SBI ने 23वें चरण में बेचे 676 करोड़ रुपये के Electoral Bonds

By रविकांत पारीक
December 09, 2022, Updated on : Fri Dec 09 2022 06:34:33 GMT+0000
SBI ने 23वें चरण में बेचे 676 करोड़ रुपये के Electoral Bonds
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में कहा है कि सरकार द्वारा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में राज्य चुनावों से पहले अतिरिक्त 15 दिनों के लिए बॉन्ड की बिक्री की अनुमति देने के बाद 6 नवंबर से 15 नवंबर तक ₹676.26 करोड़ के चुनावी बॉन्ड (Electoral bonds) बेचे गए.


कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) द्वारा किए गए अनुरोध के जवाब में एसबीआई ने कहा, "कुल 954 इलेक्टोरल बॉन्ड बेचे गए, जिनमें से 666 बॉन्ड एक करोड़ रुपये के, 88 बॉन्ड 10 लाख रुपये के, 143 बॉन्ड 1 लाख रुपये के, 27 बॉन्ड 10,000 रुपये के और 30 बॉन्ड 1,000 रुपये के थे."


7 नवंबर को, सरकार ने "राज्यों की विधान सभा और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के आम चुनावों" के दौरान 15 अतिरिक्त दिनों के लिए उनकी बिक्री की अनुमति देने के लिए चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन किया. यह संबंधित विधानसभा चुनावों के वर्ष में 15 अतिरिक्त दिनों तक चुनावी बॉन्ड की खरीद विंडो को बढ़ाने के प्रावधान के अतिरिक्त था.


इससे पहले 31 अक्टूबर को ख़बर थी कि 545.25 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड 1 से 10 अक्टूबर के बीच या 22वें चरण में बेचे गए थे, और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को भारी मात्रा में योगदान प्राप्त हुआ था.


एसबीआई ने अपने पिछले जवाब में कहा कि 22वें चरण के दौरान कुल 741 इलेक्टोरल बॉन्ड बेचे गए, जिनमें से 96% बॉन्ड प्रत्येक ₹1 करोड़ के मूल्यवर्ग के थे. लगभग 90% इलेक्टोरल बॉन्ड चार पार्टियों- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को गए.


राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बॉन्ड को पेश किया गया है. इलेक्टोरल बॉन्ड योजना, पहली बार 2017 में शुरू हुई और 2018 में लागू हुई, पारदर्शिता की कमी के लिए आलोचना की गई है. आलोचकों ने तर्क दिया है कि चूंकि बॉन्ड सरकारी स्वामित्व वाले बैंक के माध्यम से बेचे जाते हैं, इसलिए संभावना है कि सत्ता में पार्टी यह पता लगा सकती है कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कौन फंड कर रहा है.


सरकार द्वारा अधिसूचित 10 दिनों के लिए साल में चार बार (जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में) बेचा जाता है; इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों को उन दानदाताओं से धन स्वीकार करने की अनुमति देते हैं जिनकी पहचान गुप्त रखी जाती है.


बॉन्ड बेचने और भुनाने के लिए एसबीआई एकमात्र अधिकृत बैंक है. अन्य बैंकों के ग्राहक भी उन्हें दिए गए विभिन्न भुगतान चैनलों के माध्यम से बॉन्ड खरीद सकते हैं. हालांकि, एक राजनीतिक दल बॉन्ड को बैंक की 29 अधिकृत शाखाओं में से किसी एक से ही भुना सकता है.


इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चंदा प्राप्त करने के लिए एक राजनीतिक दल के पास हाल के आम चुनावों या विधानसभा चुनावों में कम से कम 1% वोट शेयर होना चाहिए.


आपको बता दें कि बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.