गोधन न्याय योजना के फैन हुए रघुराम राजन, गोबर से बनाया जा रहा 'काला सोना', महिलाएं भी कमा रहीं पैसे

By Anuj Maurya
August 03, 2022, Updated on : Thu Aug 04 2022 09:36:26 GMT+0000
गोधन न्याय योजना के फैन हुए रघुराम राजन, गोबर से बनाया जा रहा 'काला सोना', महिलाएं भी कमा रहीं पैसे
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना के फैन हो गए हैं, जानिए कैसे इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगा दिए हैं विकास के पहिए.
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पिछले ही दिनों रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने छत्तीसगढ़ में चल रही गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojana) और गोथानों की तारीफ की थी. उन्होंने कहा कि यह योजना पशुओं की हालत को बेहतर बना रही है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की यह योजना देश के बाकी राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकती है. बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना की शुरुआत जुलाई 2020 में की थी. तमाम राज्यों के किसान छत्तीसगढ़ में चल रही इस स्कीम से बहुत प्रभावित हैं. इस योजना से पशुओं के हालात तो बेहतर हो ही रहे हैं, किसानों की हालत भी सुधर रही है. इस स्कीम के तहत किसानों से गोबर (Cow ) खरीदकर उससे जैविक खाद बनाई जा रही है, जिसे 'काला सोना' भी कहा जाता है. इससे ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही महिलाओं को भी इस स्कीम से कमाई का मौका मिल रहा है.

क्या है गोधन न्याय योजना?

छत्तीसगढ़ में चल रही गोधन न्याय योजना के तहत राज्य सरकार किसानों से पशुओं के गोबर को 2 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदती है. इस गोबर का इस्तेमाल कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और सुपर कंपोस्ट जैसी कई तरह की खाद बनाने में किया जाता है. सरकार ने एक गोधन न्याय मिशन की स्थापना भी की है, जिससे गोथानों (पशुओं का शेड) में होने वाले कामों को सही से संचालित किया जा सके. साथ ही इस मिशन की मदद से किसानों को पैसे पहुंचाने में भी आसानी होती है. बता दें कि सरकार अब तक किसानों से 50 लाख क्विंटल से भी अधिक गोबर खरीद चुकी है.

गोबर से बन रही बिजली

ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ में गोबर से सिर्फ खाद बनाने पर काम चल रहा है, बल्कि वहां गोबर से बिजली भी बनाई जा रही है. इससे दो फायदे हो रहे हैं. एक तो पर्यावरण को फायदा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी फायदा हो रहा है, जो इस काम में लगी हुई हैं. छत्तीसगढ़ में तमाम गौथानों में करीब 9000 से अधिक स्वंय सहायता समूह खाद, बिजली आदि बनाने के काम में लगे हैं और इससे 65 हजार से भी अधिक महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है. छत्तीसगढ़ में लगभग 7777 गौथान हैं, जिनमें से 2000 से अधिक गौथानों में महिलाएं काम में लगी हुई हैं.

गौमूत्र भी खरीद रही है सरकार

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में हरेली तिहार (हरियाली अमावस्या) से 4 रुपये प्रति लीटर की दर से गौमूत्र की खरीदी करने का फैसला किया था. गौमूत्र की खरीदारी 28 जुलाई से शुरू हो गई है. इस गौमूत्र से स्वयं सहायता समूह जीवामृत और कीटनाशक चीजें बनाएंगे. यानी अभी तक गोबर बेचकर तो किसानों की अतिरिक्त आय होती ही थी, अब गौमूत्र से भी उनकी कमाई बढ़ेगी.

किसानों का जीवन बेहतर कर रही ये योजना

गोधन न्याय योजना की चर्चा पूरे देश में हो रही है. कई जगह के किसान तो छत्तीसगढ़ जाकर देखते हैं कि आखिर वहां पर कैसे काम किया जा रहा है. कुछ समय पहले ही वर्धा के किसान भी छत्तीसगढ़ पहुंचे थे. मार्च 2021 तक छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना के तहत करीब 1.20 लाख क्विंटल खाद बनाई गई है. इसके जरिए छत्तीसगढ़ के करीब 1.62 लाख पशुपालकों को फायदा पहुंचा है. सोशल-इकनॉमिक मुद्दों पर फोकस करने वाले स्कॉच ग्रुप (SKOCH Group) की तरफ से इस योजना को स्कॉच अवॉर्ड भी मिल चुका है.


इस स्कीम के तहत 15 अप्रैल तक सरकार की तरफ से पशुपालकों को गोबर के बदले में करीब 138.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. इतना ही नहीं, गौथान समितियों को 59.57 करोड़ रुपये और महिला स्वयं सहायता समूहों को करीब 39 करोड़ रुपये का लाभांश दिया जा चुका है.

रूरल इकनॉमी को मिल रही बूस्टर डोज

गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ की रूरल इकनॉमी को बढ़ाने का काम कर रही है. इससे एक तो किसानों को अब पशुओं के गोबर के भी पैसा मिल रहे हैं, वहीं गोबर से तमाम चीजें बनाए जाने के चलते रोजगार भी पैदा हुआ है. खाद और बिजली के अलावा गोबर से ईकोफ्रेंडली पेंट भी बनाने का काम हो रहा है. इतना ही नहीं, महिलाएं मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, मूर्तियां और कई अन्य चीजें बनाकर भी पैसे कमा रही हैं. वहीं अब तो गौमूत्र भी खरीदा जाने लगा है, जिसका अधिकतर किसान अभी तक कोई इस्तेमाल नहीं करते थे. गांव के जिन लोगों के जमीन नहीं है, वह लोग भी गोधन न्याय योजना से फायदा पा रहे हैं. वहीं तमाम गतिविधियों से रोजगार मिलने के चलते गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है.