सफलता की रेसिपी: शीर्ष पर पहुंचकर भी माता-पिता की होती है सबसे ज्यादा जरूरत, पढ़िए इंटरनेशनल शेफ विकास खन्ना की प्रेरणादायक कहानी

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मिशेलिन शेफ विकास खन्ना हमें इस बात की याद दिलाते हैं कि उन लोगों को प्यार करना कितना महत्वपूर्ण है जिन्होंने हमारी सफलता में हमेशा साथ दिया। कहते हैं कि सफलता भले ही हमेशा आपके साथ न रहे लेकिन आपका परिवार हमेशा आपके साथ खड़ा होगा।


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सेलेब्रिटी शेफ विकास खन्ना



विकास कहते हैं,

"क्या आपने कभी गौर किया है कि जब बच्चे हिंडोले (carousel) पर झूल रहे होते हैं तो वे हर एक राउंड के बाद पास में खड़े अपने माता-पिता की ओर वेव करते हैं? दरअसल वे ऐसा सुरक्षा और आश्वासन की भावना से करते हैं क्योंकि जो लोग सबसे अधिक मायने रखते हैं वे आपके ऊपर नजर बनाए हुए हैं और आपको देख रहे हैं।"


विकास खन्ना एक मिशेलिन-स्टार शेफ हैं। वे एक उद्यमी, रेस्तरां चलाने वाले, लेखक और ग्लोबल फूड इंडस्ट्री में एक बेहद सम्मानित नाम हैं।


जो कोई भी व्यक्ति उन्हें जानता है, चाहे भले ही कम ही जानता हो, वो आपको ये जरूर बताएगा कि विकास प्रसिद्धि, सफलता और पैसों से प्रभावित नहीं हुए हैं। वह भले ही एक विश्व स्तर पर प्रसिद्ध सेलिब्रिटी हो सकते हैं, लेकिन फिर भी उनके मूल में वह एक खास व्यक्तितत्व है जो अपने परिवार और उसके आसपास के लोगों के साथ संबंधों को संजोता है।


फादर्स डे को लेकर शेफ विकास खन्ना ने अपने पिता के साथ अपने संबंधों के बारे में एक दिल को छू लेने वाली कहानी साझा शेयर की थी। यह कहानी उस बातचीत का एक सिलसिला है, जहां वह अपने संघर्षों और अपने परिवार से मिले अद्भुत समर्थन को याद करते हैं और साथ ही ये भी याद करते हैं कि वो क्या है जिसने उन्हें आज का विकास खन्ना बनाया।


विकास तरह-तरह की कुकबुक्स के लेखक हैं और वे मास्टरशेफ इंडिया के कई सीजन के जज भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने असंख्य फूड शो भी किए हैं। अमृतसर के मूल निवासी विकास को बचपन में अपने पैरों के कारण एक चलने में परेशानी थी। लेकिन आज उन्होंने वैश्विक मंच पर खुद के लिए एक जगह बनाई है, और शेफ, डिनर, टीवी शो और बहुत कुछ के बीच इस दुनिया में उनकी सराहना और प्रशंसा की जाती है। हालांकि भले ही आज विकास की दोस्ती दुनिया के सबसे बड़े नामों के साथ हो लेकिन अपनी इस मेगा सफलता की राह में सबसे बड़े सबक को भूले नहीं हैं: अपनी जड़ों को न भूलें और हमेशा विनम्र बने रहें।


उन्होंने 17 साल की उम्र में लॉरेंस गार्डन बैंक्वेट्स के साथ एक उद्यमी के रूप में शुरुआत की, इस विश्वास के साथ कि वे फूड को लेकर काम करना चाहते थे। लेकिन यह उनके माता-पिता के समर्थन के बिना संभव नहीं था, जिन्होंने उन्हें इतनी कम उम्र में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन दिया ताकि वे अपने दम पर कुछ कर सकें।


एक बच्चे के रूप में, विकास स्कूल के बाद अपने पिता के डिलीवरी बॉय हुआ करते थे। वे अपने वीडियो लाइब्रेरी बिजनेस के लिए वीडियो कैसेट्स की डिलीवरी और पिकअप किया करते थे। जब उस व्यवसाय को केबल टीवी ठप्प कर दिया, तो दविंदर खन्ना ने परिवार के घर के पिछवाड़े में एक बुनाई की मशीन स्थापित की, जिससे वे कंबल बनाते थे। कभी भी कुछ नया करने की कोशिश करने से न कतराने वाले, विकास कंबल बनाने में अपने हाथ आजमाने के दिनों को याद करते हैं।


वे कहते हैं,

“मैं अपने घर में सबसे कलात्मक व्यक्ति था। मैं उस शोर करने वाली मशीन के पास गया और दो रातों तक कठिन परिश्रम करने के बाद, एक बहुत अच्छा दिखने वाला कंबल बनाया, लेकिन कोई भी यह नहीं चाहता था: वे मेरे पिता द्वारा बनाए गए एक वर्टिकल पैटर्न वाला नॉर्मल ब्लैंकेट चाहते थे। केवल मेरी दादी ने मेरे काम की सराहना की और बहुत सपोर्ट किया।”


जब लॉरेंस गार्डन शुरू हुआ, तो यही बुनाई कौशल विकास के काम आया। वह शुरुआती दिनों में अपने कैटरिंग वेचर को सपोर्ट करने के लिए आवश्यक धनराशि लाने के लिए स्वेटर बुनते और बेचते थे। जैसा कि विकास ने खाना पकाने और भोजन में अधिक रुचि दिखाई, उनके पिता ने अध्ययन करने के लिए विदेश जाने के उनके निर्णय का समर्थन किया। उस सपने ने विकास को अमेरिका पहुंचाया, जहां से उन्हें एक इंटरनेशनल नाम मिला और आज दुनिया में एक चर्चित नाम हैं।



टाइगर एंड द क्वीन

खुद को सपोर्ट करना और अमेरिका में सर्वाइव करना उतना आसान नहीं था। जरूरतों को पूरा करने के लिए, उन्होंने रातों को काम किया। दुनिया को बदल देने वाले 9/11 हमले से पहले 2001 में एक दिन, एक युवक उस दुकान पर लॉटरी टिकट खरीदने गया जहां विकास रात की शिफ्ट में काम कर रहे थे। दरअसल विकास ने अपने सहयोगियों को स्टोर पर ग्राहकों से आइटम के लिए पूछते समय 'कृपया' का उपयोग करने के लिए कहते हुए सुना था, इसलिए उन्होंने भी नए ग्राहक के साथ भी ऐसा ही किया, लेकिन उस ग्राहक ने जवाब दिया: "हम यहां आपकी सराहना करने के लिए नहीं हैं, आप हमारे लिए काम करने के लिए यहां हैं।"


विकास ने बाद में इस घटना को अपने पिता के साथ शेयर किया, जिन्होंने उस समय इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वर्षों बाद, जब इस विश्व प्रसिद्ध शेफ को 23 अगस्त 2014 को जेम्स बीयर्ड हाउस में स्टैंडिंग ओवेशन मिल रहा था, तो वे खुद को रोक नहीं सके, और उन्होंने उस घटना को याद किया कि उस युवा ग्राहक ने उन्हें उस रात क्या कहा था। इसके बाद जब उन्होंने ये खबर साझा करने के लिए अपने पिता को फोन किया, तो गर्व से उनके पिता ने कहा: "मैं ग़ुलाम पैदा नई किद्दा, शेर पैदा कित्ता (मैंने गुलाम पैदा नहीं किया है, शेर पैदा किया है।)"


विकास कहते हैं,

"मुझे नहीं पता कि मेरे पिताजी ने उस भावना को कैसे व्यक्त किया। उनका गुलाम (नौकर) शब्द का उपयोग इतना उपयुक्त था।"


जब विकास अपने सपने और शिक्षा पर काम करने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्होंने एक बार अपने पिता से कहा,

"पापा, एक दिन में राष्ट्रपति को रोटी खिलाऊंगा।"


जिस पर उनके पिता ने जवाब दिया,

"राष्ट्रपति तो कई हैं, लेकिन रानी केवल एक है। वही तुम्हारे लिए असली चुनौती होगी।"


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शेफ विकास खन्ना

वह सपना भी सच हो गया जब 2016 में, विकास ने अपनी लिखी किताब Utsav: A Culinary Epic of Indian Festivals को बकिंघम पैलेस में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को दी। यह 12 हस्तलिखित, पुस्तक की स्वर्ण-धारित, हाथ से पेंट की गई प्रतियों में से एक थी जिसे संकलन करने में 12 साल लगे। यह त्योहारों, समारोहों, अनुष्ठानों और खाद्य पदार्थों के सबसे बड़े संकलन के रूप में वर्णित है जो भारत और इसकी विरासत का प्रतीक हैं।


कुछ मायनों में, विकास को लगता है कि यह पूरा अनुभव कहीं न कहीं उनके पिता कामनाओं के चलते पूरा हो पाया। वह कहते हैं,

"यहां तक कि जब हमारे माता-पिता हमारे साथ नहीं होते हैं, तो आपको लगता है कि वे आपके आसपास हैं, आपको देख रहे हैं।"


कुकबुक की लंबी सूची को देखते हुए उनके द्वारा लिखी स्पाइस स्टोरी ऑफ इंडिया (2006), मॉडर्न इंडियन कुकिंग (2007), माई ग्रेट इंडियन कुकबुक (2012) से लेकर अविश्वसनीय रूप से विस्तृत उत्सव तक, वह अपने वादे को पूरा करने के रास्ते पर हैं कि वह एक दिन 50 किताबें लिखेंगे- यह एक ऐसे व्यक्ति के लिए एक दुर्जेय लक्ष्य जैसा है, जो न तो अकादमिक रूप से ज्यादा इच्छुक था और न ही कभी जाना पहचाना लेखक। लेकिन वे 27 किताबें लिखकर पहले से ही आधा से ज्यादा सफर तय कर चुके हैं और केवल 23 किताबें और लिखनी हैं। विकास संतुष्टी की भावना के साथ कहते हैं कि जिस दिन वह अपना ये वादा पूरा कर लेंगे उस दिन वे पब्लिशिंग करना बंद कर देंगे।


अपने माता-पिता के साथ आपके द्वारा बिताए गए कुछ पलों का महत्व विकास की इस घटना से समझा जा सकता है जो उन्होंने योरस्टोरी के साथ शेयर की। स्वर्ण मंदिर में अमृतसर में नेशनल जियोग्राफिक के लिए मेगा किचन की शूटिंग के दौरान, एक बूढ़ा व्यक्ति सुरक्षा बाड़ को कूद कर पवित्र सरोवर में कूद गया। उन्हें तुरंत गार्डो ने वहां से बाहर निकालकर बचा लिया, लेकिन यह स्पष्ट था कि वह परेशान था कि वह मर क्यों नहीं गया। एक बार जब भीड़ तितर-बितर हो गई, तो विकास ने उसे खोजने के लिए संपर्क किया कि उसने इस हताश उपाय का सहारा क्यों लिया।


उस आदमी ने उन्हें बताया कि उसकी माँ उसे सोनू कहती थी। वह एक ट्रक ड्राइवर था जिसने अपना अधिकांश वयस्क जीवन सड़कों पर बिताया था। हर बार जब वह घर से बाहर निकलता था, तो यह उसकी माँ थी जो हीलिंग टच देती थी। वह उसे स्वर्ण मंदिर भी ले आती थी। हालांकि, जब उसके बच्चे बड़े हो गए और उसके पोते को कमरे की जरूरत थी, इसलिए परिवार ने उसे घर से बाहर निकाल दिया। उसके पास जाने के लिए कोई ठिकाना नहीं था और इसलिए वह स्वर्ण मंदिर चला आया।


विकास कहते हैं,

"जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा परेशान किया वो यह था कि अब उसके आसपास उसे सोनू कहने वाला कोई नहीं था।"


कहीं न कहीं सोनू की कहानी केवल विकास की नहीं बल्कि हम सभी की है जो हमारे माता-पिता को खो चुके हैं। जैसे-जैसे हम अपने जीवन में भौतिक लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं, अपनी कमजोरियों को छिपाते हैं, और हमारी बातचीत को टाल-मटूल देते हैं, ऐसे में विकास ने हमें सिर्फ एक दिन से आगे जाने के लिए प्रेरित किया है जो बताता है कि माता-पिता को स्वीकार करें और इसके बजाय इस बारे में खुलकर बात करें कि हम जीवन में चाहें कितना भी आगे बढ़ें या हम कितने भी बूढ़े हो जाएं, हमारे माता-पिता हमेशा मायने रखेंगे।


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आगे बढ़ते हुए

जैसा कि हम अपनी बातचीत के अंत में आते हैं, विकास हंसते हुए कहते हैं,

“परिवार के कई लोग खुद को मुझमें देखते हैं और इससे मुझे खुशी होती है। हालाँकि, अगर मेरी बहन सुन रही होती, तो वह कहती कि मैं पापा की तरह सुंदर नहीं हूँ।”


हालांकि वे कहते हैं कि वे अपने पिता की तरह दिखते हैं। मैंने उन्हें बताया कि मेरे पास भी बताने के लिए एक ऐसी ही कहानी है। मैं अपनी माँ की तरह दिखती हूँ और मैं अपने परिवार को उनकी याद दिलाती हूँ। हम थोड़ी देर के लिए बातचीत रोकते हैं और जानते हैं कि हमारे लिए उसके क्या मायने हैं।


जैसा कि उन्हें अपने पिता के खोने का गम है, उन्हें यकीन है कि उनके पिता अभी भी कहीं न कहीं उन्हें देख रहे होंगे। उनकी माँ का उनके जीवन भर एक बड़ा सपोर्ट रहा है और वह हर समय उनका सबसे अधिक सहयोग करती हैं। वह ये कहते हुए साइनऑफ करते हैं कि भले ही नुकसान उठाना कठिन है, लेकिन जो महत्वपूर्ण है वह है कि सभी अच्छी यादों को इकट्ठा करना, उन्हें बोतल में बंद करना और उन्हें प्रेरणा के स्रोत के रूप में उपयोग करना, जैसे कि वे करते हैं। 


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