चरखे की मदद से प्लास्टिक को फैब्रिक में बदल रहे हैं ये सामाजिक उद्यमी, अमेरिका और दुबई में एक्सपोर्ट होते हैं इनके उत्पाद

प्लास्टिक कचरे को खूबसूरत उत्पादों में बदल रहा है यह उद्यम!
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"ईकोकारी (EcoKaari) एक ऐसा सामाजिक उद्यम है जो हथकरघे और चरखे का इस्तेमाल कर प्लास्टिक कचरे को हैंडक्राफ्टेड फैब्रिक में बदलने का काम कर रहा है। बाद में इन फैब्रिक का इस्तेमाल फैशन से जुड़ी वस्तुएँ, होम डेकोर और स्टेशनरी प्रॉडक्ट आदि के निर्माण में किया जाता है।"

पर्यावरण की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारक अगर कोई है तो वो सिंगल यूज प्लास्टिक ही है। भारत समेत दुनिया भर के देश सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को खत्म करने की दिशा में प्रतिबद्धता जताते हुए आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी भी यह लक्ष्य काफी दूर नज़र आ रहा है।

ऐसे में कुछ सामाजिक उद्यम इस दिशा में एक अलग और इनोवेटिव ढंग से समाधान निकलते हुए खुद को साबित करने का काम कर रहे हैं।

ईकोकारी (EcoKaari) एक ऐसा ही सामाजिक उद्यम है जो हथकरघे और चरखे का इस्तेमाल कर प्लास्टिक कचरे को हैंडक्राफ्टेड फैब्रिक में बदलने का काम कर रहा है। बाद में इन फैब्रिक का इस्तेमाल फैशन से जुड़ी वस्तुएँ, होम डेकोर और स्टेशनरी प्रॉडक्ट आदि के निर्माण में किया जाता है।

ग्रामीण महिलाएं करती हैं निर्माण

इस उद्यम की शुरुआत साल 2020 में पुणे में हुई है, जिसका प्रमुख उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ ही ग्रामीण कारीगरों को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। ईकोकारी के लगभग सभी उत्पादों का निर्माण ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जाता है, इन सभी महिलाओं ने या तो महामारी के चलते अपनी नौकरी खो दी थी या फिर व्यक्तिगत या पारिवारिक कारणों से कभी नौकरी नहीं कर सकीं।

इसी के साथ ईकोकारी के साथ पढ़ाई कर रहे कई युवा भी काम कर रहे हैं। ये सभी युवा सुबह अपने लेक्चर अटेंड करते हैं और फिर ईकोकारी के साथ काम करते हैं।

ऐसी है निर्माण प्रक्रिया

फैब्रिक उत्पादन की प्रक्रिया कच्चे माल की खरीद के साथ शुरू होती है, जो ईकोकारी के लिए कचरे के रूप में नॉन-बायोडिग्रेडेबल और मुश्किल से रिसायकल होने वाली प्लास्टिक है। इसमें पैकेजिंग सामग्री, चिप्स के पैकेट, गिफ्ट रैपर के साथ ही पुराने ऑडियो और वीडियो कैसेट टेप भी होते हैं, जिन्हें बाद में आकार, रंग और मोटाई के आधार पर अलग-अलग कर लिया जाता है।

आमतौर पर ईकोकारी को कच्चा माल तीन श्रोतों से मिलता है। पहला श्रोत वो एनजीओ हैं जो इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं, दूसरा श्रोत वो जागरूक नागरिक हैं जो देशभर से ईकोकारी को बेकार हो चुके प्लास्टिक उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जबकि तीसरा श्रोत वो कॉर्पोरेट हैं जो बड़ी तादाद में हर साल इस तरह का प्लास्टिक कचरा डंप करते हैं।

अलग की गई इस प्लास्टिक को फिर प्राकृतिक क्लीनर की मदद से साफ किया जाता है। गौरतलब है कि इस पूरी प्रक्रिया में पानी का उपयोग कम से कम किया जाता है। साफ हो जाने के बाद इस प्लास्टिक को सुखाया जाता है और फिर मैनुअल ढंग से इसे स्ट्रिप में काटा जाता है। इसके बाद इसे चरखे और हथकरघे की मदद से बुना जाता है।

विदेश में होता है निर्यात

बुनाई के बाद डिजाइन टीम ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले लेती है और इसके बाद इस फैब्रिक को उसी आधार पर दर्जी उत्पाद की शक्ल देना शुरू कर देते हैं। इन सभी उत्पादों को मुख्य रूप से उद्यम की वेबसाइट पर बेचा जाता है।

इतना ही नहीं, पुणे स्थित कार्यालय से इन उत्पादों की खुदरा बिक्री भी की जाती है, जबकि ये उत्पाद आपको तमाम प्रदर्शनियों में भी देखने को मिल सकते हैं। भारत में बिक्री के साथ ही इन उत्पादों को ऑस्ट्रेलिया, दुबई, फांस, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, अमेरिका और यूके में भी निर्यात किया जाता है।

Edited by रंजना त्रिपाठी