मुनाफे का कोराबर है महिलाओं की हेयर कटिंग, कम पैसे में ज्यादा कमाई

आज, जबकि पूरा खुदरा जगत बाजार में हर स्त्री से ही कुछ न कुछ कमाई कर रहा है, ऐसे वक्त में किसी महिला के लिए हेयर कटिंग के हुनर का फायदा उठाने में हर्ज क्या हो सकता है। अब तो सरकार भी यह काम शुरू करने में आर्थिक मदद कर रही है।

मुनाफे का कोराबर है महिलाओं की हेयर कटिंग, कम पैसे में ज्यादा कमाई

Wednesday May 15, 2019,

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सांकेतिक तस्वीर

जब मुद्रा स्कीम के तहत सरकार ब्यू टी पार्लर का बिजनेस शुरू करने में आर्थिक मदद दे रही है, इस बिजनेस को तीन लाख रुपए में शुरू किया जा सकता है, फिर बदलते जमाने में महिलाओं का सैलून खोलने में गलत क्या हो सकता है, कत्तई कुछ भी नहीं। तिहाड़ जेल में तो वर्षों से एक अनोखा सैलून चल रहा है, जहां महिलाएं गुनाह से रंगे हाथों वालों को सजाने-संवारने का हुनर सिखाती हैं। प्रायः देखा जाता है कि कई मुस्लिम महिलाएं, जो हिजाब पहनती हैं, रूढ़ियों के चलते अपने परिवार के पुरुषों के अलावा और किसी को भी अपने बाल नहीं दिखाती हैं। यही कारण है कि वे किसी भी वैसे सलून में नहीं जातीं, जहां पुरुषों का आना जाना भी हो। न्यूयॉर्क की ब्यूटीशियन हुडा क़ुहशी ने तो एक ऐसा सैलून खोल दिया है, जो केवल हिजाब वाली महिलाओं का ध्यान रखता है।


इस समय ब्यूटी एंड कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के बाद सैलून का ही बिज़नेस सबसे ज्यादा परफार्मेंस में है। भारत की 1.3 बिलियन जनसंख्या में से 49 प्रतिशत 25 वर्ष की आयु के हैं। इस आयु वर्ग का अपनी सेहत और खूबसूरती की तरफ रुझान सबसे ज्यादा होता है। इसमें सोशल मीडिया का भी काफी बड़ा रोल है। कई सारे बड़े नाम हैं जो कि ब्यूटी एंड वैलनेस फील्ड में ही अपना करियर बना चुके हैं। जिस रेट में लोगों का खूबसूरती के तरफ रुझान बढ़ रहा है और सोशल मीडिया का क्रेज ऊंचाई पर है, ब्यूटी और वेलनेस इंडस्ट्री काफी आगे जाने वाली है और इस फील्ड में शुरू किया गया छोटे से छोटा बिज़नेस भी काफी बेनिफिट दे सकता है।


आज, जबकि पूरा खुदरा जगत बाजार में हर स्त्री से ही कुछ न कुछ कमाई कर रहा है, जूते, जींस, वॉलेट लगभग सभी के लिए महिलाओं से अधिक शुल्क लिया जाता है, ऐसे वक्त में किसी महिला के लिए हेयर कटिंग के हुनर का फायदा उठाने में हर्ज क्या हो सकता है। आज महिलाएं, लड़कियां एक बार बाल सेट कराने के लिए आठ-आठ सौ रुपए दे जाती हैं। ऐसी भी तमाम महिलाएं हैं, जो पुरुषों की तरह बाल कटवाने के लिए दोगुनी राशि भुगतान कर देती हैं। चूंकि औरतों के बालों को ज्यादा स्टाइल किया जाता है, इसलिए उसका भुगतान भी खूब मिल जाता है। लड़कों के बालों को सेट करने में उतनी मेहनत नहीं होती है। उनसे कहा जाता है कि उनके बाल उस्तरे से नहीं, सिर्फ कैंची से सेट किए जा रहे हैं। भले ही ज्यादातर लड़के छोटे बाल वाली लड़कियों को पसंद नहीं करते, नई-नई हेयर स्टाइल्स से भी सैलूनों पर महिलाओं की भी संख्या दिन दूनी, रात चौगुनी गति से बढ़ती जा रही है।


आज ब्यूटी केयर को लेकर महिलाओं का रुझान काफी तेजी से बढ़ रहा है। इससे महिलाओं को सैलून के काम भी रोजगार के अच्छे अवसर पैदा हो चुके हैं। आमतौर पर पार्लर में काम करके एक महीने में मात्र 10 से 15 हजार की ही नौकरी मिल पाती है और इसके बदले में कमरतोड़ काम भी करना पड़ता है लेकिन अब ऐसा नहीं, क्योंकि अब सैलून के काम में हर महीने लगभग 80 हजार रुपए तक की कमाई हो जाती है। सैलून ऐट होम के जरिए कई गुना ज्यादा कमाई की जा सकती है। आजकल दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में अर्बन क्लैप, येस मैडम, ऐट होम डिवा जैसे कई ऐप्स काम कर रहे हैं।


यह पार्लर का काम जानने वाली महिलाओं को रोजगार के भी बेहतर अवसर दे रहे हैं। सैलून ऐट होम सर्विस में महिला ग्राहक को पॉर्लर जाने की कोई जरूरत नहीं होती है। घर पर ही सैलून ऐट होम सर्विस के लिए संबंधित कंपनियों के ऐप डाउनलोड करने के साथ ही उनकी वेबसाइट पर जाकर बुकिंग भी की जा सकती है। इन कंपनियों से महिलाएं हर महीने कम से कम चालीस हजार रुपए तक कमा ले रही हैं। अनुभवी ब्यूटीशियन तो अस्सी हजार रुपए तक कमा रही हैं।


लेडीज ब्यूटी पार्लर बिज़नेस में आज के लाइफस्टाइल के अनुसार देखा जाये तो कभी कमी नहीं आने वाली है। इसलिए इस बिज़नेस में प्रॉफिट कमाना और बिज़नेस को अच्छे से ग्रो करना बहुत मुश्किल नहीं है। आज हमारे देश में ब्यूटी एंड वैलनेस सेक्टर बुलंदी पर है। भारत पूरी दुनिया में ब्यूटी प्रोडक्ट्स और सर्विसेज के उपभोग में दूसरे नंबर पर आता है। एफ़आईसीसीआई और केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ब्यूटी और वेलनेस उद्योग की रैंकिंग में टॉप-5 देशों में से एक और 2020 तक यह इंडस्ट्री 1,50,000 करोड़ रुपए तक का बिजनेस कर सकती है। इस ग्रोथ के आने वाले वर्षों में तीनगुना हो जाने का अनुमान है। आज ब्यूटी एंड वैलनेस इंडस्ट्री में ब्यूटी नुट्रिशन, फिजिकल फिटनेस, अल्टरनेटिव स्ट्रीम्स ऑफ़ थेरेपी, रेजुवेनशन जैसे अनेक बिज़नेस और जुड़ गए हैं।


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