बिक गया 6 लाख भारतीयों का पर्सनल डेटा, 500-500 रुपये में लगी बोली!

By रविकांत पारीक
December 09, 2022, Updated on : Fri Dec 09 2022 08:21:00 GMT+0000
बिक गया 6 लाख भारतीयों का पर्सनल डेटा, 500-500 रुपये में लगी बोली!
NordVPN के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि लॉगिन, कुकीज़, डिजिटल फिंगरप्रिंट, स्क्रीनशॉट और अन्य जानकारी सहित 6,00,000 भारतीयों का डेटा चोरी करके बॉट बाजार में बेच दिया गया था.
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

6 लाख भारतीयों के डेटा (data of 6 lakh Indians) सहित दुनिया भर के कम से कम 50 लाख लोगों के संवेदनशील डेटा (sensitive data) को हैक कर बॉट मार्केट (bot market) में बेच दिया गया है. यह बताया गया है कि अब तक बॉट बाजारों में बेचे जाने वाले सभी डेटा का लगभग 12 प्रतिशत भारतीय उपयोगकर्ताओं का है, जो साइबर पहचान की चोरी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में से एक है.


NordVPN के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि लॉगिन, कुकीज़, डिजिटल फिंगरप्रिंट, स्क्रीनशॉट और अन्य जानकारी सहित 6,00,000 भारतीयों का डेटा चोरी करके बॉट बाजार में बेच दिया गया था. कहा जाता है कि हैकर्स ने पैकेट में एक व्यक्ति की डिजिटल पहचान को 5.95 डॉलर की औसत कीमत पर बेचा, जो लगभग 490 रुपये होता है.


अध्ययन के लिए, नॉर्डवीपीएन के लोगों ने पिछले चार वर्षों के डिजिटल डेटा को ट्रैक किया, जब से 2018 में बॉट मार्केट लॉन्च किया गया था.


बॉट मार्केट — आसान भाषा में, यह ऑनलाइन मार्केटप्लेस है जहां हैकर्स चोरी किए गए डेटा को बेचते हैं. पीड़ितों को लक्षित किया जाता है और बॉट मालवेयर (bot malware) का उपयोग करके उनकी डिजिटल पहचान और जानकारी को हैक किया जाता है.


रिपोर्ट भारत के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि देश पहले से ही गंभीर साइबर सुरक्षा (cyber security) मुद्दों से निपट रहा है. हाल ही में, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कई सर्वर कई दिनों तक चलने वाले कई रैंसमवेयर हमलों के कारण डाउन हो गए थे. बताया जा रहा है कि हैकर्स ने रैंसमवेयर अटैक में लाखों मरीजों की निजी जानकारी चुराई है.

हैकर कैसे चुराते हैं डेटा

हैकर पीड़ितों की निजी गोपनीय जानकारी को चुराने के लिए मालवेयर का इस्तेमाल करते हैं, जिसका उद्देश्य प्रत्यक्ष उपयोग या अंडरग्राउंड डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए इसे मॉनेटाइज करना और बेचना है. डेटा को हैक करने के लिए, डिवाइस से सीधे डेटा एक्सेस करने के लिए पीड़ित के कंप्यूटर पर मैलवेयर डिप्लॉय किया जाता है. यह मैलवेयर स्पाइवेयर, रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन मालवेयर और ब्रूट-फोर्स पासवर्ड हो सकता है.


हैकर संक्रमित वेबसाइटों के माध्यम से पीड़ितों के डिवाइस पर ईमेल के माध्यम से कोई अटैचमेंट या लिंक भेजकर इस मैलवेयर का फायदा उठाते हैं. कीलॉगर्स, स्क्रीन स्क्रेपर्स, स्पाईवेयर, एडवेयर, बैकडोर और बॉट कुछ अन्य भेद्यताएं हैं जिनका उपयोग पीड़ितों की जानकारी तक पहुंचने के लिए किया जाता है.

अपने डिवाइस को मैलवेयर से कैसे बचाएं

अपने संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखने और भविष्य में अपने डिवाइस को किसी भी मालवेयर के हमले से बचाने के लिए, यहां कुछ टिप्स दी गई हैं जिनका आप पालन कर सकते हैं:


  • अपने कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर को अपडेट रखें क्योंकि Apple और Microsoft जैसी कंपनियां अक्सर नए अपडेट जारी करती रहती हैं.


  • जब भी संभव हो एक नॉन-एडमिनिस्ट्रेटर अकाउंट का उपयोग करें. यह आपको अनावश्यक ऐप्स इंस्टॉल करने से रोकेगा.


  • हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से डेटा डाउनलोड करें और कभी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें.


  • हमेशा ईमेल स्कैन करें और यदि आपको उन पर संदेह है या वे किसी अज्ञात व्यक्ति से प्राप्त हुए हैं तो कभी भी उन्हें डाउनलोड या खोलें नहीं.


  • कभी भी पॉप-अप विंडो पर क्लिक न करें जो आपसे सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कहे.


  • हमेशा एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें और अपने सिस्टम को बार-बार स्कैन करें.


इससे पहले, बीते नवंबर महीने के आखरी हफ्ते में आई साइबरन्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक विक्रेता लगभग 500 मिलियन व्हाट्सएप यूजर्स के डेटाबेस को बिक्री के लिए रख रहा है. कहा जाता है कि डेटाबेस में 487 मिलियन फ़ोन नंबर हैं जो दुनिया भर में व्हाट्सएप का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं. इस लिस्ट में भारतीय यूजर्स के नंबर भी शामिल है.


रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के 32 मिलियन, यूके के 11 मिलियन, रूस के 10 मिलियन, इटली के 35 मिलियन, सऊदी अरब के 29 मिलियन यूजर्स के नंबर इस लिस्ट में हैं. लिस्ट में भारत के 6 मिलियन यूजर्स का डेटा भी शामिल है जो व्हाट्सएप पर रजिस्टर हैं.