हादसे में हुई पिता की मौत ने झकझोर दिया तरुण को, शुरू किया बुजुर्गों की मदद करने वाला ये स्टार्टअप

पुणे में रहने वाले तरुण शर्मा करीब 15 साल तक अमेरिका में रहे. वापस भारत लौटे तो देखा कि यहां बुजुर्गों को मदद मिलना बहुत मुश्किल है. ऐसे में उन्होंने योडा की शुरुआत की, जिससे बुजुर्गों को मदद मुहैया कराई जाती है.

हादसे में हुई पिता की मौत ने झकझोर दिया तरुण को,  शुरू किया बुजुर्गों की मदद करने वाला ये स्टार्टअप

Tuesday February 14, 2023,

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एक मिडिल क्लास आदमी की पूरी जिंदगी पैसे के पीछे भागने में गुजर जाती है. उसे सबसे ज्यादा दिक्कत तब होती है, जब वह बुढ़ापे की सीढ़ियां चढ़ रहा होता है. इस वक्त उसे जरूरत होती है एक सहारे की. अक्सर मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी बनते हैं उनके बच्चे, लेकिन उनका क्या जिनके बच्चे उनके साथ नहीं हैं? एक अच्छी जिंदगी जीने की चाह में अक्सर ही बच्चों को अपने मां-बाप से दूर होना पड़ता है. कई बार तो बच्चों को विदेश तक जाना पड़ता है और यहां उनके मां-बाप अकेले पड़ जाते हैं. ऐसे में सबसे बड़ी दिक्कत ये होती है कि आखिर उन्हें सहारा कौन दे? कौन उनका ख्याल रखे? इसी समस्या का समाधान लेकर आया है एक स्टार्टअप योडा (Yodda), जो बुजुर्गों को तमाम तरह की मदद मुहैया करा रहा है.

पहले समझिए क्या करता है योडा

योडा की शुरुआत मार्च 2021 में हुई. हालांकि, इस पर अक्टूबर 2020 से ही कंपनी के फाउंडर और सीईओ तरुण शर्मा ने काम करना शुरू कर दिया था. 52 साल के तरुण अभी पूना में रहते हैं और उन्हें कंप्यूटर इंजीनियर की पढ़ाई की है. तरुण बताते हैं कि योडा अधिक उम्र के लोगों को मेडिकल से लेकर घर के जरूरी काम तक की तमाम मदद मुहैया कराता है. इस स्टार्टअप की सेवाएं वो लोग ले सकते हैं जो नौकरी की वजह से देश के बाहर रहते हैं, लेकिन उनके माता-पिता उनसे दूर हैं. यह स्टार्टअप बुजुर्गों को मेडिकल सुविधाएं तो देता ही है, साथ ही उनके घर के और भी तमाम काम करता है, जैसे सफाई, पूजा-पाठ करवाना, केयर-टेकर मुहैया कराना, नर्सिंग सुविधाएं दिलवाना. अब तक कंपनी ने करीब 22 इमरजेंसी हैंडल की हैं और लगभग 80 परिवार एक्टिव मेंबर हैं.

क्यों शुरू किया योडा, क्या वाकई इसकी जरूरत है?

आज भी भारत में ऐसे बहुत सारे बुजुर्ग हैं, जिन्हें अगर समय पर मेडिकल सेवा मिल जाए तो उनकी जान बच सकती है. योडा को शुरू करने से पीछे तरुण की अपनी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जिसे बहुत सारे लोग अनुभव कर चुके होंगे. करीब 15 साल तक अमेरिका में रहने के बाद तरुण 2009 में देश वापस लौटे. 2016 में उनके पिता (73 साल) के साथ एक हादसा हुआ. वह घर में ही गिर गए थे. छोटे भाई ने इसकी सूचना तरुण को दी और बताया कि गिरने के बाद से ही वह कुछ अलग सा बर्ताव कर रहे हैं. तरुण ने तुरंत एंबुलेस को फोन किया और अपनी मां के साथ पिता के पास जाने के लिए निकल पड़े. जब तरुण घर पहुंचे तब तक करीब आधे घंटे हो चुके थे, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची थी. उसके बाद अपनी कार से ही वह अपने पिता को पास के अस्पताल ले गए.

अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि उनके पिता को पैरालिसिस का अटैक आया है, लेकिन इसके इलाज के लिए उन्हें किसी बड़े अस्पताल ले जाना होगा. वहां से उन्हें दूसरे बड़े अस्पताल ले जाया गया. इस पूरी कवायद में करीब 2 घंटे बीत चुके थे. वह ना बोल पा रहे थे, ना चल पा रहे थे ना ही कुछ खा पा रहे थे. इस पैरालिसिस की वजह से करीब 6 महीने बाद उनके पिता की मौत हो गई. तरुण करीब 15 साल तक अमेरिका में रहे थे, जहां एक बार फोन से 911 डायल करते ही 5 मिनट में पुलिस और एंबुलेंस पहुंच जाती थी. उन्हें भारत के बाजार में एक बड़ा गैप और एक बड़ी समस्या तुरंत ही समझ आ गई.

अभी वह इसके बारे में सोच ही रहे थे कि कुछ समय बाद पता चला कि उनकी मां को ब्रेस्ट कैंसर है. उस वक्त उन्हें रेगुलर ब्लड टेस्ट, कीमोथेरेपी और कई डाग्नोस्टिक की जरूरत पड़ती थी. शुगर और बीपी की वजह से कई बार कीमोथेरेपी को कुछ दिन के लिए टालना भी पड़ता था. इसी बीच कैंसर उनके ब्रेन तक जा पहुंचा, जिसके बाद हालात ज्यादा खराब हो गई. वह सब कुछ भूलने लगीं. किसी को पहचानती नहीं थीं. करीब 6 महीने बाद 72 साल की उम्र में 2019 में उनकी मां की भी मौत हो गई. एक के बाद एक हुए दो हादसों ने तरुण को अंदर से झकझोर दिया. वह ये सोचने को मजबूर हो गए कि अगर वह अमेरिका से नहीं लौटे होते तो क्या होता? कौन उनके मात-पिता का ख्याल रखता? यहीं से उनके दिमाग में योडा के आइडिया ने जन्म ले लिया.

योडा का मतलब क्या है?

कंपनी का नाम योद्धा से निकला है. कंपनी ने इसे योद्धा इसलिए नहीं रखा क्योंकि जब इसे बड़े लेवल पर ले जाया जाएगा और विदेशों तक जाने की प्लानिंग होगा तो योद्धा वहां ठीक नहीं बैठता. साथ ही नाम थोड़ा अलग रखने की एक वजह ये भी है कि उससे लोगों में इसे जानने की उत्सुकता पैदा होती है, जिससे कंपनी के बारे में अधिक से अधिक लोग जानना चाहेंगे.

क्या सर्विस देता है योडा?

योडा के तहत दो तरह की सेवाएं दी जाती हैं. इसमें एक है सॉफ्टवेयर आधारित प्रोडक्ट और दूसरा है सर्विस. अगर बात करें सॉफ्टवेयर आधारित प्रोडक्ट की तो उसे नाम दिया गया है योडा इनेबल (Yodda Enable) का. इसके तहत अगर आपको कोई इमरजेंसी होती है तो आपको ऐप में एक बटन दबाना होता है. बटन दबाते ही इमरजेंसी की सूचना ग्राहक से जुड़े नेटवर्क के पास चली जाएगी. इस नेटवर्क में ग्राहक के दोस्त, बच्चे, भाई-बहन, पड़ोसी कोई भी हो सकता है, जो पहले से ही सॉफ्टवेयर में फीड किए जाते हैं. सूचना पहुंचने के तुरंत बाद योडा की तरफ से एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू की जाती है और सभी को उसमें जोड़ दिया जाता है. इसमें एक योडाकेयर एक्सपर्ट होता है, जो बताता है कि नेटवर्क के तमाम लोग किस लोकेशन पर हैं. योडाकेयर एक्सपर्ट लोगों को गाइड करता है और अस्पताल से लेकर एंबुलेंस तक का नंबर मुहैया कराता है और जल्द से जल्द ग्राहक तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जाती है.

कंपनी के प्राइमरी कस्टमर 70 साल से ऊपर के लोग हैं, जिन्हें हर वक्त मदद की जरूरत होती है. योडा सर्विस के तहत तीन तरह की सेवाएं आती हैं.

1- इमरजेंसी प्लान- इसके तहत ग्राहक को कोई इमरजेंसी आने पर ऐप में बटन दबाना होता है, जिसके बाद योडा केयर के लोग मदद के लिए पहुंच जाते हैं. वह आसपास के अस्पताल देख लेते हैं. ग्राहक से जुड़ी तमाम फॉर्मेलिटी जैसे फॉर्म भरना, केवाईसी कराने के काम करने में मदद करते हैं. योडा केयर के एग्जिक्युटिव के पास भी एक ऐप होता है, जिसमें ग्राहकों के मेडिकल इंश्योरेंस, केवाईसी, मेडिकल प्रॉब्लम जैसी तमाम जानकारियां पहले ही फीड होती हैं. इससे उन्हें अस्पताल में चेकइन करने, बिल का भुगतान करने या डॉक्टर को ब्रीफ करने में काफी आसानी होती है.

2- हेल्थकेयर प्लान- उम्रदराज लोगों की अक्सर तबियत खराब रहती है. उन्हें रूटीन हेल्थ इश्यू की वजह से भी डॉक्टर के पास जाना पड़ता है. कई बार कुछ टेस्ट होते हैं, जो घर पर ही हो सकते हैं, लेकिन कुछ टेस्ट या डायग्नोस्टिक के लिए अस्पताल जाना जरूरी होता है. तरुण शर्मा बताते हैं कि वह कैंसर और डायलिसिस जैसी चीजों के लिए तो मदद मुहैया कराते हैं, लेकिन कुछ मामलों में मदद नहीं कर पाते हैं. पार्किंसन, अल्जाइमर जैसे केस वह हैंडल नहीं कर पाते हैं, क्योंकि इसमें बहुत दिक्कत हो जाती है.

3- कॉम्प्रेहेंसिव सर्विस- योडा केयर के इस प्लान के तहत कंपनी हर तरह की सुविधाएं देती है. भले ही बैंक का काम कराना हो या फिर घर में सत्यनारायण भगवान की पूजा ही क्यों ना करानी हो. इतना ही नहीं किसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन कराने या किसी अपार्टमेंट का रेंट लेने या फिर जो भी घर का काम हो, योडा वह काम करने में मदद करता है.

क्या है कंपनी का बिजनेस मॉडल?

योडा का बिडनेस मॉडल पूरी तरह सेवा देने का है, ऐसे में कंपनी सब्सक्रिप्शन मॉडल से कमाई करती है. इनका इमरजेंसी प्लान 2400 रुपये महीने का होता है, जबकि अगर कोई कॉम्प्रिहेंसिव प्लान लेता है तो उसे हर महीने 9000 रुपये चुकाने होते हैं. ऐसा नहीं है कि अगर आपने इमरजेंसी प्लान लिया है तो कोई दूसरी मदद नहीं मिल पाएगी. आप मदद हासिल कर सकते हैं, लेकिन उसके लिए चार्ज लगेगा. मान लीजिए आपको रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर के पास जाना है तो योडा के एग्जिक्युटिव आपको अस्पताल ले जाएंगे, लेकिन फिर आपको 1000 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पैसे चुकाने होंगे. वहीं अगर आप योडा एनेबल की सेवा लेते हैं तो उसके लिए आपको हर महीने 500 रुपये चुकाने होंगे.

सब सुविधा देते हैं, लेकिन मेड मुहैया नहीं कराती कंपनी

कंपनी की तरफ से अभी तमाम तरह की सुविधाएं बुजुर्गों को दी जाती हैं, लेकिन मेड की सुविधा नहीं दी जाती है. तरुण शर्मा कहते हैं कि एक तो मेड ढूंढना बहुत मुश्किल होता है, वहीं ये मार्केट पूरी तरह से अनऑर्गेनाइज्ड है. मेड सप्लाई करने वाली अभी कोई अच्छी कंपनी नहीं है, अगर ऐसी कंपनी सामने आती है तो योडा उसके साथ भी पार्टनरशिप करेगी. यहां तक कि कंपनी अभी जो केयर टेकर या नर्स मुहैया कराती है, वह भी प्रोफेशनल होते हैं और किसी न किसी एजेंसी से उन्हें इनके काम की गारंटी मिलती है.

सिर्फ आर्मी के लोग ही बन सकते हैं योडा केयर एग्जिक्युटिव

अगर बात करें योडा केयर एग्जिक्युटिव की तो सिर्फ आर्मी से रिटायर लोगों को ही यह मौका दिया जाता है. तरुण बताते हैं कि इसकी कई वजहें हैं. एक बड़ी वजह ये भी है कि ये लोग पहले से ही इमरजेंसी के लिए ट्रेन्ड होते हैं. वहीं आर्मी के लोगों में अनुशासन होता है और साथ ही उनकी सोच भी मदद करने वाली होती है, जिससे वह ग्राहकों को अच्छी सेवा मुहैया करा सकते हैं.

कैसे जुड़ें योडा से?

योडा से जुड़ने के लिए आप कंपनी की वेबसाइट (https://www.yodda.care/) पर जा सकते हैं या फिर 9699766900 पर वाट्सऐप कर सकते हैं. आपको कंपनी की तरफ से उनकी टीम कॉल करेगी और ग्राहक को ऑनबोर्ड किया जाएगा. इसके तहत ग्राहक को ऐप इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग भी दी जाती है, ताकि किसी इमरजेंसी की स्थिति में वह इसे आसानी से इस्तेमाल कर सके. ग्राहकों को कंपनी का कस्टमर केयर नंबर भी दिया जाता है, जिस पर वह किसी भी वक्त फोन कर सकते हैं. तरुण बताते हैं कि करीब 20 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जो खुद ही अपनी फीस भरते हैं और कंपनी की सेवाएं लेते हैं.

चुनौतियां भी कम नहीं

इसमें सबसे बड़ी चुनौती ये है कि अगर लोग कोई केयर टेकर रखते हैं तो उम्मीद करते हैं कि वह सारा काम कर ले. वही बर्तन भी धो दे, बाथरूम साफ कर दे, घर साफ कर दे. लोग दरअसल ऑलराउंडर चाह रहे हैं. लोगों को लगता है कि केयर टेकर एंबुलेंस भी बुला ले और दवा भी वही दे दे सारे काम वही कर ले.

एक बड़ा चैलेंज ये भी है कि कंपनी सिर्फ आर्मी के रिटायर लोगों को ही हायर करती है. इसकी वजह है कि उनमें अनुशासन होता है, वह इमरजेंसी के लिए पूरी तरह ट्रेंड होते हैं. हालांकि, कई जगहों पर आर्मी के लोग कम मिलते हैं, इसलिए हायरिंग में लंबा वक्त लग जाता है. ऐसे में नेवी और कोस्ट गार्ड के लोगों को भी हायर करने की सोच रहे हैं, ताकि अनुशासन ना बिगड़े.

एक चुनौती यह भी है कि लोग केयरटेकर की रिक्वायरमेंट नहीं समझते. लोग उन्हें सही से ट्रीट नहीं करते. लोगों को ये समझना होगा कि उन्हें रहने, खाने-पीने, नहाने-धोने की जगह भी देनी होगी. कई बार केयर टेकर चोरी भी कर देते हैं, पैरेंट्स पर चिल्ला देते हैं, जिन्हें मॉनिटर करना एक बड़ी चुनौती है.

फ्यूचर प्लान क्या है?

मौजूदा वक्त में योडा पुणे, मुंबई (थाने, नवी मुंबई, बोरीवली और दादर), हैदराबाद और सिकंदराबाद में है. कंपनी का प्लान है कि आने वाले दिनों में इसे धीरे-धीरे पूरे देश में फैलाया जाएगा. आने वाले दिनों में कुछ डिवाइस भी लाए जाएंगे, जिनके जरिए आसानी से सिर्फ एक क्लिक पर मदद बुलाई जा सकेगी. यह कुछ खास तरह के बटन होंगे जो आपके बाथरूम में, बिस्तर के पास, किचन में...जगह-जगह होंगे.

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