बच्चों को टीका लगाने के लिए झारखंड की यह नर्स हर दिन अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ पार करती है नदी

By Ranjana Tripathi
June 24, 2021, Updated on : Fri Jun 25 2021 05:54:27 GMT+0000
बच्चों को टीका लगाने के लिए झारखंड की यह नर्स हर दिन अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ पार करती है नदी
झारखंड की मंती कुमारी अपनी 1.5 साल की बेटी को पीठ पर बिठाकर छोटे बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए हर दिन लगभग 35 किलोमीटर की यात्रा करती हैं, नदियों और कठिन इलाकों को पार करती है।
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COVID-19 महामारी ने हमारे जीवन को उल्टा कर दिया है। जहां हम में से कुछ घर से काम करने और घर के कामों को संभालने की चुनौतियों से निपट रहे हैं, वहीं कई अन्य लोगों की नौकरी चली गई है। लेकिन झारखंड में एक संविदा सहायक नर्स दाई, मंती कुमारी के लिए, यह पूरी तरह से एक अलग ही तरह का मामला रहा है।


झारखंड में लातेहार के महुआदानर ब्लॉक में छोटे बच्चों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी को देखते हुए, उन्हें न केवल 35 किलोमीटर की यात्रा करनी है, कठिन इलाकों को पार करना है और आठ गांवों को कवर करना है, बल्कि उन्हें अपने कंधे पर डेढ़ साल की बेटी और उपकरण का डिब्बा भी साथ लेकर चलना पड़ता है, जो कि आसान बात नहीं है।


मंती का कहना है कि वह एक साल से अधिक समय से इस दिनचर्या का पालन कर रही हैं।


मंती ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

"चूंकि कुछ गांव जिन्हें मैं कवर करना चाहती हूं, वे बहुत दूर स्थित हैं, नदियों के रास्ते में, इसे पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालाँकि ये नदियाँ बहुत गहरी नहीं हैं, फिर भी बरसात के मौसम में धारा के साथ बह जाने की संभावना हमेशा बनी रहती है। कभी-कभी जब पानी का स्तर बढ़ जाता है तो मुझे उस गांव को तब तक छोड़ना पड़ता है जब तक कि पानी कम न हो जाए।"


टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित करने के बाद, मंती को महुआदनार से चेतमा स्वास्थ्य केंद्र तक 25 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है, जहाँ वह अपने पति सुनील उरांव के साथ रहती है। सुनील ने तालाबंदी के दौरान अपनी नौकरी खो दी, जिससे मंती परिवार में एकमात्र कमाने वाली बन गईं। सप्ताह में छह दिन गांवों में जाने के अलावा बच्चे की देखभाल और परिवार का भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है।


मंती कहती हैं, कि वह हर महीने कम से कम एक बार तिसिया, गोइरा और सुगमबंध गांवों का दौरा करती हैं, और उन्हें तीन अलग-अलग स्थानों पर नदी पार करनी होती है। उनके पति लॉकडाउन के कारण सार्वजनिक परिवहन की अनुपलब्धता के कारण यात्रा के एक हिस्से को कवर करने में उनकी मदद करते हैं।


चेतमा स्वास्थ्य उप-केंद्र के एक चिकित्सा अधिकारी अमित खलखो ने कहा, "मंती द्वारा अपनी बेटी को पीठ पर लेकर पूरी दूरी तय करना वास्तव में सराहनीय है।"


मंती ने इस तरह से न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाई है, बल्कि एक ऐसा क्षेत्र जहां बच्चों के लिए उचित स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है, वहां भी अपनी सामाजिक भूमिका का निभाई है। मंती की यह कोशिश यकीनन सराहनीय है और बाकि लोगों के लिए उदाहरण है।

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