इस सरकारी योजना के तहत ग्रामीण युवाओं की भर्ती कर रही Tata की यह कंपनी, नौकरी के साथ कर सकेंगे पढ़ाई

अपने इस फैसले के साथ ही टाटा मोटर्स ने ऐसे कर्मचारियों पर दांव लगाने का फैसला किया है जिनका ट्रेनिंग हासिल करने के बाद नौकरी छोड़ देने का रिकॉर्ड रहा है.

इस सरकारी योजना के तहत ग्रामीण युवाओं की भर्ती कर रही Tata की यह कंपनी, नौकरी के साथ कर सकेंगे पढ़ाई

Thursday October 20, 2022,

4 min Read

रतन टाटा के नेतृत्व वाली टाटा ग्रुप की कंपनी और देश के सबसे बड़े वाहन निर्माताओं में से एक टाटा मोटर्स ने अपनी फैक्टरियों के लिए अस्थायी श्रमिकों को काम पर रखने के बजाय, स्कूल छोड़ने वाले और इंडस्ट्रीयल ट्रेनिंग कॉलेजों से ग्रेजुएट्स करने वालों की भर्ती शुरू कर दी है.

अपने इस फैसले के साथ ही टाटा मोटर्स ने ऐसे कर्मचारियों पर दांव लगाने का फैसला किया है जिनका ट्रेनिंग हासिल करने के बाद नौकरी छोड़ देने का रिकॉर्ड रहा है.

टाटा मोटर्स के चीफ एचआर ऑफिसर और प्रेसिडेंट रविंद्र कुमार ने कहा कि अब हम (सरकार के) कौशल्य प्रोग्राम के तहत दूरदराज के इलाकों से 12वीं कक्षा और आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) ग्रेजुएट्स को काम पर रख रहे हैं, जहां हम नौकरी पर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में सक्षम बनाते हैं.

इन कर्मचारियों को लेटेस्ट डिजिटल स्किल्स में ट्रेंड किया जाता है. भारत में सात कारखानों वाली ऑटोमेकर में 14,000 अस्थायी कर्मचारी हैं, जो आईटीआई और क्लास 12 ग्रेजुएट्स के 8,000 के लगभग दोगुने हैं. टाटा मोटर्स में इस प्रोग्राम की शुरुआत दो साल पहले हुई थी.

बता दें कि, ऑटो प्लांटों में आमतौर पर सात से नौ महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों की जगह दूसरे तरह के कर्मचारियों को हायर करने की शुरुआत महामारी के दौरान हुई.

कुमार ने कहा कि कोविड-19 के दौरान, एक समय ऐसा भी आया जब अस्थायी वर्कफोर्स की नियुक्ति करना बहुत कठिन था क्योंकि उनमें से कई प्रवासी थे और वे अपने घर चले गए थे.

बता दें कि, ब्लू और व्हाइट कॉलर वर्कर्स के अलावा, वाहन निर्माता बड़ी संख्या में अस्थायी श्रमिकों को भी हायर करते हैं. अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती तब बढ़ जाती है जब वाहन निर्माता मांग को पूरा करने के लिए वाहनों पर तेजी से काम करना शुरू कर देते हैं.

कुमार का कहना है कि अस्थायी कर्मचारियों की कोई कमी नहीं है लेकिन कोविड-19 के बाद अब उन्हें जिस तरह स्किल्स वाले कर्मचारी चाहिए उनकी जरूरत बदल गई है.

क्या है दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना?

देश के ग्रामीण युवाओं को नौकरी दिलाने के लिए भारत सरकार ने 25 सितंबर, 2014 को दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) की शुरुआत की थी. यह ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों में से एक है.

केंद्र की इस योजना का उद्देश्य गरीब ग्रामीण युवाओं को सरकार द्वारा स्किल देने के बाद निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे ऊपर के वेतन पर रोजगार उपलब्ध कराना है. सरकार का लक्ष्य डीडीयू-जीकेवाई से 5.5 करोड़ से अधिक ग्रामीण युवाओं को कुशल बनाने और उसके बाद रोजगार उपलब्ध कराना है.

इन क्षेत्रों के लिए किया जाता है प्रशिक्षित

डीडीयू-जीकेवाई के तहत खुदरा कारोबार, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य, निर्माण, ऑटो, चमड़ा, बिजली, पाइपलाइन, रत्न और आभूषण आदि क्षेत्र में युवाओं को कुशलता की ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें एक मात्र शर्त यह है कि कुशलता मांग आधारित होनी चाहिए. साथ ही ट्रेनिंग के लिए शर्त यह भी है कि कम से कम 75 फीसदी युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए.

वंचित समूहों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को आरक्षण

डीडीयू-जीकेवाई में सामाजिक रूप से वंचित समूह को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना के लिए आवंटित धन का 50 फीसदी अनुसूचित जाति-जनजाति, 15 फीसदी अल्पसंख्यकों के लिए और 3 फीसदी विकलांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित किया गया है. इस तरह के कुशलता कार्यक्रम में युवाओं की संख्या में एक तिहाई संख्या महिलाओं की रखी गयी है.

1 लाख तक की मदद का प्रावधान

डीडीयू-जीकेवाई के तहत कुशलता विकसित करने के कार्यक्रम में 25,696 से लेकर 1 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है. यह वास्तव में परियोजना की अवधि और ट्रेनिंग योजना के प्रकार (आवासीय या गैर आवासीय) पर निर्भर करता है. डीडीयू-जीकेवाई 576 घंटे (3 महीने) से लेकर 2,304 घंटे (12 महीने) तक के प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता देता है.

देश के 27 राज्यों में लागू

यह कार्यक्रम वर्तमान में 27 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है और 1891 परियोजनाओं में 2379 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र हैं, जिसमें 877 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईए) के साथ 57 क्षेत्रों में प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है और 616 से अधिक तक की नौकरियां हैं.

डीडीयू-जीकेवाई के तहत, 31 मार्च, 2022 तक  कुल 11.61 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है और 7.16 लाख को प्लेटमेंट दिया गया है.


Edited by Vishal Jaiswal