इंटरनेट पर कॉन्टेन्ट परोसने वाली कंपनियों को यूज़र्स बढ़ाने के लिए भारत को लुभाने की ख़ास ज़रूरत!

By Sindhu Kashyaap
January 31, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
इंटरनेट पर कॉन्टेन्ट परोसने वाली कंपनियों को यूज़र्स बढ़ाने के लिए भारत को लुभाने की ख़ास ज़रूरत!
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सांकेतिक तस्वीर

हाल में ऑनलाइन विडियो स्ट्रीमिंग के मार्केट में ‘नेक्स्ट 500 मिलियन’ की बात काफ़ी प्रचलित तौर पर होती रहती है। इस क्षेत्र से जुड़े नेटफ़्लिक्स, ऐमज़ॉन प्राइम और हॉटस्टार समेत सभी बड़े नाम इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। दरअसल यहां बात हो रही है, ऑनलाइन विडियो स्ट्रीमिंग की सुविधा से अतिरिक्त 500 मिलियन यूज़र्स को जोड़ने की, जिसमें भारत और भारतीय दर्शकों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।


भारत में 30 से भी ज़्यादा ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ उपलब्ध हैं और गूगल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अगले साल तक ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ का व्यूअर बेस 250 मिलियन तक पहुंचने के आसार हैं। बीसीजी की एक रिपोर्ट का कहना है कि अगले साल तक ओटीटी (ओवर द टॉप) सर्विसेज़ से मिलने वाला रेवेन्यू 22,500 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है और यह आंकड़ा मूलरूप से कॉन्टेन्ट पर ही निर्भर करता है। 


ईवाय-एफ़आईसीसीआई की एक रिपोर्ट में पाया गया है भारत में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स पर बिताए जाने वाले समय का मात्र 7 प्रतिशत हिस्सा अंग्रेजी भाषा के कॉन्टेन्ट पर खर्च होता है। वहीं, हिन्दी में उपलब्ध कॉन्टेन्ट की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत तक की है और शेष कॉन्टेन्ट क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। इन आंकड़ों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि भारतीय भाषाओं के कॉन्टेन्ट के विकास की संभावनाएं काफ़ी अधिक हैं। 


ऐसे में अगर ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स के बाज़ार को आने वाले समय में 500 मिलियन उपभोक्ताओं का लक्ष्य हासिल करना है कि तो उन्हें भारतीय आबादी की पसंद और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना होगा। ज़ी 5 मीडिया के बिज़नेस हेड मनीष अग्रवाल का कहना है कि ओटीटी का पहुंच, यूज़र की पसंद और उनके व्यक्तिगत अनुभव पर निर्भर करती है और अगर भारतीय दर्शकों को अधिक से अधिक मात्रा में लुभाना है तो उनके सामने ऐसी भाषाओं में कॉन्टेन्ट परोसना होगा, जिनके साथ वे सहज हों। मनीष ने जानकारी दी कि उनका समूह पिछले काफ़ी समय से लगातार भारतीय भाषाओं में कॉन्टेन्ट तैयार करने की दिशा में मेहनत कर रहा है। 


हमारे दिमाग़ में सवाल आ सकता है कि ये 500 मिलियन उपभोक्ता हैं कौन? यहां बात हो रही भारतीय उपभोक्ताओं की। दरअसल, रिलायंस जियो के किफ़ायती इंटरनेट ऑफ़र्स आने के बाद से जनता को बेहद कम दामों में इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध है। 2016 (जियो के लॉन्च से पहले) में भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 426 मिलियन थी, जो 30 जून, 2018 तक 512.26 मिलियन तक पहुंच गई। इनमें से लगभग 95.8 प्रतिशत यूज़र्स मोबाइल के ज़रिए इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। 


अभिनेता और निर्माता के साथ-साथ ऑन्त्रप्रन्योर की भी सफल भूमिका अदा करने वाले बाहुबली फ़ेम राणा डग्गुबाती ने इस संबंध में कहा, "अब समय आ चुका है, जब सिनेमाघरों के अतिरिक्त भी कई माध्यमों से दर्शकों के सामने कॉन्टेन्ट परोसने की ज़रूरत है। ओटीटी ने बहुत से अलग क़िस्म के स्टोरीटेलर्स, ऐक्टर्स और प्रड्यूसर्स को एक अच्छा प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराया है।" उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि हर क्षेत्र के लोगों की अपनी पसंद होती है और उनकी पसंद की सामग्री को उनकी भाषा में प्रस्तुत करना ज़रूरी है। 


मिशेल स्पेगलमैन, वाइस प्रेज़िडेंट, ग्लोबल प्रोडक्ट इनोवेशन, नेटफ़्लिक्स ने योर स्टोरी से हुई बातचीत में कहा था, "भारत में हमारे कॉन्टेन्ट इनवेस्टमेंट में बड़ा इज़ाफ़ा हुआ है।" एरॉस डिजिटल की सीईओ रिषिका लूला का कहना है, "एरॉस नाऊ में हम लगातार विभिन्न प्रकार के क्वॉलिटी कॉन्टेन्ट तैयार करने की दिशा में प्रयास करते रहते हैं। हम कस्मटमर लाइफ़ साइकल के हर पहलू को छूने का प्रयास करते हैं। इस संदर्भ में क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार होने वाला कॉन्टेन्ट काफ़ी प्रभावी होता है।"


अगर हम आंकड़ों की बात करें तो रिपोर्ट्स के मुताबिक़, जहां तक वीडिया स्ट्रीमिंग ऐप्स की डाउनलोडिंग का सवाल है तो हॉटस्टार की भागीदारी 70 प्रतिशत तक है। वहीं वूट की 11 प्रतिशत, ऐमज़ॉन प्राइम की 5 प्रतिशत और नेटफ़्लिक्स की 1.4 प्रतिशत तक है। हॉटस्टार पर अग्रेज़ी और हिंदी दोनों ही भाषाओं का कॉन्टेन्ट मिश्रित तौर पर उपलब्ध है। वहीं क्रिकेट से संबंधित कॉन्टेन्ट होने की वजह से भारतीय दर्शक इसे प्राथमिकता देते हैं। 


डेलॉइट की एक रिपोर्ट का कहना है कि ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर काम करने वाले कंपनियों ने हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में नया कॉन्टेन्ट तैयार करने के लिए 3,300 करोड़ रुपए का बजट तैयार कर रखा है।


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