हाथ से गटर की सफाई करने की प्रथा को ख़त्म करने का लक्ष्य रखता है ये स्टार्टअप

ये स्टार्टअप पानी और सैनिटेशन के फील्ड में काम कर रहा है. और टेक्नोलॉजी की मदद से मैन्युअल स्कैवेंजिंग को ख़त्म करने का लक्ष्य रखता है. इनके प्रोडक्ट होमोसेप और एंडोबॉट पाइपलाइन में ब्लॉकेज डिटेक्ट कर लेते हैं और फिर उन्हें साफ़ कर देते हैं.

हाथ से गटर की सफाई करने की प्रथा को ख़त्म करने का लक्ष्य रखता है ये स्टार्टअप

Monday February 13, 2023,

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साल 2022 में पार्लियामेंट के मॉनसून सत्र में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि बीते पांच साल में गटर की सफाई करते हुए 330 जानें गई हैं. अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये आंकड़ा उन केसेज को शामिल करता है जो रिपोर्टेड हैं. असल संख्या जाने कितनी होगी.

हाथ से गटर की सफाई करने और हाथ से मैला ढोना हमारे देश की एक बहुत बड़ी समस्या है. न सिर्फ ये गटर में उतरने वालों की जान के लिए खतरा पैदा करता है, बल्कि समाज में पसरे भेदभाव को और बल देता है. मगर आज एक ऐसे स्टार्टअप के बारे में हम आपको बता रहे हैं जो इस दिशा में काम कर रहा है, जिससे गटर की सफ़ाई में किसी इंसान को अपनी जान खतरे में न डालनी पड़े.

यहां हम आपको बता रहे हैं स्टार्टअप Solinas के बारे में. ये स्टार्टअप पानी और सैनिटेशन के फील्ड में काम कर रहा है. और टेक्नोलॉजी की मदद से मैन्युअल स्कैवेंजिंग को ख़त्म करने का लक्ष्य रखता है. इनके प्रोडक्ट होमोसेप और एंडोबॉट पाइपलाइन में ब्लॉकेज डिटेक्ट कर लेते हैं और फिर उन्हें साफ़ कर देते हैं. ये काम छोटी और बड़ी, दोनों रेंज की पाइपलाइन में कर सकते हैं.

इस स्टार्टअप की शुरुआत IIT मद्रास (IIT Madras) के इन्क्यूबेशन सेंटर में हुई. भावेश नारायणी और दिवांशु कुमार IIT मद्रास के स्टूडेंट रहे. कोफाउंडर मोइनाक बनर्जी KTH रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से पढ़े हैं वहीं को-फाउंडर लिंडा जसलीन SRM यूनिवर्सिटी पासआउट हैं. इन्हें मदद मिली IIT मद्रास के प्रोफेसर्स प्रभु राजगोपाल और कृष्णन बालसुब्रमनियम से.

इनका प्रोडक्ट होमोसेप सेप्टिक टैंक साफ़ करने के लिए बनाया गया है. इसकी कीमत 15 से 20 लाख है. वहीं एंडोबॉट का काम एसेट मैनेजमेंट है. ये पानी की पाइपलाइन की मॉनिटरिंग करता है जिससे पानी में प्रदूष्ण घटाया जा सके. इसका काम लीक रोकना, पानी में मिट्टी जमने से रोकना, पाइप का ख़राब होना या टूटना डिटेक्ट करना है. इस सुविधा का लाभ म्युनिसिपैलिटीज ले सकती हैं, जिसके लिए इन्हें 150 रुपये पैर मीटर देकर ये टेक्नोलॉजी खरीदनी होगी.

सोलिनास के प्रोडक्ट्स फ़िलहाल प्राइवेट और पब्लिक, दोनों सेक्टर्स में इस्तेमाल हो रहे है. इनका कस्टमर बेस चेन्नई, कोइम्बटोर, मुंबई, अहमदाबाद, नागपुर और विशाखापटनम में हैं. कंपनी के लक्ष्य है कि अगले साल तक इनकी मौजूदगी इंडिया के हर बड़े शहर में हो और मैन्युअल स्कैवेंजिंग को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए.

इंडिया की मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि ये स्टार्टअप पानी के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है.

यह स्टार्टअप YourStory की साल 2022 की Tech30 लिस्ट का हिस्सा है.

YourStory हर साल अपने सिग्नेचर इवेंट TechSparks में आपके लिए कई हज़ारों में से चुनकर लाता है Tech30 लिस्ट में ऐसे 30 स्टार्टअप जो देश को बदल देने के साथ साथ अरबों की कंपनियां बनने की ताकत रखते हैं.

Tech30 ने बीते 11 साल में 330 से ज्यादा स्टार्टअप्स को प्रोफाइल कर उनके बारे में दुनिया को बताया है, 35,000 से ज्यादा नौकरियां देने में मदद की है, 300 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा की फंडिंग इसकी मदद से आई है और 675 से भी ज्यादा युवा फाउंडर्स को हमने कुछ कर दिखाने की ताकत दी है. Tech30 लिस्ट का हिस्सा रहे 5 ऐसे स्टार्टअप हैं जो यूनिकॉर्न बन चुके हैं. यानी उनका वैल्यूएशन 100 करोड़ डॉलर से ज्यादा है और ये सिलसिला अभी रुका नहीं है.


Edited by Prateeksha Pandey

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