, जब उसे रिहा किया गया तब उसकी उम्र 20 साल थी।


सितंबर 2013 में मुकेश, विनय, अक्षय और पवन को अदालत ने दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई।


दिल्ली की एक अदालत ने सात जनवरी को मृत्यु वारंट जारी करते हुए कहा था कि चारों दोषियों - मुकेश सिंह(32), विनय शर्मा (26), अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन गुप्ता (25) को 22 जनवरी की सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी।


हालांकि, दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय को सुनवाई के दौरान बताया कि दोषियों को निर्धारित तारीख पर फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि एक दोषी मुकेश की दया याचिका लंबित है।


गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार सुबह कहा,

‘‘गृह मंत्रालय ने मुकेश सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेज दी है। मंत्रालय ने इसे खारिज करने की दिल्ली के उप राज्यपाल की सिफारिश को दोहराया है।’’


दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय ने मुकेश सिंह की दया याचिका गुरूवार को गृह मंत्रालय के पास भेजी थी। इससे पहले दिल्ली सरकार ने दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश की थी।