गुजरात के केवड़िया में बनेगा राजा महाराजाओं का संग्रहालय

By yourstory हिन्दी
October 31, 2022, Updated on : Mon Oct 31 2022 09:53:03 GMT+0000
गुजरात के केवड़िया में बनेगा राजा महाराजाओं का संग्रहालय
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31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को भारत में ‘नेशनल यूनिटी डे’ (National Unity Day) यानी ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. पहली बार पटेल की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ साल 2014 में मनाया गया था. देश की आज़ादी की लड़ाई में योगदान देने वाले सरदार पटेल आजादी के बाद देश के पहले उप प्रधानमंत्री भी थे. इस साल सरदार पटेल की जयंती के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के केवड़िया में आयोजित एकता दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. केवड़िया में ही ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थित है. केवड़िया के एकता नगर में देश के तमाम राजे-रजवाड़ों, रियासतों के इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए म्यूजियम (संग्रहालय) बनाए जाने की घोषणा हो चुकी है. 562 रियासतें का यह इतिहास भी रहा है कि अपनी जनसंख्या और क्षेत्रीय परिस्थियों के आधार पर अक्सर अंग्रेजों के साथ समझौते करती थीं. देश के विविध पूर्व राज परिवारों से संपर्क कर उनके दस्तावेज, रजवाड़ों के भारत में विलय के करार, हथियार, पारंपरिक आभूषण, गहनों आदि को यहां प्रदर्शित किया जाएगा.


आजादी के दौरान भारत 565 देशी रियासतों में बंटा था. 1947 में आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान का बँटवारा हुआ. ऐसी दशा में, इन रियासतों के सामने तीन विकल्प रखे गये:

1. भारत में शामिल हो

2. पाकिस्तान में शामिल हो

3. स्वतंत्र रहें


हैदराबाद, जूनागढ, भोपाल, त्रावणकोर और कश्मीर को छोडक़र बाकी रियासतों ने स्वेच्छा से भारत में शामिल होने की स्वीकृति दे दी थी.


जूनागढ़ रियासत पाकिस्तान में मिलने की घोषणा कर चुकी थी वहीँ कश्मीर ने स्वतंत्र बने रहने की इच्छा व्यक्त की.


हालाँकि भोपाल की रियासत भी भारत में शामिल नहीं होना चाहती थी लेकिन बाद में वह भारत में शामिल हो गयी. सबसे बाद में शामिल होने वाली रियासत भोपाल ही थी.


छोटे बड़े राजाओं, नवाबों को भारत सरकार के अधीन करते हुए रजवाड़े खत्म करना कोई आसान काम नहीं रहा होगा. आज़ादी के बाद कांग्रेस ने इन रियासतों का राजनीतिक एकीकरण को एक लक्ष्य के रूप में रेखांकित करते हुए इन सभी शासकों को सरदार पटेल और वी. पी. मेनन द्वारा कई अलग अलग तंत्रों का उपयोग करके भारत में शामिल होने के लिए मनाया या मजबूर किया. आज़ादी के ठीक बाद की देश की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां भी राजाओं के भारत में विलय के निर्णय कारण बनीं. कुछ रियासतों में पाकिस्तान द्वारा दखलंदाजी भी उनके भारत से सैन्य सेवा लेना और फिर भारत में विलय होने की वजह बनीं.


रियासतों का भारत के संघ में विलय होने के परिणामस्वरूप आज हम भारत देश को जैसे जानते हैं वैसा बना.



Edited by Prerna Bhardwaj